कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय
राष्ट्रीय बागवानी मिशन का पुनर्गठन
प्रविष्टि तिथि:
10 FEB 2026 6:39PM by PIB Delhi
भारत सरकार ने देश में बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से वर्ष 2004-05 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन (एनएचएम) की शुरुआत की। उक्त योजना का पुनर्गठन किया गया और वर्ष 2014-15 में इसे एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) योजना के अंतर्गत शामिल कर लिया गया, जिसमें बागवानी क्षेत्र के व्यापक दायरे को शामिल किया गया है। वर्ष 2025 में एमआईडीएच योजना का पुनर्गठन संशोधित परिचालन दिशानिर्देशों के साथ किया गया, जिसके अंतर्गत एमआईडीएच योजना को पूरे देश में लागू किया गया है। इसमें देश के सभी जिले शामिल हैं, विभिन्न हस्तक्षेपों के लागत मानदंडों को बढ़ाया गया है, उच्च मूल्य वाली, विदेशी और औषधीय फसलों को शामिल किया गया है और बागवानी क्षेत्र में उपयोग की जा रही नवीनतम और नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया गया है।
सरकार कृषि और बागवानी उत्पादों की खरीद के लिए बाजार हस्तक्षेप योजना (एमआईएस) लागू कर रही है, ताकि किसानों को उन कृषि और बागवानी उत्पादों का लाभकारी मूल्य मिल सके जो जल्दी खराब होने वाले हैं और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमआईएस) व्यवस्था के अंतर्गत नहीं आते हैं। इसका उद्देश्य फसल की बंपर पैदावार होने के समय कीमतों के उत्पादन लागत से नीचे गिर जाने पर किसानों को मजबूरी में उत्पाद बेचने से बचाना है। कृषि एवं बागवानी परिषद (एपीएमसी) मंडियों में बेची गई फसलों के लिए बाजार हस्तक्षेप मूल्य (एमआईपी) और विक्रय मूल्य के बीच के अंतर का सीधा भुगतान किसानों को करने के विकल्प के साथ मूल्य अंतर भुगतान (पीडीपी) के नए घटक जोड़े गए हैं। इसके अतिरिक्त, प्रमुख फसलों (टमाटर, प्याज और आलू) के परिवहन और भंडारण लागत की प्रतिपूर्ति केंद्रीय नोडल एजेंसियों और राज्य नामित एजेंसियों को उत्पादक राज्य से उपभोक्ता राज्य तक उनके भंडारण और परिवहन के लिए दी जाती है। एमआईएस के तहत भुगतान पंजीकृत किसानों के बैंक खाते में सीधे किया जाता है।
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
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पीके/केसी/जेएस
(रिलीज़ आईडी: 2226077)
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