जनजातीय कार्य मंत्रालय
आदिवासी कार्य मंत्रालय द्वारा “सीएसआर के माध्यम से आदिवासियों को सशक्त बनाना और आदिवासी उत्थान के लिए साझेदारी की प्रतिज्ञा” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का सीएसआर संमेलन आयोजित
प्रविष्टि तिथि:
24 MAR 2026 7:59PM by PIB Delhi
आदिवासी कार्य मंत्रालय द्वारा 24 मार्च 2026 को नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में “सीएसआर के माध्यम से आदिवासियों को सशक्त बनाना और आदिवासी उत्थान के लिए साझेदारी की प्रतिज्ञा” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का सीएसआर सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर आदिवासी कार्य मंत्री श्री जुआल ओरम तथा आदिवासी कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आदिवासी कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) और प्रमुख निजी कंपनियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


आदिवासी कार्य मंत्री श्री जुआल ओरम ने अपने उद्घाटन भाषण में आदिवासी क्षेत्रों में सीएसआर के तहत केंद्रित हस्तक्षेपों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आदिवासी क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध हैं, जिनका उपयोग राष्ट्र निर्माण में हो रहा है तथा इसलिए कंपनियों का इन समुदायों के प्रति विशेष दायित्व है।
आदिवासी कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने अपने संबोधन में आदिवासी आबादी को लक्षित परियोजनाओं एवं पहलों के लिए सभी कंपनियों को बधाई दी। उन्होंने ऐसी परियोजनाओं के कार्यान्वयन में मंत्रालय का पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया।

आदिवासी कार्य मंत्री ने नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर “सौर उद्यमी” प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किया, जो आदिवासी कौशल विकास को भविष्योन्मुखी हरित रोजगारों से जोड़ने के उद्देश्य से है। इस सहयोग के तहत टाटा पावर स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के समर्थन से आदिवासी युवाओं को सौर क्षेत्र में व्यावहारिक, रोजगार-उन्मुख कौशल प्रदान करेगा, विशेष रूप से सोलर पीवी हेल्पर/सहायक तकनीशियन कार्यक्रम के तहत 9 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम डिजाइन किया गया है।
आदिवासी कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने देश भर में आदिवासी समुदायों के समग्र विकास और सशक्तिकरण के प्रति भारत सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता पर बल दिया।
समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के महत्व को रेखांकित किया, यह नोट करते हुए कि विभिन्न ध्वजवाहक पहलों के तहत केंद्रित हस्तक्षेपों से घास-मूल स्तर पर सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। अभिसरण और समुदाय भागीदारी की भूमिका को उजागर करते हुए, श्रीमती चोपड़ा ने कहा कि समावेशी विकास, अवसरों तक बेहतर पहुंच तथा आदिवासी आबादी में सामाजिक-आर्थिक संकेतकों में सुधार सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मंत्रालय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप आदिवासी विकास को और गति देने के लिए कार्यान्वयन तंत्रों को मजबूत करने और सफल मॉडलों को विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के दौरान मंत्रालय ने आदिवासी समुदायों के लिए परियोजनाएं संभालने वाली विभिन्न संस्थाओं के योगदान को मान्यता प्रदान की।50 से अधिक सार्वजनिक क्षेत्र और निजी कंपनियों के 100 से अधिक प्रतिभागियों ने डिजिटल समावेशन, सतत आजीविका, वन-आधारित अर्थव्यवस्थाएं तथा आदिवासी आबादी में महिला सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में प्रभावशाली परियोजनाओं पर अपनी जानकारियां साझा कीं।
तकनीकी एवं परस्पर संवाद सत्रों के दौरान सीएसआर पहलों के तहत क्षेत्रीय विशेषज्ञता, नवाचार और व्यावसायिक प्रबंधन को लाने के संभावित तरीकों पर विचार-विमर्श किया गया, ताकि पारंपरिक सरकारी ढांचों के तहत कवर न होने वाले अंतरालों को संबोधित किया जा सके।
इस सीएसआर संमेलन के माध्यम से आदिवासी कार्य मंत्रालय ने माननीय प्रधानमंत्री के विकसित भारत के दृष्टिकोण को बहु-हितधारक सहयोगों को बढ़ावा देकर तथा साझेदारियों को समावेशी एवं सतत आदिवासी विकास के उत्प्रेरक के रूप में उपयोग करके साकार करने की प्रतिबद्धता दोहराई। मंत्रालय ने सामूहिक रूप से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया कि विकास न केवल तीव्र हो, बल्कि समान, भागीदारीपूर्ण तथा सामाजिक न्याय के सिद्धांतों में गहराई से निहित भी हो।






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पीके/केसी/एमएम
(रिलीज़ आईडी: 2244811)
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