अणु ऊर्जा विभाग
संसदीय प्रश्न: परमाणु ऊर्जा सेक्टर
प्रविष्टि तिथि:
01 APR 2026 7:50PM by PIB Delhi
शांति विधेयक, जिसे भारत की राष्ट्रपति ने 21 दिसंबर, 2025 को मंजूरी दी, केंद्र सरकार से लाइसेंस और नियामक बोर्ड की सुरक्षा अनुमति के अंतर्गत परमाणु संयंत्र स्थापित करने या परमाणु ऊर्जा के उत्पादन, इस्तेमाल और निपटान संबंधी गतिविधियों को संचालित करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी की अनुमति देता है। यह अधिनियम परमाणु ऊर्जा और आयनीकरण विकिरण के संवर्धन और विकास तथा परमाणु ऊर्जा उत्पादन और अन्य गैर-ऊर्जा अनुप्रयोगों के लिए तथा इसके सुरक्षित व संरक्षित इस्तेमाल को सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
इस विधेयक में परमाणु संयंत्र में किसी भी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में परमाणु क्षति के लिए नागरिकों के दायित्व के प्रावधान भी हैं। शांति अधिनियम ने परमाणु क्षति के लिए नागरिकों के दायित्व को अंतर्राष्ट्रीय दायित्व व्यवस्था के अनुसार तैयार किया है। यह परमाणु संयंत्र के प्रकार के आधार पर 100 करोड़ रुपये से 3000 करोड़ रुपये तक के परमाणु क्षति दायित्व के लिए एक व्यावहारिक और श्रेणीबद्ध दृष्टिकोण प्रदान करता है। परमाणु क्षति पर मुआवजे के भुगतान का मूल सिद्धांत संचालक की ओर से शीघ्र भुगतान और सख्त एवं दोषरहित दायित्व है। संचालक के दायित्व से अधिक होने पर, भारत सरकार का दायित्व 300 मिलियन एसडीआर तक है। इस दायित्व से अधिक होने पर, सरकार पूरक मुआवजे पर कन्वेंशन का सहारा ले सकती है, जो एक अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन है और भारत इसका पक्षकार है।
भारत सरकार ने परमाणु ऊर्जा अधिनियम, 1962 की धारा 16, 17 और 23 के अंतर्गत परिकल्पित कुछ नियामक एवं सुरक्षा कार्यों को पूरा करने के लिए एक वैधानिक आदेश (एस.ओ. 4772) की ओर से परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) की स्थापना की है। परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) को अधिनियम के अंतर्गत परिकल्पित सुरक्षा मानकों को निर्धारित करने और नियामक एवं सुरक्षा के लिए नियम एवं विनियम बनाने का अधिकार प्राप्त है। भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्रों (एनपीपी) की स्थापना, तैयारी, निर्माण, संचालन और स्थापना पर्यावरण सुरक्षा सहित इससे जुड़ी परमाणु सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप की जाती है। एनपीपी में उच्चतम स्तर की परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, जिसकी पुष्टि एईआरबी की ओर से की जाने वाली व्यवस्थित बहुस्तरीय सुरक्षा समीक्षा और समय-समय पर किए जाने वाले नियामक निरीक्षणों के माध्यम से की जाती है। किसी भी प्रकार की चूक पाए जाने की स्थिति में, एईआरबी उपयुक्त सुधारात्मक/ उपचारात्मक उपाय लागू करता है।
संसद ने हाल ही में शांति विधेयक, 2025 पारित किया है, जिसमें परमाणु क्षेत्र में निजी संस्थाओं की भागीदारी का प्रावधान है। परमाणु ऊर्जा विनियमन बोर्ड (एईआरबी) का नियामक ढांचा और जरूरतें आम तौर पर संस्था और प्रौद्योगिकी के प्रति तटस्थ हैं। इसलिए, इस नियामक ढांचे का इस्तेमाल किसी भी परमाणु ऊर्जा परियोजना के सुरक्षा विनियमन के लिए किया जा सकता है, फिर उसमें शामिल संस्था (निजी/सार्वजनिक) कोई भी हो।
परमाणु ऊर्जा बोर्ड (एईआरबी) ने लाइसेंसधारी की ओर से परमाणु दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए मानदंड तय किए हैं। हाल ही में पारित शांति अधिनियम, 2025 के अनुसार, एईआरबी को परमाणु दुर्घटना घटित होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर केंद्र सरकार को ऐसी परमाणु दुर्घटनाओं की अधिसूचना के लिए अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करनी होंगी।
यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज 1 अप्रैल, 2026, बुधवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।
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पीके/केसी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2248112)
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