प्रधानमंत्री कार्यालय
प्रधानमंत्री ने प्रकृति के संरक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए संस्कृत सुभाषित साझा किया
प्रविष्टि तिथि:
28 JUL 2026 7:48AM by PIB Delhi
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि मानवता का कल्याण प्रकृति की रक्षा और उसके सम्मान में ही निहित है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की सदियों पुरानी परंपराएं भी हमें इस धर्मसम्मत आचरण को अपनाने और प्राकृतिक जगत के साथ सामंजस्य बिठाकर जीने की प्रेरणा देती है।
प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषित साझा किया—
“लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥
दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥”
यह सुभाषित यह संदेश देता है कि प्रकृति और धर्म के साथ सामंजस्य बनाकर जिया गया जीवन ही सुख, सुरक्षा और कल्याण की नींव है। इसलिए, दिशाओं के रक्षक देवता, इंद्र के नेतृत्व में सभी प्रमुख देवगण, छहों ऋतुएं, सभी मास, वर्ष, रात्रियां, दिन और शुभ मुहूर्त सदैव मंगल और समृद्धि प्रदान करें। वेद, पवित्र स्मृतियां और धर्म सभी प्रकार से और सर्वत्र सब की रक्षा करें।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“प्रकृति के संरक्षण और सम्मान में ही मानवता का कल्याण निहित है। हमारी परंपरा भी हमें इसी धर्मसम्मत आचरण की प्रेरणा देती है।
लोकपालाश्च ते सर्वे वासवप्रमुखास्तथा। ऋतवः षट् च ते सर्वे मासाः संवत्सराः क्षपाः॥
दिनानि च मुहूर्ताश्च स्वस्ति कुर्वन्तु ते सदा। श्रुतिः स्मृतिश्च धर्मश्च पातु त्वां पुत्र सर्वतः॥”
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पीके/केसी/डीवी/डीए
(रिलीज़ आईडी: 2290220)
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