विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आहार संबंधी गलत सूचनाओं और दुष्प्रचार पर सावधानी बरतने का आह्वान किया और पोषण के लिए व्यक्तिगत दृष्टिकोण पर बल दिया
डॉ. जितेंद्र सिंह ने डॉ. अनूप मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक "स्मार्ट कैलोरी एंड कॉमन सेंस: एन एविडेंस-बेस्ड गाइड टू इंडियन डाइट्स" का विमोचन किया
विज्ञानं अभी तक आदर्श आहार पर अंतिम निर्णय नहीं ले पाया है व्यक्तिगत मटैबलिज़म और जीवन शैली को भोजन विकल्पों का मार्गदर्शन करना चाहिए: डॉ. जितेंद्र सिंह
बदलते आहार नैरटिव ने वैज्ञानिक सहमति में अंतर को उजागर किया पोषण के क्षेत्र में सटीक स्वास्थ्य संचार की आवश्यकता पर बल दिया: डॉ. जितेंद्र सिंह
प्रविष्टि तिथि:
22 APR 2026 6:05PM by PIB Delhi
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज आगाह किया कि मधुमेह और मोटापे जैसी आहार और जीवन शैली से जुड़ी बीमारियों के बारे में जागरूकता आवश्यक है, लेकिन इस क्षेत्र में गलत सूचना और दुष्प्रचार के प्रसार को रोकने पर समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आहार को सामान्यीकृत नुस्खे या एक समान चार्ट तक सीमित नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने शरीर, जीवन शैली और मटैबलिज़म संबंधी जरूरतों के अनुसार समझना और अनुकूलित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आहार इतना महत्वपूर्ण विषय है कि इसे अकेले किसी एक समूह पर नहीं छोड़ा जा सकता है। उन्होंने कहा कि लोगों को समय के साथ अपनी आहार प्रतिक्रियाओं का निरीक्षण करना चाहिए और उनसे सीखना चाहिए।
डॉ. जितेंद्र सिंह इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, लोधी एस्टेट, नई दिल्ली में डॉ. अनूप मिश्रा द्वारा लिखित पुस्तक "स्मार्ट कैलोरी एंड कॉमन सेंस: एन एविडेंस-बेस्ड गाइड टू इंडियन डाइट्स" के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस अवसर पर फोर्टिस हेल्थकेयर के सलाहकार (चिकित्सा) और फिक्की के सलाहकार (स्वास्थ्य सेवाएं और एमवीटी) डॉ. नरोत्तम पुरी सम्मानित अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में वरिष्ठ चिकित्सक और मधुमेह और पोषण के विशेषज्ञों सहित चिकित्सा और वैज्ञानिक समुदाय के प्रमुख सदस्य एक साथ आए।
आहार के बदलते रुझानों पर विचार करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने पिछले कुछ वर्षों में रिफाइंड तेलों से लेकर पारंपरिक वसा और चीनी के विकल्प से लेकर प्राकृतिक विकल्पों में बदलते वैज्ञानिक विचारों का उल्लेख किया। यह दर्शाता है कि पोषण में वैज्ञानिक समझ लगातार विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि आहार विज्ञान में निष्कर्ष अक्सर जनसंख्या-स्तर के साक्ष्य पर आधारित होते हैं और हर व्यक्ति पर समान रूप से लागू नहीं हो सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने अपने चिकित्सा अनुभव से नैदानिक निर्णय और रोगी की बातचीत के महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने पहले के समय को याद किया जहां निदान विस्तृत इतिहास लेने और अवलोकन पर काफी हद तक निर्भर करता था। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट और मानकीकृत नुस्खे पर अत्यधिक निर्भरता कभी-कभी व्यक्तिगत विविधताओं को नजरअंदाज कर सकती है।
केंद्रीय मंत्री ने स्वास्थ्य देखभाल और आहार सलाहकार प्रथाओं में बढ़ते व्यावसायीकरण के बारे में भी बताया। उन्होंने आगाह किया कि व्यावहारिक प्रासंगिकता की कमी के बावजूद आकर्षक या अत्यधिक जटिल आहार योजनाएं अक्सर लोकप्रियता हासिल करती हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने संतुलित, सूचित और साक्ष्य-आधारित मार्गदर्शन की आवश्यकता को दोहराया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुणवत्ता और मात्रा के साथ भोजन वितरण के महत्व पर कहा कि आम व्यवहार में आहार के समय और बंटवारे पर कम जोर दिया जाता है। उन्होंने उदाहरण साझा करते हुए बताया की कैसे जीवन शैली, आदतें और व्यक्तिगत शरीर की प्रतिक्रियाएं उपयुक्त आहार पैटर्न निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाती हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सभी के लिए कोई एक "आदर्श आहार" लागू नहीं होता है और व्यक्तियों को असत्यापित दावों और रुझानों से सतर्क रहते हुए अवलोकन, संयम और सूचित विकल्पों के माध्यम से जागरूकता विकसित करनी चाहिए।




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(रिलीज़ आईडी: 2254680)
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