ग्रामीण विकास मंत्रालय
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 'भारत टेक्स 2026' में महिलाओं के नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को प्रदर्शित किया
DAY-NRLM ने भारत टेक्स 2026 में महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को वैश्विक मंच प्रदान किया
भारत टेक्स 2026 में महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का हुआ प्रदर्शन
प्रविष्टि तिथि:
15 JUL 2026 6:09PM by PIB Delhi
ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी), दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के माध्यम से, 14 से 17 जुलाई 2026 तक नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित भारत टेक्स 2026 में भाग ले रहा है। इस अवसर पर देशभर के स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा संचालित उद्यमों और उनके उत्पादों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

मंत्रालय की इस भागीदारी के माध्यम से विभिन्न राज्यों की ‘लखपति दीदियाँ’ वैश्विक वस्त्र मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, जहाँ वे आगंतुकों, खरीदारों और वस्त्र उद्योग से जुड़े हितधारकों के समक्ष अपने उत्पादों और उद्यमों का प्रदर्शन कर रही हैं। उनकी भागीदारी टिकाऊ उद्यम बनाने, घर की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर मौजूद हुनर व उत्पादों को बड़े बाज़ारों तक पहुँचाने में ग्रामीण महिलाओं की बढ़ती भूमिका को उजागर करती है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय के प्रदर्शनी मंडप का उद्घाटन आज ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव श्री रोहित कंसल ने किया। इस अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय में ग्रामीण आजीविका की संयुक्त सचिव सुश्री स्वाति शर्मा तथा डीएवाई-एनआरएलएम की निदेशक डॉ. मौलिश्री भी उपस्थित रहीं। उन्होंने कार्यक्रम में शामिल 'लखपति दीदियों' से बातचीत की और पूरे भारत से महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों के अलग-अलग तरह के उत्पादों को देखा, जो वहां प्रदर्शित किए गए थे।

यह प्रदर्शनी पूरे भारत में ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा संरक्षित और बढ़ावा दिए गए विविध कौशल और परंपराओं को उजागर करती है। हथकरघा बुनाई और परिधान निर्माण से लेकर हस्तशिल्प तथा प्राकृतिक सामग्रियों से निर्मित उत्पादों तक, यह प्रदर्शनी दर्शाती है कि किस प्रकार पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय कौशल को विकसित कर महिला-नेतृत्व वाले टिकाऊ उद्यमों में परिवर्तित किया जा रहा है, जिन्हें व्यापक बाजारों तक पहुँच भी प्राप्त हो रही है।
इस प्रदर्शनी में पारंपरिक हस्तशिल्प और क्षेत्रीय विशिष्टताओं की विविध झलक प्रस्तुत की गई है। इनमें हथकरघा उत्पाद, ढोकरा धातु शिल्प, कोल्हापुरी चमड़ा शिल्प, जूट शिल्प, बाँस शिल्प, काष्ठ शिल्प, मनका शिल्प, रेशमी धागों से निर्मित आभूषण तथा जलकुंभी से तैयार सतत हस्तशिल्प उत्पाद शामिल हैं। सामूहिक रूप से ये परंपराएँ देशभर में महिला-नेतृत्व वाले एसएचजी उद्यमों द्वारा संरक्षित एवं संवर्धित विविध कौशलों और स्थानीय संसाधनों की समृद्ध विरासत को प्रतिबिंबित करती हैं।
इस प्रदर्शनी में ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ भी शामिल है। यह डीएवाई-एनआरएलएम के अंतर्गत अपनी तरह की पहली प्रीमियम उपहार पहल है, जिसके तहत ग्रामीण महिलाओं के एसएचजी द्वारा निर्मित उच्च गुणवत्ता वाले हस्तनिर्मित उत्पादों को चयनित कर ब्रांडेड संस्थागत उपहार संग्रह के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। यह पहल महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को सरकारी और संस्थागत बाज़ारों तक पहुँचने में मदद करती है, साथ ही ग्रामीण कारीगरी की अहमियत और पहचान को भी बढ़ाती है।
‘सरस शक्ति’ संग्रह की विशेषता इसकी उच्च गुणवत्ता, उत्कृष्ट शिल्पकला, आकर्षक डिज़ाइन, सुसज्जित पैकेजिंग तथा बाज़ार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार उत्पादों पर विशेष ध्यान है। उत्पादों का सावधानीपूर्वक चयन एवं विकास इस प्रकार किया जाता है कि वे अपनी क्षेत्रीय पहचान और उनके निर्माण से जुड़ी पारंपरिक ज्ञान-संपदा को अक्षुण्ण रखते हुए समकालीन बाज़ार की अपेक्षाओं पर भी खरे उतरें। विशिष्ट ब्रांड पहचान और सुविचारित प्रस्तुति के माध्यम से ‘सरस शक्ति’ का उद्देश्य एसएचजी के उत्पादों की बाज़ार में सुदृढ़ पहचान स्थापित करना तथा ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए अधिक आर्थिक अवसर सृजित करना है।
भारत टेक्स 2026 में ‘लखपति दीदियों’ की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि एसएचजी से जुड़ी महिलाएँ आजीविका गतिविधियों से आगे बढ़कर टिकाऊ उद्यमों की दिशा में सफलतापूर्वक अग्रसर हो रही हैं। डीएवाई-एनआरएलएम के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय संसाधनों तक पहुँच, कौशल विकास, उत्पाद विकास तथा बाज़ार से जुड़ाव सुदृढ़ करने के लिए आवश्यक सहयोग प्रदान किया जाता है, जिससे वे अपनी आय में वृद्धि करने और अपने उद्यमों का विस्तार करने में सक्षम बनती हैं।
डीएवाई-एनआरएलएम के तहत देशभर में 10 करोड़ से अधिक ग्रामीण महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जोड़ा गया है। सामुदायिक संस्थाओं के इस व्यापक नेटवर्क के आधार पर, 'लखपति दीदी' पहल ग्रामीण महिलाओं को अपनी आजीविका को मज़बूत करने, अपनी आय बढ़ाने और टिकाऊ उद्यम स्थापित करने में सक्षम बना रही है। 3 करोड़ 'लखपति दीदी' का पड़ाव पार करने के बाद, सरकार 6 करोड़ 'लखपति दीदी' बनाने के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।
भारत टेक्स 2026 में मंत्रालय की भागीदारी ग्रामीण महिला उद्यमियों को वैश्विक मंच पर अपने उत्पाद प्रदर्शित करने, खरीदारों एवं उद्योग से जुड़े हितधारकों के साथ संवाद स्थापित करने तथा व्यापक बाज़ार अवसरों का पता लगाने का अवसर प्रदान करती है। यह पहल महिला-नेतृत्व वाले ग्रामीण उद्यमों को सशक्त बनाने, पारंपरिक कौशलों के संरक्षण तथा ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए बाज़ार तक पहुँच का विस्तार करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ करती है।
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पीके/केसी/जीके
(रिलीज़ आईडी: 2285041)
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