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सरकार ने कच्चे जूट के व्यापारियों और गांठ बनाने वालों के लिए जूट स्टॉक सीमा को घटाकर शून्य कर दिया है


कच्चे जूट के व्यापारियों और गांठ बनाने वालों को अपना पूरा स्टॉक जूट मिलों को बेचना होगा

इसका उद्देश्य निर्माताओं को ज्यादा कच्चा जूट उपलब्ध कराना और श्रमिक हितों की रक्षा करना है

प्रविष्टि तिथि: 20 APR 2026 5:55PM by PIB Delhi

जूट आयुक्त द्वारा जूट की निर्धारित स्टॉक सीमा को उचित वितरण सुनिश्चित करने और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से दिनांक 20.03.2026 की अधिसूचना से संशोधित कर दिया गया है। यह कदम पिछले कुछ महीनों में कच्चे जूट की कीमतों में आई तीव्र वृद्धि के बाद उठाया गया है, जो 2025-26 के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी ऊपर बनी हुई है। परिणामस्वरूप, विभिन्न हितधारकों ने कच्चे जूट की उपलब्धता को लेकर चिंता व्यक्त की है।

कच्चे जूट के स्टॉक की संशोधित सीमाएँ:

  • परिसर में बेलिंग प्रेस से लैस और जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत कच्चे जूट बेलर: शून्य( उन्हें 5 मई 2026 तक अपने पास मौजूद कच्चे जूट का पूरा माल बेचना होगा और 15 मई 2026 तक भौतिक वितरण पूरा करना होगा )
  • अन्य स्टॉकधारक (जूट आयुक्त कार्यालय में पंजीकृत न होने वाले कच्चे जूट के गठ्ठे बनाने वाले, गठ्ठे बनाने की मशीन के बिना कच्चे जूट के स्टॉकधारक): शून्य।
  • जूट मिलें/प्रसंस्करण इकाइयाँ: वर्तमान उत्पादन दरों के अनुसार अधिकतम 45 दिनों की खपत के बराबर।

नियामक निर्देश

  • सभी स्टॉक रखने वाली संस्थाओं को जूट स्मार्ट पोर्टल (http://jutecomm.gov.in/JuteSmart.html) पर हर पखवाड़े जूट स्टॉक की स्थिति घोषित और अपडेट करना आवश्यक है।
  • निर्धारित सीमा से अधिक स्टॉक रखने वाली संस्थाओं को 5 मई 2026 तक अपना स्टॉक बेचना होगा और 15 मई 2026 तक स्टॉक को क्रेताओं को भौतिक रूप से सौंपना होगा

प्रवर्तन और अनुपालन

  • अधिकारियों को परिसरों और अभिलेखों का निरीक्षण करने और इस आदेश के उल्लंघन में पाए गए अतिरिक्त स्टॉक को जब्त करने का अधिकार है।
  • कच्चे जूट की जमाखोरी करने वाली संस्थाओं के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई में सहायता के लिए संबंधित राज्य सरकारों से भी अनुरोध किया गया है।
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत किसी भी संस्था, जो स्टॉक को घोषित करने या स्टॉक सीमा का उल्लंघन करने संबंधी निर्देशों का उल्लंघन करती पाई जाती है, के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी
  • आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की धारा 7 के तहत स्टॉक नियंत्रण आदेश के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, आदेश के उल्लंघन के लिए ज़ब्ती का प्रावधान धारा 6 के तहत परिभाषित हैं और झूठे बयानों के लिए दंड अधिनियम की धारा 9 के तहत निर्धारित है।

जूट की कीमतों में अस्थिरता और कच्चे जूट की अनुपलब्धता से जूट उद्योग को खतरा पैदा हो सकता है और इससे उद्योग के रोजगार में व्यवधान उत्पन्न हो सकता है। इन उपायों का उद्देश्य जूट की आपूर्ति को स्थिर करना और देश भर के किसानों, निर्माताओं और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना है।

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पीके/केसी/पीएस


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