स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्रालय
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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी के साथ वर्चुअल बैठक के दौरान पश्चिम बंगाल की स्वास्थ्य प्रणालियों की समीक्षा की

राज्य में एनएचएम, पीएम-एबीएचआईएम तथा अन्य प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी कार्यान्वयन पर ध्यान

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने पश्चिम बंगाल को स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने हेतु पूर्ण समर्थन और सहयोग का आश्वासन दिया

पश्चिम बंगाल के लिए एनएचएम के तहत आवंटित 3,505.59 करोड़ रुपये में से पहली किश्त के रूप में 527.58 करोड़ रुपये जारी किए गए

श्री नड्डा ने सशक्त जनभागीदारी के साथ पश्चिम बंगाल में राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान और टीबी मुक्त भारत अभियान के प्रभावी कार्यान्वयन पर जोर दिया

पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई के कार्यान्वयन, स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने संबंधी महत्वपूर्ण चर्चाएं हुईं

केन्द्र और पश्चिम बंगाल ने सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने और सभी के लिए सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु सहयोगात्मक प्रयासों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया

प्रविष्टि तिथि: 23 MAY 2026 5:04PM by PIB Delhi

केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज पश्चिम बंगाल के माननीय मुख्यमंत्री श्री सुवेंदु अधिकारी के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने, प्रमुख स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), पीएम-एबीएचआईएम तथा अन्य प्रमुख योजनाओं के तहत निधियों के प्रभावी उपयोग पर चर्चा की गई।

स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार, टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से जुड़ी पहलों, टीबी एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों के उन्मूलन, गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) की शीघ्र जांच एवं निदान और सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर दवाओं एवं निदान उपकरणों की उपलब्धता के जरिए सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने पर चर्चा की गई।

निधियों के समयबद्ध उपयोग, स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणालियों को सुदृढ़ करने, बेहतर कार्यक्रम निगरानी और राज्य भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कुल 3505.59 करोड़ रुपये का संसाधन आवंटन राज्य को सूचित किया गया। इस आवंटन में से 527.58 करोड़ रुपये की पहली मंजूरी आज राज्य को जारी कर दी गई है। राज्य को यह भी सूचित किया गया कि पीएम-एबीएचआईएम और 15वें वित्त आयोग-स्वास्थ्य अनुदान के लिए राज्य के पास उपलब्ध निधियों का शीघ्र उपयोग किया जाए।

बैठक में सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को बेहतर नियामक निगरानी, ​​निदान एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रणालियों को सुदृढ़ करने और प्रौद्योगिकी आधारित स्वास्थ्य समाधानों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया। गहन जांच, उपचार संबंधी अनुपालन और जिला स्तरीय निगरानी को प्राथमिकता के जरिए राज्य में लागू होने वाले टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने पर विशेष बल दिया गया। केन्द्रीय मंत्री ने राज्य में जल्द से जल्द एचपीवी टीकाकरण शुरू करने का भी उल्लेख किया।

बैठक को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर), पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर (यू5एमआर) और नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) जैसे प्रमुख जन स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार और उन्हें बनाए रखने हेतु निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। विशेष रूप से पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों और उनसे जुड़ी जन स्वास्थ्य संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए ये प्रयास बेहद जरूरी हैं। उन्होंने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में निरंतर प्रगति सुनिश्चित करने हेतु सशक्त निगरानी, ​​समय पर हस्तक्षेप और समन्वित स्वास्थ्य सेवा वितरण तंत्र के महत्व पर बल दिया।  

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने खसरा-रूबेला उन्मूलन अभियान के तहत प्रयासों को तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया और राज्य भर में टीकाकरण कवरेज बढ़ाने तथा जन जागरूकता अभियान चलाने का आह्वान किया। उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान के कार्यान्वयन में तेजी लाने के महत्व पर भी बल दिया और टीबी उन्मूलन के संबंध में जन भागीदारी एवं  जागरूकता को सशक्त करने हेतु सांसदों और विधायकों के लिए विशेष जागरूकता कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव दिया।

श्री नड्डा ने निवारक स्वास्थ्य देखभाल ढांचे के तहत राज्य में एचपीवी टीकाकरण अभियान शुरू करने की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि बड़ी संख्या में युवा लड़कियां गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर एवं संबंधित स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति संवेदनशील बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल और प्रारंभिक हस्तक्षेप सरकार की सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीति के प्रमुख स्तंभ हैं।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने काला-अजार तथा लिम्फैटिक फाइलेरियासिस जैसी बीमारियों के खिलाफ निरंतर सतर्कता के महत्व पर भी प्रकाश डाला और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे समय पर निगरानी एवं निवारक उपायों के जरिए मामलों की बारीकी से निगरानी एवं प्रभावी ढंग से रोकथाम सुनिश्चित करें।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि राज्य भर में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के कार्यान्वयन में तेजी लाई जानी चाहिए और बीमारियों का शीघ्र पता लगाने एवं उनके प्रबंधन को सुविधाजनक बनाने हेतु जमीनी स्तर पर जांच संबंधी गतिविधियों का काफी विस्तार किया जाना चाहिए।

