भारी उद्योग मंत्रालय
भारी उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों के लिए वित्तपोषण तंत्र पर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की
प्रविष्टि तिथि:
29 APR 2026 7:25PM by PIB Delhi
भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों (ई-बस) और इलेक्ट्रिक ट्रकों (ई-ट्रक) को अपनाने की गति को तेज करने के लिए आवश्यक वित्तपोषण तंत्र पर विचार-विमर्श करने हेतु, नई दिल्ली में 29 अप्रैल 2026 को भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव, श्री कामरान रिजवी की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की। इस बैठक के मुख्य उद्देश्य ई-बस और ई-ट्रक को अपनाने में आने वाली वित्तीय चुनौतियों को समझना, इनके वित्तपोषण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करना, इन चुनौतियों के समाधान हेतु संभावित उपायों पर चर्चा करना और इसके लिए आवश्यक सरकारी सहायता का निर्धारण करना था।

बैठक के दौरान, निजी क्षेत्र के हितधारकों द्वारा ई-बसों और ई-ट्रकों को अपनाने के मार्ग में आने वाली वित्तीय चुनौतियों के समाधान हेतु इलेक्ट्रिक वाहन के वित्तपोषण के लिए महत्वपूर्ण उपायों पर चर्चा की गई। विचार के लिए रखे गए प्रमुख सहायता तंत्रों में वित्तीय संस्थानों द्वारा दिए जाने वाले ऋण को जोखिम मुक्त बनाने हेतु 'आंशिक क्रेडिट गारंटी' योजनाएं और साथ ही निजी क्षेत्र के खरीदारों के लिए ऋण की लागत को कम करने के उद्देश्य से 'ब्याज सहायता' तंत्र शामिल थे।
सार्वजनिक परिवहन, विशेष रूप से बसें, पूरे भारत में आवाजाही की आधारशिला हैं, जबकि ट्रक घरेलू सामानों के एक बड़े हिस्से की ढुलाई करके माल ढुलाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही, कमर्शियल वाहन क्षेत्र सड़क परिवहन से होने वाले उत्सर्जन, ईंधन की खपत और पर्टिकुलेट मैटर प्रदूषण में भी बड़ा योगदान देता है। इस संदर्भ में, भारत के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने और '2070 तक नेट ज़ीरो' के राष्ट्र के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए बसों और ट्रकों के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना अनिवार्य है।

इस बैठक में वित्तीय और औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों ने व्यापक स्तर पर भागीदारी की। इसमें भारत सरकार का वित्तीय सेवा विभाग और विश्व बैंक (भारत) शामिल थे। इसके अतिरिक्त, प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के साथ-साथ एनबीएफसी और सिडबी व एनआईआईएफ जैसे शीर्ष संस्थानों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में बस ऑपरेटरों, ट्रक ऑपरेटरों, ओईएम और अन्य प्रमुख हितधारकों के साथ-साथ सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम), ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और बस ऑपरेटर्स कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीओसीआई) जैसे औद्योगिक निकायों की सक्रिय उपस्थिति रही।
यह पहल कमर्शियल वाहन क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर बदलाव को सुगम बनाने के प्रति भारी उद्योग मंत्रालय के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाती है। सरकारी विभागों, बहुपक्षीय संस्थानों, वित्तीय निकायों और उद्योग जगत के हितधारकों को एक साझा मंच पर लाकर, भारी उद्योग मंत्रालय का लक्ष्य ऐसे व्यावहारिक वित्तीय समाधान विकसित करना है जो ई-वाहन अपनाने के मार्ग में आने वाली प्रमुख बाधाओं को दूर कर सकें। इसके माध्यम से आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 के विजन के तहत ऊर्जा सुरक्षा, उत्सर्जन में कमी और स्वदेशी उन्नत विनिर्माण के भारत के व्यापक लक्ष्यों को समर्थन प्रदान किया जा सकेगा।
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पीके/केसी/डीवी/एसएस
(रिलीज़ आईडी: 2256762)
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