स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 में "सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के लिए एआई का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी" विषय पर एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया
पिछले एक दशक में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली राष्ट्रीय स्तर पर परस्पर संचालित डिजिटल इकोसिस्टम में विकसित हुई है: केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव
आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन ने परस्पर संचालित डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम को मजबूत किया; ई-संजीवनी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में विश्व के सबसे बड़े टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म के रूप में उभरी;
एआई स्वास्थ्य सेवा कार्यबल के बोझ को कम करते हुए चिकित्सक-रोगी संबंधों को मजबूत करेगा; मधुनेत्रएआई, सीए-टीबी और एआई-आधारित निगरानी प्रणालियों ने जमीनी स्तर पर प्रभाव दिखाया: श्रीमती पुण्या सलीला श्रीवास्तव
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने भारत एआई इम्पैक्ट एक्सपो-2026, भारत मंडपम में एआई-संचालित सीडीएसएस, बीओडीएच प्लेटफॉर्म, वॉयस-टू-टेक्स्ट प्रिस्क्रिप्शन और एआई-आधारित मीडिया निगरानी का प्रदर्शन किया
प्रविष्टि तिथि:
16 FEB 2026 5:08PM by PIB Delhi
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 के अंतर्गत "सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव के लिए एआई का विस्तार: सार्वजनिक-निजी भागीदारी" विषय पर एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा का आयोजन किया।
भारत सरकार 16 से 20 फरवरी, 2026 तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 की मेजबानी कर रही है। यह वैश्विक दक्षिण में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है। इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक नेताओं, नीति निर्माताओं, उद्योग विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नवप्रवर्तकों एक साथ मिलकर विभिन्न क्षेत्रों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की परिवर्तनकारी क्षमता पर विचार-विमर्श करेंगे, जिसमें समावेशी और सतत विकास पर विशेष जोर दिया जाएगा।
एक प्रमुख भागीदार मंत्रालय के रूप में, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा, प्रमुख पहलों के शुभारंभ और अपने समर्पित प्रदर्शनी स्टॉल पर एआई-संचालित स्वास्थ्य सेवा समाधानों के प्रदर्शन के माध्यम से शिखर सम्मेलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत की स्वास्थ्य प्रणाली ने अभिलेखों के बुनियादी डिजिटलीकरण और बेहतर डेटा रिपोर्टिंग से आगे बढ़कर राष्ट्रीय स्तर पर परस्पर सुगम डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने याद दिलाया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ने सभी नागरिकों के लिए स्वास्थ्य और कल्याण के उच्चतम संभव मानक को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, जिसे राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य ब्लूप्रिंट के माध्यम से खुले मानकों, परस्पर सुगमता, गोपनीयता-आधारित डिजाइन और जनरेटिव एआई सहित उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने को बढ़ावा देकर और कार्यान्वित किया गया।
उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन स्वास्थ्य के लिए एक मजबूत डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित हो चुका है, जिसमें 859 मिलियन से अधिक आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट खाते 878 मिलियन से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड से जुड़े हुए हैं। देश भर में 1.80 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर कार्यरत हैं और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर डिजिटल प्लेटफॉर्म को एकीकृत किया जा रहा है। एआई-सहायता प्राप्त क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम द्वारा संचालित ई-संजीवनी ने 2.2 लाख से अधिक पंजीकृत स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के माध्यम से 449 मिलियन से अधिक टेलीकंसल्टेशन को सक्षम बनाया है, जिससे यह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में विश्व की सबसे बड़ी टेलीमेडिसिन पहल बन गई है।

उन्होंने कहा कि डिजिटल प्रणालियां सूचना के संग्रहण और प्रसारण को सक्षम बनाती हैं जबकि एआई इसकी बुद्धिमत्तापूर्ण व्याख्या और कार्रवाई को संभव बनाता है। उन्होंने कहा कि एआई में स्वास्थ्य सेवा कर्मचारियों पर बोझ कम करने और चिकित्सक-रोगी संबंध को मजबूत करने की क्षमता है, न कि उसे प्रतिस्थापित करने की। उदाहरण देते हुए, उन्होंने एआई-आधारित डायबिटिक रेटिनोपैथी स्क्रीनिंग के लिए मधुनेत्रएआई, तपेदिक का पता लगाने के लिए एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे और कफ अगेंस्ट टीबी (सीए-टीबी) जैसे ध्वनिक स्क्रीनिंग उपकरणों और तेजी से महामारी संबंधी अलर्ट के लिए एआई-एकीकृत निगरानी प्रणालियों का उल्लेख किया। उन्होंने एम्स दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में स्वास्थ्य सेवा में एआई के लिए उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना पर भी प्रकाश डाला।
सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने उद्योग और राज्य प्रतिनिधियों को सरकारी प्रणालियों के साथ काम करने, खरीद और डेटा ढांचे में सुधार करने और जमीनी स्तर पर सबसे उपयोगी एआई समाधानों की पहचान करने के अपने अनुभव साझा करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में समावेश और समानता के साधन के रूप में डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पर भारत का जोर, विकसित भारत@2047 के दृष्टिकोण के अनुरूप, डिजिटल स्वास्थ्य और एआई के क्षेत्र में भारत की प्रगति का मार्गदर्शन करता रहेगा।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) स्वास्थ्य सेवा वितरण में दक्षता को काफी हद तक बढ़ा सकती है और विशेष रूप से बड़े पैमाने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में त्वरित, डेटा-आधारित निर्णय लेने में सक्षम बना सकती है। उन्होंने कहा कि एआई-संचालित विश्लेषण लाभार्थियों की पहचान को मजबूत कर सकता है, दावों के प्रबंधन को सुव्यवस्थित कर सकता है, धोखाधड़ी का पता लगा सकता है और सेवा उपयोग की निगरानी कर सकता है, जिससे पारदर्शिता, जवाबदेही और समग्र प्रणाली प्रदर्शन में सुधार होगा।
उन्होंने एआई समाधानों के जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए मजबूत डेटा प्रबंधन और गोपनीयता सुरक्षा उपायों द्वारा समर्थित अंतरसंचालनीय डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाने के महत्व पर जोर दिया। राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाओं के व्यापक और जटिल स्वरूप को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि संसाधनों के बेहतर आवंटन, सेवाओं के बेहतर लक्ष्यीकरण और देश भर में बेहतर स्वास्थ्य परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित नवाचार आवश्यक हैं।

इस पैनल में सरकार, उद्योग, बहुपक्षीय संगठनों और स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य पर प्रभाव डालने के लिए एआई नवाचारों को व्यापक स्तर पर लागू करने पर विचार-विमर्श किया जा सके। चर्चाओं में भविष्यसूचक विश्लेषण, प्रारंभिक रोग पहचान, टेलीमेडिसिन, स्वास्थ्य डेटा प्रबंधन और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की वास्तविक समय की निगरानी के लिए एआई का लाभ उठाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
मंत्रालय भारत मंडपम के हॉल 1 में स्टॉल संख्या 1.63 और 1.64 पर इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो-2026 में अपनी डिजिटल स्वास्थ्य और एआई पहलों का प्रदर्शन भी कर रहा है। इनमें एआई-संचालित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) शामिल है, जो रोगी सहायता फॉर्म के माध्यम से संरचित, बहुभाषी लक्षण संग्रह को सक्षम बनाता है और सटीक, विश्वसनीय और डेटा-आधारित नैदानिक निर्णय लेने में सहायता करता है।
इस प्रदर्शनी में आईआईटी कानपुर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से विकसित बोध (स्वास्थ्य एआई के लिए बेंचमार्किंग ओपन डेटा प्लेटफॉर्म) भी शामिल है, जो जनसंख्या स्तर पर तैनाती से पहले विभिन्न वास्तविक डेटासेट पर एआई मॉडल के मूल्यांकन को सक्षम बनाता है, जिससे स्वास्थ्य एआई में विश्वसनीय और जिम्मेदार नवाचार को बढ़ावा मिलता है। इस प्लेटफॉर्म का औपचारिक शुभारंभ कल 17 फरवरी को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा किया जाएगा।
प्रदर्शित की गई अन्य पहलों में एक वॉयस-टू-टेक्स्ट एआई मॉडल शामिल है जो डॉक्टर की आवाज को डिजिटल प्रिस्क्रिप्शन में परिवर्तित करता है जिसे मौजूदा एचएमआईएस वर्कफ़्लो में सहजता से एकीकृत किया गया है और एक एआई-संचालित मीडिया निगरानी प्रणाली है जिसे बीमारी के प्रकोप के लिए प्रारंभिक चेतावनी संकेत उत्पन्न करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट-2026 से सहयोगात्मक कार्रवाई और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है जिससे सार्वजनिक हित के लिए एआई का उपयोग करने हेतु विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी संभव हो सकेगी। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय इस शिखर सम्मेलन में सक्रिय भागीदारी के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और सभी के लिए सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने हेतु अत्याधुनिक तकनीकों का लाभ उठाने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।
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पीके/केसी/एचएन/एनजे
(रिलीज़ आईडी: 2228786)
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