श्री नड्डा ने बताया कि आयुष्मान भारत पीएम-जेएवाई योजना के कार्यान्वयन हेतु समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के संबंध में चर्चा को जल्द से जल्द आगे बढ़ाया जा सकता है, ताकि पात्र लाभार्थियों को इस योजना के तहत स्वास्थ्य संबंधी लाभ बिना किसी देरी के मिलना शुरू हो सके। उन्होंने आगे कहा कि वरिष्ठ नागरिकों सहित लगभग 1.45 करोड़ परिवार एबी पीएम-जेएवाई के अंतर्गत आएंगे और उन्हें विस्तारित स्वास्थ्य कवरेज एवं हस्तक्षेपों से लाभ मिलने की उम्मीद है।

श्री नड्डा ने आश्वासन दिया कि मंत्रालय राज्य सरकार के अनुरोध पर तकनीकी सहायता प्रदान करने और आंतरिक प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण हेतु विशेषज्ञ टीमों को तैनात करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी कि वह नागरिकों को सस्ती दवाओं तक बेहतर पहुंच प्रदान करने हेतु जिलों में जन औषधि केन्द्रों और अमृत फार्मेसियों के विस्तार के संबंध में विस्तृत प्रस्ताव भेजे।

स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के प्रति केन्द्र सरकार की प्रतिबद्धता पर बोलते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि जहां प्रभावी कार्यान्वयन और निधियों का समय पर उपयोग सुनिश्चित किया जाता है, वहां वित्तीय संसाधन बाधा नहीं बनेंगे। उन्होंने स्वस्थ भारत और विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण के अंतर्गत स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, रोगों की निगरानी में सुधार करने, निवारक स्वास्थ्य देखभाल का विस्तार करने और सभी नागरिकों के लिए सुलभ, किफायती एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने हेतु राज्य सरकार के साथ मिलकर काम करने की भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस अवसर पर बोलते हुए, श्री सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य सेवा इकोसिस्टम  को मजबूत करने की दिशा में भारत सरकार और केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निरंतर सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के लिए सस्ती, सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने की दिशा में निरंतर प्रयासरत रहेगी।

इस संवाद के दौरान, श्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएम-जेएवाई) के प्रभावी कार्यान्वयन हेतु मंत्रालय से समर्थन और मार्गदर्शन मांगा, ताकि व्यापक और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सबसे कमजोर तथा  वंचित आबादी तक पहुंच सके। उन्होंने राज्य भर में स्वास्थ्य सेवाओं की कुशल आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु स्वास्थ्य सेवा के प्रशासनिक तंत्र और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन प्रणालियों को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

श्री अधिकारी ने बताया कि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित सभी लंबित और पूर्व स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों एवं दस्तावेजों को प्राथमिकता के आधार पर सुव्यवस्थित तथा  निपटाया जा रहा है ताकि स्वास्थ्य सेवा से जुड़े कार्यक्रमों के बेहतर समन्वय, पारदर्शिता एवं  प्रभावी कार्यान्वयन को सुगम बनाया जा सके।

मानसून के आगमन पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने मलेरिया और डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों से निपटने हेतु बेहतर तैयारियों की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उचित प्रशिक्षण, जागरूकता अभियान और समय पर प्रशासनिक निर्देशों के साथ-साथ निवारक उपाय मानसून के दौरान जन स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

चर्चा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत स्वास्थ्य कार्यक्रमों के कार्यान्वयन को सुदृढ़ करने पर भी ध्यान केन्द्रित किया गया। सस्ती स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बढ़ावा देने हेतु अधिक समर्थन की मांग करते हुए, श्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के बेहतर कार्यान्वयन और विस्तार का प्रस्ताव रखा, ताकि आम लोगों को सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण जेनेरिक दवाएं व्यापक रूप से उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने इसके अतिरिक्त राज्य के लिए स्वास्थ्य सेवा बजट एवं वित्तीय नियोजन के संबंध में केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से मार्गदर्शन मांगा और कहा कि इस संबंध में रणनीतिक समर्थन से स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को काफी मजबूती मिलेगी तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े परिणामों में सुधार होगा।

बैठक के दौरान, श्री अधिकारी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम बंगाल के तीन क्षेत्रों में अभी भी मेडिकल कॉलेज नहीं हैं और उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दोहराया कि प्रत्येक जिले में एक मेडिकल कॉलेज होना चाहिए। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा की सुलभता को सुदृढ़ करने हेतु कम सुविधाओं वाले जिलों में अतिरिक्त मेडिकल कॉलेजों की स्थापना के लिए केन्द्र सरकार से सहयोग का अनुरोध किया।

श्री अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के उत्तरी भाग में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि इससे राज्य में तृतीयक स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान संबंधी क्षमताओं और उन्नत रोगी देखभाल सेवाओं में काफी वृद्धि होगी। 

केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव; एनएचएम की एएस एवं एमडी श्रीमती आराधना पटनायक; चिकित्सा शिक्षा विभाग की अतिरिक्त सचिव श्रीमती विनोद कोटवाल; एनएचए के सीईओ श्री सुनील बर्नवाल; विभिन्न विभागों के संयुक्त सचिव और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में उपस्थित थे।

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पीके/केसी/आर / डीए

 


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