मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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शीत जल मत्स्य पालन का विकास

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 1:34PM by PIB Delhi

मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय

के मछली पालन विभाग (Department of Fisheries) ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल ₹20,050 करोड़ के निवेश के साथ अपनी प्रमुख योजना प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) को लागू किया है। मत्स्य और जलीय कृषि में बुनियादी सुविधाओं की कमी को दूर करने के लिए, मछली पालन विभाग, भारत सरकार, विगत वर्ष 2018‑19 से समर्पित कोष मत्स्य एवं जलीय कृषि अवसंरचना विकास कोष (FIDF) का भी संचालन कर रहा है, जिसका कोष आकार ₹7,522.48 करोड़ है।

 प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) का उद्देश्य मछली उत्पादन और उत्पादकता, गुणवत्ता, प्रौद्योगिकी, फसल उपरांत बुनियादी  अवसंरचना और प्रबंधन, मूल्य श्रृंखला का आधुनिकीकरण व सुदृढ़ीकरण, ट्रैसेबिलिटी की स्थापना, एक मजबूत मत्स्य प्रबंधन रूपरेखा और शीत जल मत्स्य पालन में मछुआरों की कल्याण संबंधी आवश्यक खामियों को दूर करना है।

केंद्र सरकार के मछली पालन विभाग ने हिमालयी और पहाड़ी राज्यों के विभिन्न मत्स्य विकासात्मक परियोजनाओं के लिए कुल ₹706 करोड़ की स्वीकृति दी है, जिसमें शीत जल मत्स्य पालन विकास के प्रोजेक्ट भी शामिल हैं। 

शीत जल मत्स्य पालन और उससे संबंधित अवसंरचना के विकास में राज्यों का समर्थन करने के लिए "शीत जल मत्स्य पालन के विकास हेतु मॉडल दिशानिर्देश" की रूपरेखा 14 मार्च, 2026 को जारी की गई थी। ये दिशानिर्देश रेसवे (Raceways), रि‑सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम्स (RAS) यानि पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली, हैचरी, फ़ीड मिल, रोग‑निवारण और बाज़ार संबंधी लिंक‑जोड़ के विकास हेतु विनिर्देश प्रदान करती हैं। ताकि रेनबो ट्राउट, गोल्डन माहसीर और स्नो ट्राउट जैसे वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण शीत जल मछली प्रजातियों के उत्पादन, मूल्य संवर्धन और विपणन को बढ़ाया जा सके। 

इसके अतिरिक्त, मछली पालन विभाग, भारत सरकार ने विशेष रूप से शीत जल मत्स्य पालन के विकास के लिए चार क्लस्टरों की अधिसूचना जारी की है: इसमे जम्मू एवं कश्मीर का अनंतनाग जिला, उत्तराखंड का पिथौरागढ़ जिला, लद्दाख का करगिल जिला और हिमाचल प्रदेश का कुल्लू जिला।

(c) और (d): मछली पालन विभाग, भारत सरकार, दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के मत्स्य किसानों के लिए पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली (RAS), बायोफ्लोक(पानी में उपस्थित जहरीले कचरे को प्रोटीन युक्त खाद्यपदार्थ बदलाव की तकनीक) केज कल्चर, आई ओ टी आधारित जल‑गुणवत्ता निगरानी, जीआईएस मैपिंग, स्वतः फ़ीडर और डिजिटल बाजार प्लेटफ़ॉर्म जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के अंगीकरण को बढ़ावा देता है। 

पीएमएमसीवाई के अंतर्गत, शीत जल मत्स्य पालन हेतु एक मॉडल आरएएस  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR)‑केंद्रीय शीत जल मत्स्य पालन अनुसंधान संस्थान (ICAR‑CICFR), भीमताल के माध्यम से तीव्र ट्राउट उत्पादन और गोल्डन माहसीर प्रजाति की मछली के वर्षभर प्रजनन के लिए विकसित किया गया है। 

इसके अलावा, आईसीएआर ‑केंद्रीय मत्स्य प्रौद्योगिकी संस्थान (CIFT), कोच्चि ने हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में मछली प्रसंस्करण और रेडी‑टू‑ईट सुविधाओं के विकास में सहायता प्रदान की है।

यह जानकारी मत्स्य, पशुपालन एवं दुग्ध मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

पीके/ केसी/ एमएम 


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