सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने 18वें सिविल सेवा दिवस के अवसर पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में "पीएम विश्वकर्मा के माध्यम से सतत आजीविका" विषय पर एक सत्र का आयोजन किया
पीएम विश्वकर्मा योजना नीति के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए समग्र सरकारी दृष्टिकोण का प्रतीक है: श्री एस.सी.एल. दास, सचिव, एमएसएमई
अतिरिक्त सचिव डॉ. रजनीश ने पीएम विश्वकर्मा योजना की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला
प्रविष्टि तिथि:
21 APR 2026 7:13PM by PIB Delhi
कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग द्वारा आयोजित सिविल सेवा दिवस समारोह के अवसर पर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में "पीएम विश्वकर्मा के माध्यम से सतत आजीविका" विषय पर एक सत्र का आयोजन किया।

इस सत्र में वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ एक मंच पर आए ताकि पीएम विश्वकर्मा योजना की प्रगति एवं प्रभाव की समीक्षा की जा सके, जिसका उद्देश्य पूरे देश में पारंपरिक कारीगरों एवं शिल्पकारों को सशक्त बनाना है।
सत्र का संचालन एमएसएमई मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं विकास आयुक्त डॉ. रजनीश ने किया। उन्होंने अपने आरंभिक भाषण में योजना की परिकल्पना, कार्यान्वयन संरचना एवं परिवर्तनकारी क्षमता का व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पीएम विश्वकर्मा योजना पूर्णतः कागज रहित एवं संपूर्ण डिजिटल तंत्र पर आधारित है, जिससे लाभार्थियों के लिए पारदर्शिता, दक्षता एवं सुगम पहुंच सुनिश्चित होती है। उन्होंने प्रमुख विपणन कार्यक्रमों में भागीदारी, समर्पित प्रचार पहल, ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों के साथ सहयोग और रेलवे की वन स्टेशन वन प्रोडक्ट (ओएसओपी) पहल के अंतर्गत रेलवे स्टेशनों पर उत्पाद प्रदर्शन सहित विपणन एवं डिजिटल सहायता मध्यवर्तनों पर योजना के मजबूत ध्यान पर बल दिया।

चर्चा का शुभारंभ एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री एस.सी.एल. दास के संबोधन से हुआ। उन्होंने जोर देकर कहा कि पीएम विश्वकर्मा योजना एक समग्र सरकारी दृष्टिकोण है जिसमें एमएसएमई मंत्रालय, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और वित्तीय सेवा विभाग प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए निकट समन्वय में कार्य कर रहे हैं। उन्होंने योजना के डेटा-आधारित और पूर्णतः डिजिटल संरचना से प्राप्त प्रमुख सीखों पर प्रकाश डाला और बताया कि इसके अंतर्गत 30 लाख से अधिक पंजीकरण हो चुके हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इस योजना को लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया है जो इसके नवाचार-प्रधान एवं नागरिक-केंद्रित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

सुश्री देबाश्री मुखर्जी, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय की सचिव ने कौशल विकास घटक के अंतर्गत हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 23 लाख से अधिक लाभार्थियों ने बुनियादी प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। उन्होंने उत्पादकता एवं उद्यमशीलता क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर बल दिया और सुलभ प्रशिक्षण अवसंरचना तथा निरंतर कौशल उन्नयन के महत्व पर भी बल दिया।

श्री मनोज मुत्तथिल अय्यप्पन, वित्तीय सेवा विभाग के संयुक्त सचिव ने योजना के ऋण घटक पर अपने विचारों को साझा किया। उन्होंने बताया कि बिना गारंटी के ऋण और ब्याज सब्सिडी ने कारीगरों के व्यापक वित्तीय समावेशन को संभव बनाया है और प्रक्रिया को सरल बनाने, वित्तीय साक्षरता बढ़ाने एवं अंतिम छोर तक बैंकिंग सहायता को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

सुश्री वंदिता कौल, डाक विभाग की सचिव ने ई-वाउचर आधारित अभिनव व्यवस्था के माध्यम से टूलकिट की अंतिम-मील डिलीवरी सुनिश्चित करने में इंडिया पोस्ट की भूमिका पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, रीयल-टाइम ट्रैकिंग और एक मजबूत रसद संरचना के सहयोग से सुदूर क्षेत्रों सहित पूरे देश में 15 लाख से अधिक टूलकिट वितरित किए जा चुके हैं। उन्होंने अन्य सरकारी पहलों के लिए योजना के डेटा एनालिटिक्स दृष्टिकोण का लाभ उठाने की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

श्री भरत खेरा, एमएसएमई मंत्रालय के विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) ने योजना के प्रमुख कार्यान्वयन संबंधी अनुभवों की बात करते हुए योजना के गुरु-शिष्य परंपरा दृष्टिकोण और 18 व्यवसायों के चयन पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना कारीगरों को अनौपचारिक आजीविका से स्थायी उद्यमों की ओर अग्रसर होने में सक्षम बना रही है और इससे युवाओं को पारंपरिक शिल्पकला की ओर आकर्षित होने का अनुमान है।
श्री मनोज मित्तल, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक ने सुगम कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक समर्पित डिजिटल पोर्टल ने लाभार्थियों के नामांकन और जीवनचक्र प्रबंधन को सुव्यवस्थित किया है जिससे दक्षता, पारदर्शिता एवं ऋण तक पहुंच में सुधार हुआ है।
सत्र का समापन एमएसएमई मंत्रालय के सचिव श्री एस.सी.एल. दास के समापन भाषण के साथ हुआ, जिन्होंने सभी पैनलिस्टों एवं हितधारकों के योगदान की सराहना की और प्रतिभागियों को उनकी सक्रिय भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया।
स्थायी आजीविका सृजन के लिए एक समेकित दृष्टिकोण प्रदर्शित करने के लिए सत्र की व्यापक सराहना की गई। इसमें यह उजागर किया गया कि कौशल विकास, वित्तीय समावेशन, तकनीक एवं बाजार पहुंच के संयोजन से पीएम विश्वकर्मा योजना के अंतर्गत पारंपरिक शिल्पकारों को सशक्त बनाया जा रहा है और पूरे भारत में जमीनी उद्यमिता को मजबूत किया जा रहा है।
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पीके/केसी/एके/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2254299)
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