पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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संसदीय प्रश्न: वर्षा में कमी

प्रविष्टि तिथि: 22 JUL 2026 2:10PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत भारत मौसम विज्ञान विभागदीर्घावधि औसत’' (एलपीए) के आधार पर रोज़ाना, साप्ताहिक और मौसमी वर्षा पर नज़र रखता है। 2026 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के शुरुआती हफ़्तों में देश के कई हिस्सों में वर्षा सामान्य से कम रही है। यद्यपि, वर्षा हर जगह और हर हफ़्ते अलग-अलग होती है, और कुछ इलाकों में सामान्य या सामान्य से ज़्यादा वर्षा हुई है। 14 जुलाई 2026 तक, देश में सामान्य से 21% कम वर्षा हुई; दक्षिण-पश्चिम मॉनसून में प्राकृतिक बदलावों के कारण कई मौसम संबंधी उप-क्षेत्रों में वर्षा में कमी दर्ज की गई, जबकि अन्य जगहों पर सामान्य या ज़रूरत से अधिक वर्षा हुई।

खेती, जल संसाधनों, पीने के पानी और भूजल पर वर्षा के असर का आकलन संबंधित मंत्रालय और राज्य सरकारें करती हैं। फ़िलहाल, अनाज उत्पादन पर देशव्यापी असर का कोई संकेत नहीं है।

भारत में मॉनसून की वर्षा में जगह और समय के हिसाब से बदलाव होते रहते हैं, जिससे अलग-अलग इलाकों में कम वर्षा या अधिक वर्षा हो सकती है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) वर्षा के वितरण पर लगातार नज़र रखता है और ज़रूरी कदम उठाने में प्रशासनिक अधिकारियों की सहायता के लिए नियमित मौसम पूर्वानुमान और चेतावनी जारी करता है। सूखा या बाढ़ की स्थिति का आकलन और घोषणा संबंधित राज्य सरकारें, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय तथा गृह मंत्रालय के साथ मिलकर करती हैं।

सरकार पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रम 'मिशन मौसम' के ज़रिए मौसम का पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को मज़बूत कर रही है। इस मिशन का उद्देश्य मौसम से जुड़ी जानकारी जुटाने के तरीकों को बेहतर बनाना, अलग-अलग भौतिक प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझना और ऐसे एडवांस्ड न्यूमेरिकल मॉडल विकसित करना है जिनमें इन प्रक्रियाओं को शामिल करके मौसम का सटीक पूर्वानुमान लगाने की क्षमता बढ़ाई जा सके।

पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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पीके/केसी/पीके


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