शिक्षा मंत्रालय
शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने के उपाय
प्रविष्टि तिथि:
03 AUG 2026 8:12PM by PIB Delhi
शिक्षा प्लस के लिए एकीकृत जिला जानकारी प्रणाली (यूडीआईएसई +) के अनुसार, 2024-25 और 2025-26 में विभिन्न शैक्षणिक स्तरों में स्कूल छोड़ने की दर इस प्रकार है:
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वर्ष
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प्राथमिक (कक्षा III से कक्षा V)
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माध्यमिक (कक्षा VI से कक्षा VIII)
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उच्चतर माध्यमिक (कक्षा IX से कक्षा XII)
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2024-25
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2.3
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3.5
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8.2
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2025-26
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1.8
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3.6
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7.0
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केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं जैसे समग्र शिक्षा, स्टार्स और पीएम श्री के तहत, राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों को मौजूदा सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ करने और अतिरिक्त कक्षाएँ, लड़कों/लड़कियों/ सीडब्ल्यूएसएन के लिए शौचालय, पीने का पानी, बिजली, चारदीवारी, पुस्तकालय, आईसीटी और डिजिटल क्लासरूम जैसी अवसंरचना सुविधाओं के निर्माण और संवर्धन के लिए समर्थन दिया जाता है, जो यूडीआईएसई + डेटाबेस से निर्धारित कमियों और संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश से प्राप्त प्रस्तावों पर आधारित होते हैं। स्कूलों में अवसंरचना सुविधाओं की जरूरत हर साल संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेश द्वारा उनकी जरूरत और प्राथमिकता के आधार पर तय की जाती है और इसे उनके वार्षिक कार्य योजना और बजट (एडब्ल्यूपी&बी) में दर्शाया जाता है। इन योजनाओं को फिर परियोजना अनुशंसा बोर्ड (पीएबी) द्वारा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विचार-विमर्श करके कार्यक्रम और वित्तीय मानदंडों, पहले स्वीकृत कार्यों की भौतिक और वित्तीय प्रगति और बजट संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार समीक्षा की जाती है और मंजूरी दी जाती है। इसके अलावा, केंद्र सरकार, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को समग्र शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से मदद करती है और बालवाटिका से कक्षा 8 तक प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण (पीएम पोषण) योजना के तहत गर्म भोजन प्रदान किया जाता है।
सरकारी स्कूलों में स्कूल छोड़ने की दर को कम करने और नामांकन बढ़ाने से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को, जिसमें पश्चिम बंगाल भी शामिल है, वित्तीय सहायता/अनुदान भी दिया जाता है। इसमें उच्चतर माध्यमिक तक नए स्कूलों को खोलना/मजबूत करना, स्कूल अवसंरचना मजबूत करना, कक्षा 12 तक के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) स्थापित करना, उन्नयन करना और संचालित करना, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय/छात्रावास स्थापित करना, प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) के तहत छात्रावास, परिवहन भत्ता, नामांकन अभियान चलाना, मौसमी छात्रावास/आवासीय शिविर, स्कूलों में कौशल शिक्षा और आईसीटी सुविधाओं की व्यवस्था, मुफ्त पाठ्यपुस्तक और मुफ्त यूनिफ़ॉर्म देना, परिवहन/साथी सुविधा आदि शामिल हैं।
पीएम श्री योजना 14,500 से अधिक चयनित स्कूलों को आदर्श स्कूल के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से लॉन्च की गयी थी। ये स्कूल अपने पड़ोस के अन्य स्कूलों को नेतृत्व प्रदान करेंगे और एनईपी 2020 की सभी पहलों को प्रदर्शित करेंगे।
शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय है और इस कारण, देश के अधिकतर स्कूल राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक नियंत्रण में आते हैं। शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और उनकी सही तरीके से तैनाती से जुड़े कार्य संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के अंतर्गत आते हैं। शिक्षकों की भर्ती एक निरंतर प्रक्रिया है, और खाली पद अलग-अलग कारणों से उत्पन्न होते हैं, जैसे सेवानिवृत्ति, इस्तीफा और छात्र नामांकन में वृद्धि के कारण शिक्षकों की अधिक आवश्यकता। केंद्र सरकार समग्र शिक्षा की केंद्र प्रायोजित योजना के माध्यम से राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान करती है, ताकि स्कूल के विभिन्न स्तरों में उचित छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) बनाए रखा जा सके, जो बाल निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009, जिसे समय-समय पर संशोधित किया गया है, के निर्धारित मानकों के अनुरूप हो।
17 मई, 2020 को 'आत्मनिर्भर भारत अभियान' के एक हिस्से के रूप में पीएम ई-विद्या नामक एक व्यापक पहल शुरू की गई थी, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तत्वावधान में पश्चिम बंगाल, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, बिहार और मणिपुर राज्यों सहित पूरे देश में शिक्षा के लिए बहु-विधि पहुंच को सक्षम करने के लिए डिजिटल/ऑनलाइन/ऑन-एयर शिक्षा से संबंधित सभी प्रयासों को एकीकृत करती है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (यूटी) अपनी मातृभाषा/स्थानीय/क्षेत्रीय भाषाओं में आवश्यकताओं के अनुसार इन पहलों की प्रभावशीलता का उपयोग, निगरानी और मूल्यांकन करने के लिए एनसीईआरटी के साथ सहयोग करते हैं। पीएम ई-विद्या में राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों/स्वायत्त निकायों (एबी)/भारत सरकार के अन्य मंत्रालयों को आवंटित 200 डीटीएच टीवी चैनल और 400 रेडियो चैनल शामिल हैं, ताकि वे अपनी जरूरत के अनुसार विभिन्न भारतीय भाषाओं में कक्षा 1-12 के लिए पूरक शिक्षा प्रदान कर सकें।
ज्ञान साझा करने के लिए डिजिटल अवसंरचना (दीक्षा) देश का एक राष्ट्र, एक डिजिटल मंच है, जो सभी स्तरों के लिए क्यूआर कोड युक्त मानक पाठ्यपुस्तकों (ईटीबी) के साथ-साथ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा के लिए गुणवत्तापूर्ण ई-सामग्री प्रदान करता है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों/एबी ने बहुभाषावाद को सक्षम करने के लिए स्थानीय/क्षेत्रीय भाषाओं में 3.7 लाख से अधिक कंटेंट तैयार किये हैं। दीक्षा ऑफलाइन सीमित या बिना इंटरनेट संपर्क-सुविधा वाले क्षेत्रों का समर्थन करता है। हितधारकों को दीक्षा के 450+ से अधिक वर्चुअल लैब और 100 वर्चुअल स्किल लैब तक पहुंच की सुविधा मिलती है।
यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।
पीके/केसी/जेके
(रिलीज़ आईडी: 2294125)
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