कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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संसद प्रश्न: मिशन कर्मयोगी

प्रविष्टि तिथि: 23 JUL 2026 4:39PM by PIB Delhi

मिशन कर्मयोगी, राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम (एनपीसीएससीबी) को सितंबर 2020 में भारत सरकार द्वारा 'नियम-आधारित' से 'भूमिका-आधारित' मानव संसाधन प्रणाली में परिवर्तन करने और भारतीय लोकाचार में निहित होने के साथ-साथ वैश्विक दृष्टिकोण वाले सिविल सेवकों को तैयार करने के उद्देश्य से अनुमोदित किया गया था।

आज तक, 1.69 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता जुड़ चुके हैं और प्लेटफॉर्म डोमेन, कार्यात्मक और व्यवहारिक दक्षताओं में 5500 से अधिक पाठ्यक्रमों का संचालन करता है, जिसमें 14.08 करोड़ से अधिक पाठ्यक्रम पूरे हो चुके हैं। पाठ्यक्रम हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं सहित 23 भाषाओं में उपलब्ध हैं, जो क्षेत्रीय और भाषाई आवश्यकताओं के साथ व्यापक पहुंच और संरेखण को सक्षम बनाता है।

सरकार ने मिशन कर्मयोगी के लिए एक निगरानी और मूल्यांकन (एम एंड ) फ्रेमवर्क भी स्थापित किया है। यह ढांचा विभिन्न हितधारकों को सौंपी गई भूमिकाओं और जिम्मेदारियों के साथ प्रमुख प्रदर्शन संकेतक (केपीआई) पर हितधारकों के प्रदर्शन की निगरानी और मूल्यांकन करने में सक्षम बनाता है।

रिपोर्टिंग वर्ष 2025-26 से, आईजीओटी प्लेटफॉर्म पर अनिवार्य पाठ्यक्रमों और मूल्यांकनों की पूर्णता की स्थिति को केंद्र सरकार के कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर) में दर्ज किया जा रहा है।

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय में राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/एसकेएस/केके


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