आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
कई शहरों में शहरी बाढ़ और भूस्खलन
प्रविष्टि तिथि:
20 JUL 2026 7:27PM by PIB Delhi
जल एवं स्वच्छता राज्य का विषय है और नालों की सफाई एवं गाद निकासी सहित शहरी बाढ़ के प्रबंधन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों तथा शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी)/शहरी विकास प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आती है, जो जल निकासी और सीवरेज प्रणाली के रखरखाव के लिए उत्तरदायी हैं। भारत सरकार योजनागत हस्तक्षेपों/परामर्शों के माध्यम से राज्यों के प्रयासों को सहयोग प्रदान करती है। साथ ही, शहरी नियोजन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए राज्यों को वित्तीय एवं तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराती है।
आमतौर पर अल्प अवधि में होने वाली अत्यधिक तीव्र वर्षा की बढ़ती घटनाएँ शहरी बाढ़ का प्रमुख कारण होती हैं। यह समस्या अनियोजित विकास, प्राकृतिक जल निकायों पर अतिक्रमण, अपर्याप्त सीवरेज प्रणाली, अपर्याप्त वर्षा जल निकासी व्यवस्था आदि के कारण और अधिक गंभीर हो जाती है।
मानसून-पूर्व नालों की सफाई, गाद निकासी आदि गतिविधियाँ शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के कार्यक्षेत्र में आती हैं तथा इन गतिविधियों के लिए यूएलबी द्वारा आवंटित, जारी एवं व्यय की गई धनराशि का विवरण केंद्र स्तर पर संधारित नहीं किया जाता।
आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने शहरी जल निकासी एवं बाढ़ प्रबंधन में सुधार के लिए निम्नलिखित दस्तावेज़/परामर्श संबंधी दिशा-निर्देश प्रकाशित किए हैं:
- शहरी एवं क्षेत्रीय विकास योजनाएं बनाना और इनका कार्यान्वयन (यूआरडीपीएफआई) दिशा-निर्देश, 2014
(https://www.mohua.gov.in/static/uploads/2025/10/1813403503fbec280e7648c0ae692512.pdf) & (https://www.mohua.gov.in/static/uploads/2025/10/dd392b7781e668614ae0446cfd114bc6.pdf)
ii. शहरी बाढ़ के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) (https://www.mohua.gov.in/static/uploads/2025/11/580e35ec9fae474aaa96bec087e76553.pdf)
- वर्ष 2021 में नदी-केंद्रित शहरी नियोजन दिशा-निर्देश, जिससे शहरों को प्रकृति-आधारित समाधानों सहित समेकित जल प्रबंधन दृष्टिकोण विकसित करने में सक्षम बनाया जा सके
(https://www.mohua.gov.in/static/uploads/2025/10/eb2bdfc0d54766fbbc52e56fe77ca687.pdf)
iv. वर्षा जल संचयन पार्कों के निर्माण हेतु मार्गदर्शक दस्तावेज़ (https://www.mohua.gov.in/static/uploads/2025/10/b0b5705fe04d5c0c9c33187aeef85823.pdf )
v. तूफानी जल निकासी प्रणाली पर मार्गदर्शक पुस्तिका
(https://www.mohua.gov.in/static/uploads/2025/10/8a2456c722036d78c72a698898ef846d.pdf)
वर्ष 2015 में शुरू किए गए अटल कायाकल्प एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) के अंतर्गत अन्य बातों के साथ-साथ तूफानी जल निकासी का एक घटक भी शामिल है, जिसके तहत बाढ़ को कम करने और समाप्त करने के लिए नालों/तूफानी जल निकासी नालों का निर्माण एवं सुधार तथा हरित क्षेत्रों और पार्कों का विकास किया जाता है। अमृत के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ₹3,022.39 करोड़ की लागत वाली तूफानी जल निकासी से संबंधित 838 परियोजनाएँ शुरू की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, अमृत के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा ₹1,604.13 करोड़ की लागत वाली हरित क्षेत्रों और पार्कों की 2,522 परियोजनाएँ शुरू की गई हैं तथा इन परियोजनाओं के माध्यम से 5,400 एकड़ पारगम्य हरित क्षेत्र विकसित किया गया है।
अमृत 2.0 के अंतर्गत राज्यों द्वारा हरित क्षेत्रों एवं पार्कों तथा जल निकायों के कायाकल्प से संबंधित परियोजनाएँ शुरू की गईं हैं। अमृत 2.0 के तहत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के ₹6,003.34 करोड़ की लागत वाले 2,951 जल निकाय कायाकल्प परियोजनाओं के प्रस्ताव, जो लगभग 1.21 लाख एकड़ क्षेत्र को कवर करते हैं, तथा ₹1,087.12 करोड़ की लागत वाली 1,649 हरित क्षेत्रों एवं पार्कों की परियोजनाएँ, जो लगभग 12,750 एकड़ क्षेत्र को कवर करती हैं, मंज़ूर की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, अमृत और अमृत 2.0 के अंतर्गत सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएँ भी शुरू की गई हैं, जो अन्य बातों के साथ-साथ वर्षा जल की निकासी में भी सहायक हैं। अमृत के अंतर्गत, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अमृत पोर्टल पर अद्यतन की गई जानकारी के अनुसार, सीवरेज/सेप्टेज प्रबंधन की 888 परियोजनाएँ शुरू की गई हैं, जिनके परिणामस्वरूप लगभग 22,539 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क विकसित किया गया है। अमृत 2.0 के अंतर्गत राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने 40,021 किलोमीटर सीवर नेटवर्क को कवर करने वाली 605 सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएँ शुरू की हैं।
यह लिखित उत्तर आज राज्यसभा में आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने दिया।
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पीके/केसी/पीके/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2286813)
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