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उपराष्ट्रपति ने मेरठ में आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया


उपराष्ट्रपति ने कहा : युवाओं को अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को राष्ट्र निर्माण के साथ जोड़ना चाहिए

उपराष्ट्रपति ने स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्हें रोजगार सृजनकर्ता और नवाचार का प्रेरक बनने का आग्रह किया

उपराष्ट्रपति ने कहा : 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने में भारत के युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं

प्रविष्टि तिथि: 21 APR 2026 5:41PM by PIB Delhi

उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज मेरठ स्थित आईआईएमटी विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह अवसर न केवल एक शैक्षणिक यात्रा के पूरा होने का प्रतीक है, बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति आजीवन प्रतिबद्धता की शुरुआत का भी प्रतीक है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वे एक ऐसे भारत में कदम रख रहे हैं जो तेजी से विकसित हो रहा है और अवसरों से भरपूर है। उन्होंने बुनियादी ढांचे और विकास की अभूतपूर्व पहलों वाले वर्तमान क्षण को राष्ट्र के इतिहास का एक निर्णायक दौर बताया।

उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इस वर्ष की शुरुआत में उद्घाटन की गई नमो भारत ट्रेन और मेरठ मेट्रो को आधुनिक, कुशल और टिकाऊ कनेक्टिविटी का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे छात्रों और पेशेवरों दोनों के लिए विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं।

विकसित भारत की परिकल्पना पर बल देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह परिकल्पना एक राष्ट्रीय मिशन है और इसके लिए युवाओं की ऊर्जा, रचनात्मकता और प्रतिबद्धता की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत की भावना इस परिवर्तनकारी यात्रा का मूल आधार है।

छात्रों से अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का आग्रह करते हुए, उपराष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण में योगदान देने, सत्यनिष्ठा, अनुशासन और सेवा के मूल्यों को बनाए रखने और यह सुनिश्चित करने के महत्व पर बल दिया कि विकास समावेशी, टिकाऊ और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत में निहित रहे।

छात्रों को व्यक्तिगत सफलता से परे सोचने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने उन्हें अपनी महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप ढालने की सलाह दी। उन्होंने उनसे रोजगार चाहने वालों के बजाय रोजगार सृजनकर्ता बनने का आह्वान किया। उन्होंने उनसे नवाचार को अपनाने, स्थानीय उद्योगों का समर्थन करने और स्वदेशी समाधानों को बढ़ावा देने का भी आग्रह किया।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकसित भारत @ 2047 की परिकल्पना आर्थिक विकास से परे है और इसमें समावेशी विकास शामिल है जो प्रत्येक गांव और प्रत्येक व्यक्ति तक पहुंचता है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि दीक्षांत समारोहों में अकादमिक सम्मान और पदक प्राप्त करने वालों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने इसे दृढ़ संकल्प, अनुशासन और सहायक परिवेश द्वारा संचालित सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां नए मानदंड स्थापित कर रही हैं और आने वाली पीढ़ियों को अधिक समावेशी और प्रगतिशील भारत की ओर प्रेरित कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार में पशुपालन एवं दुग्ध विकास मंत्री श्री धर्मपाल सिंह; राज्यसभा सांसद श्री लक्ष्मीकांत बाजपेयी; आईआईएमटी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री योगेश मोहन गुप्ता और अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

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पीके/केसी/वीके/एसके


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