जनजातीय कार्य मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

नेस्ट्स ने 8वां स्थापना दिवस मनाया


आदिवासी समुदायों के लिए शैक्षिक उत्कृष्टता को आगे बढ़ाना

माननीय मंत्रियों ने ईएमआरएस के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई; खेल, संस्कृति और विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट उपलब्धियों के लिए मेधावी छात्रों को सम्मानित किया गया

प्रविष्टि तिथि: 01 APR 2026 11:29PM by PIB Delhi

 

भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन, राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति यानि नेस्ट्स(एनईएसटीएस) ने 1 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में अपना 8वां स्थापना दिवस मनाया। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, नेस्ट्स देशभर में आदिवासी(जनजातीय) समुदायों के लिए शिक्षा को आगे बढ़ाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को लगातार सुदृढ़ कर रहा है।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय जनजातीय कार्य मंत्री, श्री जुएल ओराम ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में माननीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके, संसद की अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति के माननीय अध्यक्ष श्री फग्गन सिंह कुलस्ते और जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा भी उपस्थित रहीं। इस कार्यक्रम में संसद के अन्य माननीय सदस्यों की भी उपस्थिति रही।

समारोह की शुरुआत नेस्ट्स के आयुक्त द्वारा दिए गए स्वागत भाषण से हुआ। सभा को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि, माननीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों(ईएमआरएस) के संचालन में संगठन की प्रभावशाली भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा, जब जनजातीय शिक्षा के लिए विजन को सामूहिक रूप से आकार दिया गया और नेतृत्व के उच्चतम स्तरों पर उसे आगे बढ़ाया गया, तब यह स्पष्ट हो गया कि शिक्षा ही बदलाव की नींव होगी और ईएमआरएस उसका सबसे सशक्त माध्यम होगा। जो पहल सीमित रूप में शुरू हुआ था, वह आज एक राष्ट्रीय आंदोलन का रूप ले चुका है, यह प्रतिबद्धता से प्रेरित है, नेस्ट्स जैसे संस्थानों से सशक्त है, और नीति-निर्माताओं, प्राचार्यों, शिक्षकों और विद्यार्थियों के सामूहिक प्रयासों पर आधारित है। हमारा लक्ष्य अब सिर्फ समावेशन नहीं, बल्कि उत्कृष्टता है।”

इन्हीं भावनाओं को दोहराते हुए, जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने कहा, सुदूर जंगलों और पहाड़ों से, जहां कभी अवसर बहुत कम थे, आज जनजातीय छात्र बेहतरीन कक्षाओं में कदम रख रहे हैं और आईआईटी, अस्पतालों और नेतृत्व के क्षेत्र में जाने का सपना देखने का साहस कर पा रहे हैं। यह सिर्फ़ स्कूलों के बनने की बात नहीं है; बल्कि यह आत्मविश्वास की पुनर्स्थापना का प्रतीक है।”

विशिष्ट अतिथि के रूप में सभा को संबोधित करते हुए श्री फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि आदिवासी बच्चे शिक्षा, खेल और राष्ट्रीय मंचों पर लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, जो समावेशन, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि दूर-दराज के आदिवासी इलाकों से आने वाले बच्चों की भागीदारी इस बात का एक सशक्त प्रमाण है कि उनकी आकांक्षाएं बाधाओं से ऊपर उठकर राष्ट्र की विकास यात्रा का एक अभिन्न अंग बन रही हैं।

अपने संबोधन में, जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने इस बात पर जोर दिया कि देश के प्रमुख राष्ट्रीय संस्थानों में आदिवासी छात्रों की बढ़ती सफलता ईएमआरएस के माध्यम से संभव हो रही है, ये संस्थान न सिर्फ शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि समग्र विकास भी सुनिश्चित कर रहे हैं, और इस प्रकार अवसरों को ठोस परिणामों में परिवर्तित किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम में एक विस्तृत वीडियो प्रस्तुति दिखाई गई, जिसमें पिछले एक वर्ष के दौरान नेस्ट्स की प्रमुख पहलों और उल्लेखनीय उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया, जो इस पहल की निरंतर प्रगति और बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। कुल 26-ईएमआरएस छात्रों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया, जिनमें 10 छात्रों को शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए तथा 16 छात्रों को विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया, जो उनके समग्र विकास का उत्सव है।

कार्यक्रम में और भी जीवंतता लाने के लिए, मणिपुर के ईएमआरएस तमेंगलोंग के छात्रों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की एक सुसंगठित श्रृंखला प्रस्तुत की, जिसकी शुरुआत भावपूर्ण सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद एक जोशीला नृत्य, एक आकर्षक लघु-नाटिका(स्किट/ड्रामा) और अंत में एक रंगारंग फैशन शो प्रस्तुत किया गया, जिसने सामूहिक रूप से राज्य के आदिवासी समुदायों की समृद्ध परंपराओं और विरासत को बखूबी दर्शाया।

ईएमआरएस पहल के माध्यम से, जनजातीय कार्य मंत्रालय ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के जरिए आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया; साथ ही, छात्रों को न सिर्फ शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन करने और समग्र विकास के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, बल्कि अपनी सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़े रहने के लिए भी प्रेरित किया जाता है।

***

पीके/केसी/पीकेपी


(रिलीज़ आईडी: 2248128) आगंतुक पटल : 104
इस विज्ञप्ति को इन भाषाओं में पढ़ें: English