कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय
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कौशल विकास पारिस्थितिक तंत्र में उद्योग का विश्वास एवं भागीदारी मजबूत करना

प्रविष्टि तिथि: 11 FEB 2026 5:25PM by PIB Delhi

भारत सरकार के स्किल इंडिया मिशन (एसआईएम) के अंतर्गत, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) विभिन्न योजनाओं, जैसे प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई), जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस), राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) और शिल्पकार प्रशिक्षण योजना (सीटीएस) के अंतर्गत कौशल विकास केंद्रों के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के माध्यम से पूरे देश में समाज के सभी वर्गों को कौशल, पुनर्कौशल और उन्नत कौशल प्रशिक्षण प्रदान करता है। स्किल इंडिया मिशन का उद्देश्य देश के युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशलों से युक्त करके भविष्य के लिए तैयार करना है।

पीएमकेवीवाई मानक एनएसक्यूएफ-अनुरूप पाठ्यक्रमों के माध्यम से नियोक्ताओं का विश्वास बढ़ाता है, जिन्हें सेक्टर स्किल काउंसिल्स (एसएससी) और उद्योगों के साथ मिलकर विकसित किया गया है, ताकि एआई, रोबोटिक्स और हरित रोजगार जैसी क्षमताएं बाजार की आवश्यकता के अनुरूप हों। स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) के माध्यम से डिजिटल प्रमाणपत्र में तत्काल सत्यापन के लिए क्यूआर कोड होते हैं, जिससे धोखाधड़ी कम होती है और आंतरिक प्रशिक्षण की तुलना में भर्ती में विश्वास बढ़ता है। आरपीएल जैसी पहल मौजूदा कर्मचारियों के कौशल को बढ़ाती है (प्रमाणीकरण के बाद उच्च वेतन), और ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) कार्यबल की तत्परता को साबित करके कर्मचारियों को बनाए रखने में मदद करती है।

एमएसडीई की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान किए जाने वाले कौशल उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप हों और नियोक्ताओं का विश्वास बढ़े, यह सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित विशिष्ट कदम उठाए गए हैं:

(i) राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीवीईटी) की स्थापना तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण (टीवीईटी) क्षेत्र में गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विनियम एवं मानक स्थापित करने वाले एक व्यापक नियामक के रूप में हुई है।

(ii) एनसीवीईटी द्वारा मान्यता प्राप्त पुरस्कार प्रदान करने वाले निकायों से अपेक्षा की जाती है कि वे उद्योग की मांग के अनुसार योग्यताएं विकसित करें और उन्हें राष्ट्रीय व्यवसाय वर्गीकरण, 2015 के अनुसार पहचाने गए व्यवसायों के साथ संरेखित करें एवं उद्योग से मान्यता प्राप्त करें।

(iii) एनसीवीईटी ने उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार 9026 योग्यताओं को मंजूरी प्रदान की है, जिनमें से 2599 योग्यताएं वैध और सक्रिय हैं और 6427 योग्यताएं अप्रासंगिक होने के कारण संग्रहीत की गई हैं।

(iv) संबंधित क्षेत्रों में उद्योग जगत के नेताओं के नेतृत्व में 36 क्षेत्रीय कौशल परिषदें (एसएससी) स्थापित की गई हैं जो संबंधित क्षेत्रों की कौशल विकास आवश्यकताओं की पहचान करने के साथ-साथ कौशल दक्षता मानकों को निर्धारित करती हैं।

(v) एमएसडीई के तत्वावधान में प्रशिक्षण महानिदेशालय (डीजीटी) फ्लेक्सी एमओयू योजना एवं प्रशिक्षण की दोहरी प्रणाली (डीएसटी) को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य आईटीआई छात्रों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार औद्योगिक वातावरण में प्रशिक्षण प्रदान करना है।

(vi) पीएमकेवीवाई के अंतर्गत, आगामी बाजार मांग एवं उद्योग की आवश्यकताओं के लिए एआई/एमएल, रोबोटिक्स, मेकाट्रॉनिक्स, ड्रोन प्रौद्योगिकी आदि जैसे क्षेत्रों में उद्योग 4.0 की आवश्यकताओं के साथ नए युग/भविष्य के कौशल नौकरी-भूमिकाओं को विशेष रूप से संरेखित किया गया है।

(vii)  डीजीटी ने सीटीएस के अंतर्गत औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) और राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थानों (एनएसटीआई) में नए युग/भविष्य के कौशल पाठ्यक्रम शुरू किए हैं ताकि 5जी नेटवर्क तकनीशियन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्रामिंग सहायक, साइबर सुरक्षा सहायक, ड्रोन तकनीशियन आदि जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।

(viii) डीजीटी ने राज्य और क्षेत्रीय स्तर पर संस्थानों के लिए उद्योग से जुड़ाव सुनिश्चित करने के लिए आईबीएम, सिस्को, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस), ऑटो डेस्क और फ्यूचर स्किल राइट्स नेटवर्क जैसी आईटी प्रौद्योगिकी कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया है। ये साझेदारियां आधुनिक प्रौद्योगिकियों में तकनीकी और व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने में सहायक हैं।

(ix) एमएसडीई ने स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) का शुभारंभ किया है, जो एक एकीकृत मंच है और कौशल विकास, शिक्षा, रोजगार एवं उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र को एकीकृत करके प्रमुख हितधारकों को जीवन में आवश्यक सेवाओं की एक श्रृंखला प्रदान करता है। प्रशिक्षित उम्मीदवारों का विवरण एसआईडीएच पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे वे संभावित नियोक्ताओं से जुड़ सकते हैं। एसआईडीएच के माध्यम से, उम्मीदवार रोजगार और शिक्षुता के अवसरों तक पहुंच प्राप्त कर सकते हैं।

(x) राष्ट्रीय शिक्षुता प्रोत्साहन योजना (एनएपीएस) के अंतर्गत नियोक्ताओं को प्रशिक्षुओं को नियुक्त करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए डीबीटी के माध्यम से वजीफा सहायता (वजीफे का 25% प्रतिपूर्ति, प्रति माह 1,500 रुपये तक) प्रदान करने का प्रावधान है। शिक्षुता का ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग (ओजेटी) प्रशिक्षुओं को उद्योग में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करता है, जिससे वे नौकरी के लिए तैयार होते हैं, साथ ही नियोक्ताओं को शिक्षुता अधिनियम, 1961 के अंतर्गत प्रशिक्षण के बाद की प्रतिबद्धताओं में पूर्ण लचीलापन प्राप्त होता है।

यह जानकारी कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने आज राज्यसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में दी।

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पीके/केसी/एके/डीए


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