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संसद प्रश्न: परमाणु ऊर्जा को बढ़ाना

प्रविष्टि तिथि: 30 JUL 2026 5:17PM by PIB Delhi

सरकार ने अगले दो दशकों अर्थात वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। इसकी घोषणा केन्द्रीय बजट 2025-26 में परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत की गई थी। इसका उद्देश्य देश के ऊर्जा मिश्रण में विश्वसनीय, निम्न-कार्बन आधार-भार परमाणु ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाना तथा विकसित भारत के दृष्टिकोण और वर्ष 2070 तक शुद्ध-शून्य कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है।

यह रोडमैप दो-आयामी रणनीति पर आधारित है। इसके अंतर्गत स्वदेशी 700 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले दाबित भारी जल रिएक्टरों (पीएचडब्ल्यूआर) तथा हरित क्षेत्रों में बड़े आयातित उन्नत रिएक्टरों की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही, पुराने जीवाश्म ईंधन आधारित विद्युत संयंत्रों के पुनः उपयोग, ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए कैप्टिव विद्युत उत्पादन तथा ऑफ-ग्रिड अनुप्रयोगों जैसे ब्राउनफील्ड उपयोगों के लिए लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों (एसएमआर) के विकास और तैनाती पर भी कार्य किया जाएगा।

रोडमैप के अनुसार, वर्तमान 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता, विभिन्न चरणों में कार्यान्वित की जा रही परियोजनाओं के क्रमिक रूप से पूर्ण होने पर वर्ष 2031-32 तक बढ़कर लगभग 22 गीगावाट होने की अपेक्षा है। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2032 के बाद परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा 32 गीगावाट अतिरिक्त परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित किए जाने की परिकल्पना की गई है। इसमें वर्ष 2047 तक स्थापित किए जाने वाले स्वदेशी दाबित भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) तथा लाइट वाटर रिएक्टर (एलडब्ल्यूआर) शामिल होंगे, जिससे एनपीसीआईएल की कुल परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 54 गीगावाट हो जाएगी।

शेष 46 गीगावाट क्षमता, जिसमें विभिन्न प्रौद्योगिकियों पर आधारित रिएक्टर शामिल होंगे, को विभिन्न व्यावसायिक मॉडलों के तहत अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (केन्‍द्र एवं राज्य), निजी क्षेत्र तथा संयुक्त उपक्रमों  द्वारा स्थापित किए जाने की अपेक्षा है।

केन्द्रीय बजट 2025-26 में की गई घोषणा के अनुसार, सरकार ने परमाणु ऊर्जा मिशन के अंतर्गत स्वदेशी रूप से अभिकल्पित लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों  (एसएमआर) के विकास और तैनाती का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत वर्ष 2033 तक कम-से-कम पाँच स्वदेशी एसएमआर को परिचालन में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इस दिशा में, परमाणु ऊर्जा विभाग (डीएई) की एक घटक इकाई भाभा परमाणु अनुसंधान केन्द्र (बीएआरसी) ने दाबित जल रिएक्टर (पीडब्ल्यूआर) प्रौद्योगिकी पर आधारित लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों के डिजाइन एवं विकास का कार्य प्रारंभ किया है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

    1. 220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर(बीएसएमआर-200)
    2. 55 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला लघु मॉड्यूलर रिएक्टर
    3. 5 मेगावाट तापीय तक की क्षमता वाला उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (एचटीजीसीआर), जिसे हाइड्रोजन उत्पादन के लिए उपयुक्त ऊष्मा-रासायनिक चक्र के साथ जोड़ा जा सकता है।

अत्‍याधुनिक परमाणु प्रौद्योगिकी के विकास के लिए आवश्यक विशेषज्ञता देश में उपलब्ध होने के कारण लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) प्रौद्योगिकी के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की परिकल्पना नहीं की गई है। तथापि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देश के रूप में भारत ज्ञान एवं अनुभव के आदान-प्रदान के उद्देश्य से एजेंसी द्वारा आयोजित तकनीकी कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेता है।

इन लघु मॉड्यूलर रिएक्टरों के निर्माण की अनुमानित अवधि वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने की तिथि से 60 से 72 माह है।

परियोजनाओं की अनुमानित लागत का विवरण नीचे दी गई तालिका में दिया गया है:

 

रिएक्‍टर

परियोजना लागत(करोड़ रुपये में)

 

220 मेगावाट विद्युत क्षमता वाला भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर

 (बीएसएमआर-200)

5960

55 मेगावाट विद्युत क्षमता वाले लघु मॉड्यूलर रिएक्टर 55 की दोहरी इकाई

(एसएमआर-55)

7000

5 मेगावाट तापीय तक की क्षमता वाला उच्च तापमान गैस-शीतित रिएक्टर (एचटीजीसीआर)

320

 

यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/केपी /डीए
 


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