आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लिए नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का आयोजन
कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए विशेषकर मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय विकास मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों का मजबूत राजनीतिक उत्तरदायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण होगा : श्री मनोहर लाल
प्रविष्टि तिथि:
20 MAY 2026 7:55PM by PIB Delhi
आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने माननीय केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में 19-20 मई 2026 को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की। यह बैठक विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की प्रगति उल्लेखनीय रही है। वर्तमान में 97% वार्ड घर-घर अपशिष्ट संग्रहण के दायरे में आ चुके हैं और समुदायों द्वारा स्रोत स्तर पर अपशिष्ट के पृथक्करण को दो-बिन, चार-बिन तथा यहां तक कि छह-बिन प्रणाली के माध्यम से तेजी से अपनाया जा रहा है। अपशिष्ट प्रसंस्करण में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो वर्ष 2014 में 16% से बढ़कर 2026 में 81% तक पहुंच गया है। पुराने अपशिष्ट के निस्तारण में भी तेजी से प्रगति हुई है। देशभर के 2,482 डम्पसाइट्स पर मौजूद 26 करोड़ मीट्रिक टन अपशिष्ट में से 65% का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है, जिससे लगभग 9,000 एकड़ मूल्यवान शहरी भूमि पुनः प्राप्त हुई है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के प्रमुख निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा,“हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है कि क्या बदलाव किए जाने चाहिए — चाहे वे वित्तीय चुनौतियां हों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी का समन्वय हो, निविदा प्रक्रिया में देरी या भूमि आवंटन जैसी कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं का समाधान हो, या संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करना हो। हमारे पास केंद्रित योजना तैयार करने और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल 10 महीने हैं। इस मिशन के लिए उच्च स्तरीय मजबूत नेतृत्व और विस्तृत योजना की आवश्यकता है; कृपया याद रखें, किसी भी श्रृंखला की मजबूती उसकी सबसे कमजोर कड़ी पर निर्भर करती है।”
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों के अनुसार प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों की मैपिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे मंत्रालय द्वारा नियमित समीक्षा और सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन स्वच्छतम पोर्टल पर प्रगति के बारे में जानकारी दें। उन्होंने व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि “स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता” को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने इस बात को भी रेखांकित किया कि आवश्यक प्रोत्साहन देते हुए और विशेषकर पुराने डम्पसाइट्स के निस्तारण जैसे लक्ष्यों को शीघ्र प्राप्त करते हुए कार्यान्वयन में तेजी लाने की दिशा में विशेषकर मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय विकास मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों का मजबूत राजनीतिक उत्तरदायित्व अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।
इस दो दिवसीय सम्मेलन में तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री श्री एम. भट्टी विक्रमार्क, महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साओ सहित कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए । इनके अलावा 12 राज्यों -आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के शहरी विकास मंत्री, उनके प्रधान सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में उपस्थित रहे। इस सम्मेलन में एमओईएफसीसी, डीडीडब्ल्यूएस, एम ओ आर टी एच, एमओपीआर, एम ई आई टी वाई, एम ओ आर डी, एमओपी जैसे 14 केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन तंत्र में समन्वय तथा आवश्यक सुझावों पर विचार-विमर्श किया।
यह सम्मेलन विषय-आधारित समीक्षा और ज्ञान-साझाकरण का एक महत्वपूर्ण मंच रहा, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के विभिन्न पहलुओं पर 11 केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में संस्थागत सुदृढ़ीकरण, दृश्यमान स्वच्छता, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण, स्रोत स्तर पर अपशिष्ट पृथक्करण, वेस्ट-टू-एनर्जी प्रणाली, स्वच्छता एवं प्रयुक्त जल प्रबंधन, कर्मियों की सुरक्षा तथा विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में कार्यान्वयन जैसे विषयों पर चर्चा की गई। परामर्श प्रक्रिया और विचार-विमर्श के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए, जिनमें जमीनी प्रक्रियाओं में तेजी लाना, एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा अन्य तंत्रों के माध्यम से स्मार्ट मॉनिटरिंग, क्षेत्रीय योजना एवं क्लस्टर-आधारित अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों को प्रोत्साहित करना, महानगरों एवं बड़े शहरों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता तथा परियोजनाओं की स्थिरता के लिए मजबूत वित्तीय मॉडल विकसित करना शामिल है।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक प्रगति (प्रो-एक्टिव गवर्नेंस एंड टाइमली इम्प्लीमेंटेशन) समीक्षा से पूर्व आयोजित बहु-स्तरीय समीक्षा तंत्र का हिस्सा थी। इसे क्षेत्रीय स्तर पर पर्याप्त मूल्यांकन, अंतर-सरकारी परामर्श तथा स्पष्ट रूप से चिन्हित कार्य बिंदुओं का समर्थन प्राप्त था, जिससे अधिक केंद्रित और परिणामोन्मुख विचार-विमर्श संभव हो सका।
1 अप्रैल 2026 से प्रभावी हुए नए ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (एसडब्ल्यूएम) नियमों के तहत अपशिष्ट प्रबंधन के बदलते परिदृश्य को देखते हुए सभी स्तरों पर रणनीतिक हस्तक्षेप और संस्थागत जिम्मेदारियों को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता होगी।इनमें—(i) दो-स्तरीय स्रोत पृथक्करण से बढ़कर अनिवार्य चार-स्ट्रीम स्रोत पृथक्करण (गीला, सूखा, सैनिटरी और घरेलू खतरनाक कचरा),(ii) 4-तरफा अलगाव के लिए प्रमुख समन्वयक के रूप में राजनीतिक प्रतिनिधियों पर मुख्य फोकस ,(iii) बल्क वेस्ट जनरेटर्स की जवाबदेही, गणना, संवेदनशीलता और तत्परता,(iv) प्रदूषक भुगतान सिद्धांत (उपयोगकर्ता शुल्क और प्रवर्तन), तथा(v) केंद्रीयकृत एकीकृत पोर्टल के माध्यम से डिजिटल निगरानी और पारदर्शी रिपोर्टिंग शामिल है। इन प्रावधानों को माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों द्वारा भी बल मिला है। केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने इन नियमों को पूर्ण भावना के साथ लागू करने पर जोर दिया।
राष्ट्रीय समीक्षा बैठक ने “सम्पूर्ण सरकार” दृष्टिकोण को और अधिक सुदृढ़ किया और विकसित भारत 2047 के विज़न को प्राप्त करने के लिए विभिन्न मंत्रालयों और राज्यों के बीच सहयोगात्मक कार्रवाई को मजबूती प्रदान की ।
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पीके/केसी/आरके / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2263493)
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