पंचायती राज मंत्रालय
azadi ka amrit mahotsav

पंचायती राज प्रणाली

प्रविष्टि तिथि: 17 MAR 2026 3:02PM by PIB Delhi

पंचायती राज मंत्रालय (i) पंचायती राज संस्थाओं के चयनित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों के क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के जरिए पंचायती राज संस्थाओं को  मजबूत बनाने के प्राथमिक उद्देश्य से राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए) की केन्द्र प्रायोजित योजना, (ii) पंचायती राज संस्थाओं के बीच प्रतिस्पर्धा की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए आरजीएसए योजना का एक केंद्रीय घटक, पंचायतों को प्रोत्साहन (आईओपी), जिसके तहत सेवाओं और सार्वजनिक वस्तुओं की आपूर्ति में सुधार के लिए श्रेष्ठ कार्य करने वाली पंचायतों को उनके श्रेष्ठ कार्य को मान्यता देने हेतु वित्तीय प्रोत्साहन सहित पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं, (iii) -पंचायत मिशन मोड परियोजना (एमएमपी-ईपंचायत), आरजीएसए योजना का एक केंद्रीय घटक है जिसके तहत पीआरआई के कामकाज में दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता लाने तथा इसके समग्र परिवर्तन के लिए पंचायतों के डिजिटलीकरण हेतु विभिन्न -गवर्नेंस परियोजनाओं को वित्तपोषित किया जाता है (इस स्कीम के तहत राज्यों को कोई निधि जारी नहीं की जाती है) को कार्यान्वित कर रहा है। ये योजनाएं गुजरात राज्य और उसके जनजातीय क्षेत्रों सहित सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों में कार्यान्वित की गई हैं।

 अनुसूचित क्षेत्रों में, पंचायतों के प्रावधान (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा) से संबंधित आरजीएसए योजना के तहत जनजातीय क्षेत्रों में प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इन प्रशिक्षणों के लिए, मंत्रालय ने पेसा के सात महत्वपूर्ण विषयों पर सात प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए हैं तथा इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि ये नियमावली जनजातीय भाषाओं में उपलब्ध हों। प्रशिक्षण के विषयों में (i) ग्राम सभा को सशक्त बनाना, (ii) लघु वन उत्पाद, (iii) लघु खनिज, (iv) विवाद समाधान के पारंपरिक तरीके, (v) साहूकारी पर नियंत्रण, (vi) नशीले पदार्थों की बिक्री और सेवन पर रोक/नियमन/प्रतिबंध और (vii) भूमि के हस्तांतरण की रोकथाम शामिल हैं।

ग्रामीण विकास मंत्रालय, गुजरात के जनजातीय क्षेत्रों सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों में समग्र ग्रामीण विकास और जन जीवन की गुणवत्ता में समग्र सुधार लाने के लिए राज्य सरकारों के माध्यम से कई योजनाओं/कार्यक्रमों जैसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, ग्रामीण स्वरोजगार एवं प्रशिक्षण संस्थान, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को कार्यान्वित कर रहा है। हाल ही में संसद द्वारा एक नया अधिनियम, जिसका नाम है विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)-ग्राम विकास अधिनियम, 2025, (वीबी-जी आरएएम जी अधिनियम, 2025) पारित किया गया है। यह अधिनियम अभी लागू नहीं हुआ है। लागू होने पर, इसके प्रावधान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी ग्रामीण क्षेत्रों पर लागू होंगे।

जनजातीय कार्य मंत्रालय (एमओटीए) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वे अनुसूचित जनजाति और अन्य परंपरागत वनवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 (संक्षेप में एफआरए) का  प्रशासनिक देखरेख कर रहा है, जिसमें ग्राम सभा को वास्तविक वनवासी अनुसूचित जनजातियों (एफडीएसटी) और अन्य परंपरागत वनवासियों (ओटीएफडी) को दिए जाने वाले अधिकारों की मान्यता की प्रक्रिया शुरू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें किसी भी सामुदायिक वन संसाधन की रक्षा, पुनरुत्पादन या संरक्षण या प्रबंधन के अधिकार शामिल हैं, जिसे वे परंपरागत रूप से स्थायी उपयोग के लिए सुरक्षित और संरक्षित करते रहे हैं।

() जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार देश में अनुसूचित जनजातियों के विकास और कल्याण के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं/कार्यक्रमों और संक्षिप्त उपलब्धियाँ का विवरण अनुलग्नक में दिया गया है। 

