रेल मंत्रालय
रेलवे पुलिस प्रमुखों का 7वां अखिल भारतीय सम्मेलन विज्ञान भवन में आयोजित किया गया
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यात्रियों और रेलवे अवसंरचना की सुरक्षा सुदृढ़ करने, समन्वित कार्रवाई, त्वरित एफआईआर दर्ज करने और उन्नत निगरानी तकनीकों पर जोर दिया गया
नशीले पदार्थों और ड्रग तस्करी की रोकथाम के लिए सक्रिय निगरानी और रियल-टाइम खुफिया साझाकरण पर विशेष जोर
सम्मेलन में एफआरएस-आधारित सीसीटीवी, एआई-संचालित वीडियो एनालिटिक्स और ड्रोन निगरानी को व्यापक रूप से अपनाने का आह्वान किया गया
पत्थरबाजी और तोड़फोड़ की घटनाओं से निपटने के लिए नियमित मॉक ड्रिल, परिदृश्य-आधारित प्रशिक्षण, सामुदायिक आउटरीच और सख्त कार्रवाई के निर्देश
प्रविष्टि तिथि:
24 FEB 2026 7:37PM by PIB Delhi
रेलवे सुरक्षा बल द्वारा आयोजित सरकारी रेलवे पुलिस प्रमुखों का 7वां अखिल भारतीय सम्मेलन आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उच्चस्तरीय सम्मेलन की अध्यक्षता आरपीएफ की महानिदेशक सुश्री सोनाली मिश्रा ने की। इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की जीआरपी के डीजीपी, एडीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सतीश कुमार तथा रेलवे बोर्ड के सदस्य भी इस अवसर पर मौजूद रहे।

यात्रियों और रेलवे अवसंरचना की सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से समन्वित कार्ययोजना और प्रक्रियात्मक ढांचा तैयार करने पर व्यापक और रचनात्मक चर्चा हुई। जीआरपी कर्मियों के लिए बुनियादी ढांचे की सुविधाओं में सुधार पर भी विचार-विमर्श किया गया। सम्मेलन में चर्चा किए गए मुद्दों को प्रभावी ढंग से हल करने के लिए निकट समन्वय और संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
उभरती सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए यात्रियों, रेलवे अवसंरचना और संचालन की सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर विचार के लिए सम्मेलन आयोजित किया गया। विचार-विमर्श में यह स्वीकार किया गया कि भारतीय रेलवे अपने विशाल भौगोलिक विस्तार, यात्रियों की भारी संख्या और खुली पहुंच वाली वास्तुकला के कारण संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, तोड़फोड़, पत्थरबाजी और संभावित विध्वंसक गतिविधियों जैसे खतरों के प्रति संवेदनशील है। सम्मेलन का उद्देश्य प्रौद्योगिकी, खुफिया जानकारी, जमीनी समन्वय और सामुदायिक जुड़ाव को जोड़ने वाला एक समग्र सुरक्षा ढांचा विकसित करना था।
सम्मेलन में एफआरएस आधारित सीसीटीवी कैमरे, एआई सक्षम वीडियो एनालिटिक्स और ड्रोन निगरानी जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया गया। आरपीएफ के महानिदेशक ने बताया कि अपराधियों की बेहतर पहचान और अपराध की रोकथाम के लिए आरपीएफ अपने मैदानी अभियानों में नई तकनीकी प्रणालियों को अपना रही है।
सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण रेलवे नेटवर्क के माध्यम से होने वाली मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए रोडमैप तैयार करना रहा। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने प्रस्तुति देते हुए ड्रग तस्करी में शामिल गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सक्रिय निगरानी और रियल-टाइम खुफिया साझाकरण के महत्व पर प्रकाश डाला।
आपात स्थितियों के दौरान तैयारी और समन्वित प्रतिक्रिया के लिए नियमित मॉक ड्रिल को आवश्यक बताया गया। प्रथम प्रतिक्रिया, निकासी, भीड़ नियंत्रण और घटना प्रबंधन पर केंद्रित परिदृश्य-आधारित प्रशिक्षण मॉड्यूल की सिफारिश की गई। पत्थरबाजी और तोड़फोड़ के खतरे पर भी विस्तार से चर्चा की गई क्योंकि ये यात्री सुरक्षा और रेलवे परिचालन को प्रभावित करते हैं। महानिदेशक आरपीएफ ने संवेदनशील इलाकों में सामुदायिक आउटरीच और जागरूकता कार्यक्रमों के महत्व के साथ-साथ अपराधियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और निवारक उपायों पर जोर दिया।
यह सम्मेलन भारतीय रेलवे के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रहा। इसने राज्य पुलिस बलों और आरपीएफ को अपनी रणनीतियों को संरेखित करने, परिचालन अनुभवों को साझा करने और रेलवे बुनियादी ढांचे की सुरक्षा एवं यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण के प्रति प्रतिबद्ध होने के लिए एक साझा मंच प्रदान किया। सम्मेलन के परिणामों से एक अधिक लचीली, उत्तरदायी और तकनीक-सक्षम रेलवे सुरक्षा प्रणाली में योगदान मिलने की उम्मीद है।
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पीके/ केसी/ केजे / डीए
(रिलीज़ आईडी: 2232414)
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