उप राष्ट्रपति सचिवालय
उपराष्ट्रपति ने संविधान के तमिल और गुजराती संस्करणों का विमोचन किया; कानूनी शब्दावली के 8वें संस्करण का शुभारंभ किया
उपराष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्रीय संस्करणों से संवैधानिक जागरूकता बढ़ेगी
उपराष्ट्रपति ने संवैधानिक अनुवादों के विस्तार के लिए विधि और न्याय मंत्रालय की सराहना की
सरलीकृत कानूनी शब्दावली से विद्यार्थियों, सांसदों और न्यायपालिका को लाभ होगा: उपराष्ट्रपति
प्रविष्टि तिथि:
21 FEB 2026 7:34PM by PIB Delhi
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली स्थित उपराष्ट्रपति भवन में तमिल और गुजराती भाषाओं में भारत के संविधान के अद्यतन संस्करणों के साथ-साथ कानूनी शब्दावली (अंग्रेजी-हिंदी) के 8वें संस्करण का विमोचन किया।
सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर तमिल और गुजराती भाषाओं में संविधान के अद्यतन संस्करणों का विमोचन करना अत्यंत प्रसन्नता का विषय है। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण दिन पर इन संस्करणों का विमोचन पहचान, विचार और सांस्कृतिक निरंतरता को आकार देने में मातृभाषाओं के महत्व को रेखांकित करता है।
भारत की भाषाई समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि देश की प्रत्येक भाषा, चाहे तमिल हो या कश्मीरी, गुजराती हो या असमिया, सदियों पुरानी विरासत समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान इस विविधता को मान्यता देता है और बहुभाषावाद को एक शक्ति के रूप में महत्व देता है।
उन्होंने कहा कि विश्व में कहीं भी ऐसा देश नहीं मिलेगा जहां संविधान इतनी भाषाओं में उपलब्ध हो। उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रीय विधि और न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा देश के कानून को अनेक भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने याद दिलाया कि पिछले दशक में, संविधान के आधिकारिक अनुवादित संस्करण पहली बार बोडो, डोगरी एवं संथाली जैसी भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं और उन्होंने पिछले दिसंबर में राष्ट्रपति भवन में संथाली संस्करण के विमोचन समारोह में भाग लिया था। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले वर्ष, भारत की नेपाली भाषी आबादी के लिए संविधान पहली बार नेपाली भाषा में जारी किया गया था।
तमिल और गुजराती भाषाओं के बारे में बात करते हुए, उन्होंने कहा कि दोनों भाषाओं में सदियों की साहित्यिक प्रतिभा, दार्शनिक गहराई और सांस्कृतिक ज्ञान समाहित है।
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री द्वारा हाल ही में मलेशिया में दिए गए उन बयानों को भी याद किया, जिनमें उन्होंने तमिल को दुनिया की सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक और मानवता को भारत का गौरवपूर्ण उपहार बताया था। उन्होंने गुजराती साहित्य की समृद्धि पर भी प्रकाश डाला।
कानूनी शब्दावली के आठवें संस्करण (अंग्रेजी-हिंदी) के विमोचन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि इसकी सरल भाषा से सांसदों, विद्यार्थियों, न्यायिक अधिकारियों, शोधकर्ताओं, अनुवादकों और नीति निर्माताओं को अत्यंत लाभ होगा। उन्होंने इसे मात्र एक संदर्भ पुस्तक नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का साधन बताया।
उन्होंने कहा कि इस पहल से संविधान लोगों तक उनकी अपनी भाषाओं में पहुंचेगा, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी मजबूत होगी और संवैधानिक जागरूकता बढ़ेगी।
उपराष्ट्रपति ने इन अनुवादों को प्रकाशित करने और देश भर के नागरिकों के लिए संविधान को अधिक सुलभ बनाने की दिशा में किए गए व्यापक कार्य के लिए विधि और न्याय मंत्रालय की सराहना की।
महात्मा गांधी के इस कथन का हवाला देते हुए कि किसी राष्ट्र की संस्कृति उसके लोगों के हृदय और आत्मा में बसती है तथा भाषा उस आत्मा तक पहुंचने का सेतु है, उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से न केवल अपनी मातृभाषा बल्कि भारत को विविधतापूर्ण और सामंजस्यपूर्ण बनाने वाली भाषाओं का भी सम्मान करने का आग्रह किया। कवि सुब्रमण्यम भारती के कथनों को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि भले ही भारत में अनेक भाषाएं बोली जाती हैं, फिर भी भारत माता की सेवा करने के विचार और उद्देश्य के मामले में यह एकजुट है।
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पीके/केसी/आर/डीके
(रिलीज़ आईडी: 2231379)
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