 

अनुलग्नक

देश में अनुसूचित जनजातियों के विकास और कल्याण के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जा रही योजनाओं/कार्यक्रमों का विवरण

  1. एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय (ईएमआरएस): यह एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो जनजातीय छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (नवोदय पैटर्न पर आधारित) प्रदान करती है। राष्ट्रीय स्तर पर, 723 स्कूलों को मंज़ूरी दी गई है और 499 स्कूल 1.55 लाख छात्रों के लिए क्रियाशील हैं; गुजरात में, स्वीकृत किए गए 47 स्कूलों में से 44 स्कूल क्रियाशील हैं।
  2. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए): 25 सुधारों के माध्यम से 63,843 गांवों में अवसंरचना संबंधी कमियों को पूरा करने के लिए अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर पर पहले ही 6,773 आश्रम स्कूल/छात्रावास परियोजनाओं, 78 विपणन केंद्रों (टीएमएमसी), और 433 एफआरए प्रकोष्ठों को मंज़ूरी दे दी है।
  3.  प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम-जनमन): यह 75 विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (पी वीटीजी) के सामाजिक-आर्थिक विकास पर केंद्रित है। गुजरात में, 31 जनवरी 2026 तक की उपलब्धियों में 12,724 घरों की मंज़ूरी, 572 गांवों में पेयजल की सुविधा, 6,626 घरों का विद्युतीकरण, और 21 वन धन विकास केंद्रों (वीडीवीके) का संचालन शामिल है।
  4. प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (पीएमजेवीएम): लघु वन उपज (एमएफपी) के लिए एमएसपी के माध्यम से जनजातियों की आजीविका को मज़बूत बनाता है। गुजरात में, 622.00 लाख का परिक्रामी निधि (रिवॉल्विंग फंड) जारी किया गया है, और 200 वीडीवीके (वन धन विकास केंद्र) स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 57,968 लोगों को लाभ हुआ है।
  5. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी): स्वरोज़गार और शिक्षा के लिए रियायती ऋण प्रदान करता है। गुजरात में, मौजूदा वित्त वर्ष 2025-26 (27 फरवरी, 2026 तक) में 7,526 लाभार्थियों को 2,330.64 लाख वितरित किए गए हैं।
  6. वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) का कार्यान्वयन: व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकारों को मान्यता। गुजरात में, 14.09 लाख एकड़ ज़मीन के लिए 1,03,524 पट्टे (टाइटल) वितरित किए गए हैं, और 95% अभिलेखों को डिजिटलीकृत किया जा चुका है।
  7.  शैक्षिक छात्रवृत्तियाँ: प्री-मैट्रिक और पोस्ट-मैट्रिक योजनाओं के माध्यम से वित्तीय सहायता। वित्त वर्ष 2025-26 में, गुजरात में 2,20,000 छात्रों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्तियों हेतु 864.62 करोड़ जारी किए गए।
  8. अनुच्छेद 275(1) के तहत अनुदान: अनुसूचित क्षेत्रों के लिए अवसंरचना और कल्याणकारी निधियां। गुजरात की स्वीकृत परियोजनाओं में 43 चेक डैम, 101 सामुदायिक कुएँ, डेयरी शीतलन केंद्र (डेयरी चिलिंग सेंटर) और विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।

(ix) जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को सहायता: जनजातीय अनुसंधान संस्थानों को उनकी बुनियादी ढांचागत आवश्यकताओं को मजबूत करने के लिए निधि प्रदान करना, जिसमें TRI भवन/संग्रहालयों की स्थापना, अनुसंधान एवं प्रलेखन गतिविधियाँ, प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम, जनजातीय त्योहारों का आयोजन, अद्वितीय सांस्कृतिक विरासत के संवर्धन हेतु यात्राएँ, पर्यटन को बढ़ावा देना और आदिवासियों द्वारा आदान-प्रदान यात्राओं का आयोजन आदि शामिल हैं, ताकि जनजातीय संस्कृति, प्रथाओं, भाषाओं और रीति-रिवाजों का संरक्षण और प्रसार हो सके।

वित्त वर्ष 2025-26 में, मंत्रालय ने योजना के अंतर्गत स्वीकृत परियोजनाओं/गतिविधियों के लिए गुजरात के TRIs को 50.00 लाख रुपये की मूल स्वीकृति जारी की है।

यह जानकारी केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ​​ललन सिंह ने 17 मार्च 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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