कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय
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प्रशासन से जुड़े प्रशिक्षण संस्थानों को स्वयं को नए सिरे से विकसित करते हुए पारंपरिक और रूढ़िवादी प्रशिक्षण को छोड़ना होगा : डॉ. जितेंद्र सिंह

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विभागीय सीमाओं को तोड़ने, स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देने और भविष्य के अनुरूप शासन व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया

एआई-आधारित शासन और मिशन कर्मयोगी अब अगले चरण में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें संस्थागत क्षमता निर्माण, दायित्व आधारित प्रशासन और प्रदर्शन-आधारित प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एकीकृत, प्रौद्योगिकी-आधारित और नागरिक-केंद्रित क्षमता निर्माण अत्यंत आवश्यक: डॉ. जितेंद्र सिंह

संस्थागत क्षमता निर्माण सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन एक समग्र और एकीकृत शासन सुधारों के रोडमैप के साथ संपन्न हुआ

प्रविष्टि तिथि: 15 MAY 2026 7:29PM by PIB Delhi

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान, प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि देश भर के प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों और शासन से जुड़े संस्थानों को यदि भविष्य में प्रासंगिक बने रहना है तो स्वयं को नए सिरे से विकसित करना होगा और काम करने के पुराने ढर्रे को बदलना होगा। श्री जितेंद्र सिंह ने “संस्थागत क्षमता निर्माण: प्रशिक्षण से प्रदर्शन-आधारित शासन तक” विषय पर आयोजित राष्ट्रीय विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि मिशन कर्मयोगी लगातार एकीकृत एआई-समर्थित शासन ढांचे की ओर बढ़ रहा है, जो क्षमता निर्माण, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक सेवा वितरण को आपस में जोड़ता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि आज यदि शासन में सुधार करना है तो उसमेन पारदर्शिता, समय सीमा का पालन, प्रक्रियाओं की सरलता तथा नवाचार और मानवीय संवेदनशीलता के साथ प्रौद्योगिकी का सर्वोत्तम उपयोग आवश्यक है। उन्होंने हाल के वर्षों में किए गए शासन सुधारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीपीग्राम्स (सी पी जी आर ए एम एस) पर प्राप्त होने वाली वार्षिक शिकायतें वर्ष 2014 में जहां लगभग 2 लाख थीं वह वर्तमान में बढ़कर 25–30 लाख से भी अधिक हो गई हैं, जो बेहतर जवाबदेही और त्वरित समाधान के कारण जनता के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र की सफलता का भी उल्लेख किया और बताया कि अब तक लगभग 10–11 करोड़ प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं, जिससे पेंशनभोगियों को बिना किसी भौतिक उपस्थिति के अपनी आवश्यक औपचारिकताएं डिजिटल माध्यम से पूरी करने की सुविधा मिली है।

इस एक दिवसीय शिखर सम्मेलन में कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, क्षमता निर्माण आयोग, कर्मयोगी भारत, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित विभाग/मंत्रालय, तथा देशभर के प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ सम्मिलित हुए। सभी प्रतिभागियों ने इस राष्ट्रीय सम्मेलन में संस्थागत क्षमता निर्माण ढांचे को सुदृढ़ बनाने और प्रदर्शन-आधारित शासन प्रणालियों को प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।

शिखर सम्मेलन से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों में इस बात पर व्यापक सहमति बनी कि प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों को पारंपरिक प्रशिक्षण केंद्रों से बदलकर डिजिटल रूप से एकीकृत, परिणाम देने में सक्षम शासन केंद्रों में बदला जाए, जो मिशन कर्मयोगी के अनुरूप हों। विचार-विमर्श के दौरान आई जी ओ टी, उन्नति और एच आर एम एस प्लेटफॉर्म्स के सुचारु एकीकरण, दक्षता-आधारित कैडर प्रशिक्षण, मेंटरशिप और बडी सिस्टम, एआई-आधारित शिक्षण उपकरण, मिश्रित प्रशिक्षण मॉडल तथा नागरिक-केंद्रित शासन पद्धतियों की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया। राज्यों ने विभिन्न विभागों के फ्रंटलाइन कर्मियों को आई जी ओ टी प्लेटफॉर्म से जोड़ने, क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षण सामग्री का विस्तार करने तथा साझा फैकल्टी, बुनियादी ढांचे और शिक्षण संसाधनों के माध्यम से संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी बल दिया, ताकि पूरे देश में शासन सेवाओं की गुणवत्ता में अपेक्षित परिवर्तन लाए जा सकें। 

शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में दूसरी बार अपने सम्बोधन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अब शासन से जुड़े संस्थान अलग-अलग खांचों में काम नहीं कर सकते और उन्हें एकीकृत तथा बहु-विषयक (इंटरडिसिप्लिनरी) प्रशिक्षण प्रणाली की ओर बढ़ना होगा। इसमें पारंपरिक सरकारी ढांचे से बाहर के संस्थानों, जैसे आईआईटी, आईआईएम और विभिन्न विशेषज्ञता वाले संस्थानों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए आई) शासन में एक महत्वपूर्ण साधन बना रहेगा, लेकिन तकनीक मनुष्य के विवेक, नैतिक आचरण और जनसेवा में आवश्यक संवेदनशीलता का स्थान नहीं ले सकती। संस्थानों के भीतर नवाचार और विचारों के स्वतंत्र आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने इच्छुक प्रशिक्षकों के लिए मंच तैयार करने, क्षेत्र-विशेष की श्रेष्ठ प्रथाओं को प्रोत्साहित करने तथा राज्यों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया।

मंत्री ने कहा कि शासन सुधार तभी सफल माने जाते हैं जब नागरिकों को धरातल पर संवेदनशीलता, सम्मान और त्वरित प्रतिक्रिया का अनुभव हो। उन्होंने आगे कहा कि मिशन कर्मयोगी देश के लिए एकीकृत, नवोन्मेषी और भविष्य के अनुरूप शासन व्यवस्था विकसित करने का एक परिवर्तनकारी अवसर प्रदान करता है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की सचिव, सुश्री रचना शाह ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन क्षमता निर्माण को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप एक मुख्य शासन कार्य के रूप में संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने मंत्रालयों, विभागों और राज्यों में व्यापक क्षमता निर्माण योजनाओं की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे कौशल संबंधी कमियों की पहचान की जा सकेगी और शासन के शिक्षण तंत्र को भविष्य की प्रशासनिक आवश्यकताओं के अनुरूप ढाला जा सकेगा। उन्होंने प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थानों तथा ‘उन्नति’ जैसे सहयोगात्मक प्लेटफॉर्म्स की भूमिका को भी रेखांकित किया, जो देशभर में मिश्रित और विशेषीकृत शिक्षण प्रणालियों के विस्तार में सहायक हैं।

क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष, श्रीमती राधा चौहान ने आई जी ओ टी, उन्नति और एच आर एम एस प्लेटफॉर्म्स के बीच सुचारु एकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि एक ऐसा शासन तंत्र विकसित किया जा सके जो एकीकृत और दक्षता-आधारित हो साथ ही जो मानव संसाधनों की भूमिका-आधारित नियुक्तियों को प्रभावी रूप से समर्थन दे। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण संस्थानों को एआई-सक्षम शासन परिवेश में प्रासंगिक बने रहने के लिए संरचनात्मक और रणनीतिक बदलावों को स्वीकार करना होगा। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि क्षमता निर्माण आयोग ने मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत संस्थानों और अधिकारियों के लिए एक राष्ट्रीय मेंटरशिप ढांचा पहले ही शुरू कर दिया है।






 

 

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