भारी उद्योग मंत्रालय
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भारी उद्योग मंत्रालय ने पीएलआई एसीसी स्कीम के तहत, 10 गीगावाट/प्रतिघंटा संचयी क्षमता वाली गीगा-स्केल एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए लाभार्थी के चयन हेतु वैश्विक टेंडर के ज़रिए बोलियां आमंत्रित कीं


बोली की प्रक्रिया सीपीपी पोर्टल के ज़रिए गुणवत्ता और लागत आधारित चयन (क्यूसीबीएस) तंत्र के तहत पारदर्शी द्वि-चरण प्रोसेस से ऑनलाइन होगा

टेंडर के दस्तावेज 15 जुलाई 2026 से ऑनलाइन उपलब्ध होंगे; बोली की नियत तिथि 13 अक्टूबर 2026 है; बोलियां 14 अक्टूबर 2026 को खोली जाएंगी

प्रविष्टि तिथि: 15 JUL 2026 5:00PM by PIB Delhi

भारी उद्योग मंत्रालय ने भारत में 10 गीगावाट/प्रतिघंटा की कुल क्षमता वाली गीगा-स्केल एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाने के लिए लाभार्थी चुनने हेतु वैश्विक टेंडर के ज़रिए बिड मंगाने के लिए रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) जारी किया है। यह क्षमता एसीसी बैटरी स्टोरेज के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) स्कीम के तहत ग्रिड-स्केल स्टेशनरी स्टोरेज (जीएसएसएस) एप्लीकेशन के लिए तय की गई है।

 

बोली की प्रक्रिया सीपीपी पोर्टल के ज़रिए गुणवत्ता और लागत आधारित चयन (क्यूसीबीएस) तंत्र के तहत पारदर्शी द्वि-चरण प्रोसेस से ऑनलाइन होगा।

 

टेंडर के दस्तावेज 15 जुलाई 2026 से उपलब्ध हैं। बोली-पूर्व कॉन्फ्रेंस 29 जुलाई 2026 को होगी और बिड्स जमा करने की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर 2026 है। टेक्निकल बिड्स 14 अक्टूबर 2026 को खोली जाएंगी।

 

मई 2021 में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में 50 गीगावाट/प्रतिघंटा की एसीसी विनिर्माण क्षमता पाने के लिए 18,100 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ नेशनल प्रोग्राम ऑन एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल (एसीसी) बैटरी स्टोरेज पर पीएलआई स्कीम को मंज़ूरी दी थी। इस स्कीम का उद्देश्य घरेलू मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मज़बूत करके और देश में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एसीसी बैटरी-मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम बनाने के लिए बड़ी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा देकर आयातित एसीसी पर भारत की निर्भरता को कम करना है।

पीएलआई एसीसी स्कीम के तहत, 50 गीगावाट/प्रतिघंटा  की लक्षित एसीसी क्षमता में से, 40 गीगावाट/प्रतिघंटा  क्षमता घरेलू विनिर्माताओं को दी गई है।

 

ग्रिड स्केल स्टेशनरी स्टोरेज एप्लिकेशन के लिए निर्धारित 10 गीगावाट/प्रतिघंटा  क्षमता, देश की बढ़ती ऊर्जा भंडारण आवश्यकताओं को पूरा करेगी, जो रिन्यूएबल एनर्जी के तेज़ी से इस्तेमाल, ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ करने, आयात निर्भरता कम करने और वैश्विक रुप से प्रतिस्पर्धी बैटरी विनिर्माण इकोसिस्टम बनाने से उत्पन्न हो रही हैं।

 

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पीके/केसी/एसकेजे/केएस


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