सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय
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भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपकरण

प्रविष्टि तिथि: 12 FEB 2026 6:07PM by PIB Delhi

सरकार ने मध्यम और भारी वाहनों की सुरक्षा बढ़ाने हेतु निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

ब्रेक के प्रदर्शन के मूल्यांकन को बेहतर बनाने हेतु, ट्रकों के लिए संशोधित ब्रेकिंग मानक (आईएस 11852: 2019) को [जीएसआर 834(ई) दिनांक 11 नवंबर 2025 के अनुसार] 1 अक्टूबर 2027 से अनिवार्य कर दिया गया है। इससे पहले, यह मानक केवल मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) द्वारा निर्मित बसों पर लागू था।

ट्रकों के लिए इलेक्ट्रॉनिक स्थिरता नियंत्रण प्रणाली (एआईएस 162) को [जीएसआर 834(ई) दिनांक 11 नवंबर 2025 के अनुसार] 1 अक्टूबर 2027 से अनिवार्य रूप से लागू करके ब्रेकिंग प्रणाली को उन्नत बनाया गया है, जो विशेष रूप से घुमावों पर ब्रेकिंग के दौरान स्थिरता प्रदान करता है।

इसके अलावा, उन्नत आपातकालीन ब्रेकिंग प्रणाली (एआईएस 162) को भी 1 अक्टूबर 2027 से अनिवार्य कर दिया गया है। इसके तहत आपातकालीन स्थितियों में चालक की ओर से प्रतिक्रिया नहीं कर पाने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाया जा सकेगा ताकि सामने मौजूद बाधाओं से टक्कर को टाला जा सके या टक्कर के प्रभाव को कम किया जा सके।

दिनांक 1 जनवरी 2028 से ब्लाइंड स्पॉट सूचना प्रणाली (एआईएस 186) और मूविंग ऑफ सूचना प्रणाली (एआईएस 187) जैसी उन्नत चालक सहायता प्रौद्योगिकियां अनिवार्य कर दी गई हैं। इनसे सड़क पर असुरक्षित उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ेगी।

ड्राइवर के सो जाने और वाहन के निर्धारित मार्ग से भटक जाने जैसी खतरनाक स्थितियों के प्रभाव को कम करने हेतु, ड्राइवर उनींदापन पहचान और चेतावनी प्रणाली (एआईएस 184) को 1 जनवरी 2028 से अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, लेन प्रस्थान चेतावनी प्रणाली (एआईएस 188) को भी 1 जनवरी 2028 से अनिवार्य कर दिया गया है, जो वाहन के अपेक्षित मार्ग से भटकने की स्थिति में चेतावनी देती है।

साथ ही, ड्राइवर की थकान को कम करने हेतु, सीएमवीआर के तहत 1 अक्टूबर 2025 से ट्रक केबिन में एसी लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।

मालवाहक वाहनों के लिए ट्रक केबिन की संरचनात्मक मजबूती का परीक्षण आवश्यक है। 1 अप्रैल 2020 को या उसके बाद निर्मित मालवाहक वाहनों (ट्रेलरों के लिए खींचने वाले ट्रैक्टरों को छोड़कर) में एआईएस-145:2017 की आवश्यकताओं के अनुरूप रिवर्स पार्किंग चेतावनी प्रणाली लगाना अनिवार्य है। एआईएस-090:2005 की आवश्यकताओं के अनुसार ट्रकों के पूरे ढांचे पर परावर्तक टेप लगाना अनिवार्य है। साथ ही, क्रमशः आईएस: 14812 और आईएस: 14862 के अनुसार ट्रकों में पीछे की ओर और बगल में सुरक्षा उपकरण लगाना भी अनिवार्य है।

सरकार द्वारा देशभर में राज्य/जिला स्तर पर ड्राइविंग प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (आईडीटीआर), क्षेत्रीय ड्राइविंग प्रशिक्षण केन्द्र (आरडीटीसी) और ड्राइविंग प्रशिक्षण केन्द्र  (डीटीसी) स्थापित करने की योजना संचालित की जाती है। हाल ही में इस योजना संबंधी संशोधित दिशानिर्देश जारी किए गए हैं, जिनमें ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थान स्थापित करने के लिए बढ़ी हुई वित्तीय सहायता और सरलीकृत पात्रता मानदंड शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, प्रशिक्षण-परीक्षण क्लस्टर दृष्टिकोण के तहत ड्राइविंग प्रशिक्षण संस्थानों (डीटीआई) के साथ स्वचालित परीक्षण केन्द्र (एटीएस) स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन भी शुरू किए गए हैं।

विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों के लिए वित्तीय प्रावधान निम्नानुसार हैं:

आईडीटीआर 17.25 करोड़ रुपये

आरडीटीसी 5.50 करोड़ रुपये

डीटीसी 2.50 करोड़ रुपये  

मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के तहत कानूनी अधिदेश के अनुसार, सड़क दुर्घटना के पीड़ितों के लिए कैशलेस उपचार योजना, 2025 को एस.ओ. 2015(ई) दिनांक 05.05.2025 के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। इसके अलावा, प्रक्रिया प्रवाह, विभिन्न हितधारकों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों तथा इसके कार्यान्वयन हेतु मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का विस्तृत विवरण देने वाले व्यापक दिशानिर्देश एस.ओ. 2489(ई) दिनांक 04.06.2025 के माध्यम से जारी किए गए हैं। इस योजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:

दुर्घटना की तिथि से अधिकतम सात दिनों की सीमा के अधीन, प्रति पीड़ित 1.5 लाख रुपये तक का उपचार कवर प्रदान किया जाएगा। यह उपचार कवर उन पीड़ितों के लिए उपलब्ध होगा जो मोटर वाहनों के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में शामिल हैं।

पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया के अधीन, प्रत्येक सड़क दुर्घटना पीड़ित को निर्धारित अस्पतालों में गैर-जानलेवा मामलों में 24 घंटे तक और जानलेवा मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार प्रदान किया जाएगा।

यह वैधानिक योजना किसी भी अन्य केन्द्रीय/राज्य-स्तरीय योजनाओं पर प्राथमिकता रखेगी।

इस योजना को दो मौजूदा तकनीकी प्लेटफार्मों- ई-डीएआर (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट), जिसका उपयोग पुलिस अधिकारी दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए करते हैं और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) का टीएमएस 2.0 (लेनदेन प्रबंधन प्रणाली), जिसका उपयोग अस्पताल में उपचार, दावा प्रस्तुत करने और भुगतान की प्रक्रिया के लिए करते हैं - के एकीकरण के जरिए सफलतापूर्वक लागू किया गया है। अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना कोष (एमवीएएफ) के जरिए की जा रही है। इस कोष का वित्त पोषण उन मामलों के लिए सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान के माध्यम से किया जाता है जहां दोषी मोटर वाहन बीमित होता है और अन्य गैर-बीमित मामलों के लिए बजटीय सहायता के माध्यम से किया जाता है।

यह जानकारी केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी जी ने लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

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पीके/केसी/आर/एसएस  


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