पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय
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पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 'पृथ्वी दिवस 2026' मनाया; 'जलवायु न्याय' और समतापूर्ण स्थिरता का आह्वान किया

प्रविष्टि तिथि: 22 APR 2026 8:28PM by PIB Delhi

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (एमओईएस), भारत सरकार ने आज पृथ्वी भवन में पृथ्वी दिवस 2026मनाया, जिसका मुख्य विषय था - हमारी शक्ति, हमारा ग्रह। इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों का एक उच्च-स्तरीय समूह उपस्थित था, जिन्होंने सामूहिक रूप से पृथ्वी दिवस संकल्पलिया और पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया।

इस समारोह की शोभा मुख्य अतिथि पद्म श्री पूर्व सचिव, एमओईएस डॉ. शैलेश नायक ने बढ़ाई, जो वर्तमान में 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज' (एनआईएएस) के निदेशक हैं। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सचिव, एमओईएस डॉ. एम. रविचंद्रन ने की; उनके साथ उपस्थित प्रमुख गणमान्यों में डॉ. मृत्युंजय महापात्र (डीजीएम, आईएमडी), श्री एस. गोपाल कृष्ण (संयुक्त सचिव, एमओईएस) और डॉ. जगवीर सिंह (वैज्ञानिक 'जी') शामिल थे।

लचीलेपन के एक साधन के रूप में ज्ञान

अपने मुख्य भाषण में, डॉ. शैलेश नायक ने मानव अनुकूलन पर एक व्यापक ऐतिहासिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए कहा कि भले ही मानव पिछले 2,00,000 वर्षों में जलवायु में आए भारी बदलावों के बावजूद जीवित रहा है, लेकिन पिछली सदी में बदलाव की गति-विशेष रूप से वैश्विक तापमान में वृद्धि—अभूतपूर्व रही है।

डॉ. नायक ने कहा, “विशेष रूप से पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए आज का मुख्य प्रश्न वैश्विक पर्यावरणीय बदलावों से निपटने हेतु आवश्यक और महत्वपूर्ण ज्ञान का सृजन करना है। उन्होंने आगे कहा, “हमें केवल यह समझने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए कि बदलाव 'कैसे' होते हैं, बल्कि हमें इन बदलावों से जुड़े विशिष्ट जोखिमों और उनके प्रभावों को भी गहराई से समझना होगा। हमारा भविष्य न केवल लचीला होना चाहिए, बल्कि न्यायसंगत भी होना चाहिए।

डॉ. नायक ने कई महत्वपूर्ण बातों पर प्रकाश डाला:

कृषि में बदलाव: सीओ2 के बढ़ते स्तर सी4 फसलों (जैसे बाजरा) की तुलना में सी3 फसलों (जैसे गेहूं और चावल) पर ज्यादा गंभीर असर डालते हैं, जिससे "मिशन मिलेट" पहल का महत्व और बढ़ जाता है।

जल सुरक्षा: अनुमानों के अनुसार, सिंधु बेसिन में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी, लेकिन गंगा और ब्रह्मपुत्र बेसिन में इसमें काफी कमी आएगी, जिसका असर भारत के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्रों पर पड़ेगा।

जलवायु न्याय: डॉ. नायक ने इस बात पर जोर दिया कि भले ही भारत में प्रति व्यक्ति ऊर्जा का उपयोग विकसित देशों की तुलना में काफी कम है, फिर भी यह देश चीन और यूरोप के साथ मिलकर वैश्विक "हरियाली" के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

"पृथ्वी की गर्मी" (Earth’s Fever) का सामना

जलवायु संकट की गंभीरता पर बात करते हुए, एमओईएस सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन ने कहा, “तापमान में बढ़ोतरी सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन जिस तरह कुछ डिग्री तापमान बढ़ने से इंसान के शरीर में बुखार आ जाता है, ठीक वैसे ही अब पृथ्वी को भी बुखार आ गया है। महासागर और ध्रुवीय क्षेत्र बहुत तेजी से गर्म हो रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा: इंसान इस समय पृथ्वी के इकोसिस्टम की संसाधनों को फिर से बनाने की क्षमता से 1.8 गुना ज्यादा तेजी से संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। भारत दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास 'पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय' जैसा एक समर्पित मंत्रालय है; यह इस ग्रह के प्रति सरकार की अनोखी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह मंत्रालय 'डीप ओशन मिशन', 'मिशन मौसम' और पीआरआईटीएचवीआई (PRITHVI) जैसे कई महत्वपूर्ण अभियानों का नेतृत्व कर रहा है।

ठोस कदम उठाने का आह्वान

इस कार्यक्रम में, मंत्रालय की 2026 की 'पृथ्वी दिवस' गतिविधियों और आउटरीच कार्यक्रमों पर एक प्रस्तुति दी गई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि "हर दिन ही पृथ्वी दिवस है," और लोगों से आग्रह किया कि वे केवल जागरूकता तक ही सीमित न रहें, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए इस ग्रह को सुरक्षित रखने हेतु ठोस कदम उठाएं।

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पीके / केसी/ एमपी /डीक


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