सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
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सरकार ने राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को वित्तीय सहायता प्रदान कर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम के कार्यान्वयन को मजबूत किया


केन्द्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत वर्ष 2022-23 से वर्ष 2024-25 के दौरान 1.18 लाख से अधिक पीड़ितों को राहत प्रदान किया गया

प्रविष्टि तिथि: 27 JUL 2026 6:22PM by PIB Delhi

सरकार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रभावी क्रियान्वयन को मजबूत बनाने के लिए राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को निरंतर वित्तीय तथा संस्थागत सहायता प्रदान कर रही है। इसका उद्देश्य पीड़ितों को समय पर राहत उपलब्ध कराना, अधिनियम का प्रभावी प्रवर्तन सुनिश्चित करना तथा अनुसूचित जातियों(एससी) और अनुसूचित जनजातियों(एसटी) के अधिकारों एवं गरिमा की रक्षा करना है।

यह जानकारी सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री रामदास आठवले ने राज्यसभा में श्री चंद्रकांत दामोदर हंडोरे द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में दिया।

मंत्री श्री आठवले ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत दर्ज अपराधों से संबंधित सांख्यिकीय आंकड़े गृह मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा संकलित किए जाते हैं तथा इन्हें प्रतिवर्ष उसकी 'क्राइम इन इंडिया' रिपोर्ट में प्रकाशित किया जाता है। इस संबंध में उपलब्ध नवीनतम प्रकाशित आंकड़े वर्ष 2024 तक के हैं।

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत अनुसूचित जातियों के खिलाफ अपराधों के अंतर्गत 57,569 मामले तथा अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध 10,064 मामले दर्ज किए गए। इसी प्रकार, वर्ष 2023 में अनुसूचित जातियों से संबंधित 57,766 मामले तथा अनुसूचित जनजातियों से संबंधित 12,959 मामले दर्ज किए गए। वहीं, वर्ष 2024 में अनुसूचित जातियों से संबंधित 55,685 मामले तथा अनुसूचित जनजातियों से संबंधित 9,961 मामले दर्ज किए गए।

उत्तर में आगे बताया गया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के दौरान अनुसूचित जातियों से संबंधित 17,123 मामलों तथा अनुसूचित जनजातियों से संबंधित 7,219 मामलों की जांच लंबित थी।

उत्तर में आगे यह भी बताया गया कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो(एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम के अंतर्गत अखिल भारतीय दोषसिद्धि दर वर्ष 2022 में अनुसूचित जाति से संबंधित मामलों में 34.1 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति से संबंधित मामलों में 28.1 प्रतिशत; वर्ष 2023 में यह क्रमशः एससी श्रेणी के लिए 32.4 प्रतिशत और एसटी श्रेणी के लिए 24.6 प्रतिशत; तथा वर्ष 2024 में एससी और एसटी श्रेणियों के लिए यह क्रमशः 33.9 प्रतिशत और 33.2 प्रतिशत रहा।

मंत्री श्री आठवले ने आगे बताया कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार 'पुलिस' तथा 'लोक व्यवस्था' राज्य सूची के विषय हैं। अतः कानून एवं व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों की जांच करना, अपराधों की रोकथाम करना तथा नागरिकों के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना, जिसमें अनुसूचित जाति(एससी) एवं अनुसूचित जनजाति(एसटी) के सदस्य भी शामिल हैं, संबंधित राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन की जिम्मेदारी है। केन्द्र सरकार समय-समय पर राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को आपराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए परामर्श जारी करते रहता है, जिसमें अनुसूचित जातियों एवं अनुसूचित जनजातियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों की रोकथाम पर विशेष जोर दिया जाता है।

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन में राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को सहयोग प्रदान करने के लिए केन्द्र सरकार नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम,1955 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने के लिए एक केन्द्र प्रायोजित योजना लागू कर रही है। इस योजना के अंतर्गत इन अधिनियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए केन्द्रीय सहायता प्रदान की जाती है, जिसमें अत्याचार के पीड़ितों को राहत एवं पुनर्वास उपलब्ध कराना भी शामिल है।

वित्तीय वर्ष 2022-23 के दौरान राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों को ₹392.71 करोड़ की केंद्रीय सहायता प्रदान की गई, जिससे 88,172 पीड़ितों को लाभ मिला। वित्तीय वर्ष 2023-24 में केंद्रीय सहायता बढ़कर ₹535.30 करोड़ हो गया, जिसके अंतर्गत 79,667 पीड़ितों को राहत प्रदान किया गया। वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान ₹495.29 करोड़ की सहायता राशि जारी की गई, जिससे देशभर में 99,965 पीड़ितों को लाभ प्राप्त हुआ।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय राज्य सरकारों तथा केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन के साथ मिलकर समन्वय में कार्य करना जारी रखे हुए है, ताकि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। इसके माध्यम से न्याय तक पहुंच को मजबूत बनाने, पीड़ितों को समय पर राहत प्रदान करने तथा देशभर में अनुसूचित जातियों(एससी) एवं अनुसूचित जनजातियों(एसटी) के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयास निरंतर जारी हैं।

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पीके/केसी/पीकेपी


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