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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने 12 प्रभावित राज्यों में लिम्फैटिक फ़ाइलेरिया उन्मूलन के लिए वार्षिक राष्ट्रव्यापी एमडीए अभियान का शुभारंभ किया


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने 2027 तक लिम्फैटिक फ़ाइलेरिया उन्‍मूलन की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 2027 तक भारत को फ़ाइलेरिया मुक्त बनाने के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया

श्री नड्डा ने लिम्फैटिक फ़ाइलेरिया उन्मूलन में अंतिम छोर तक की चुनौतियों से निपटने के लिए सामुदायिक भागीदारी पर बल दिया

प्रविष्टि तिथि: 10 FEB 2026 5:13PM by PIB Delhi

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज 12 चिन्हित लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) प्रभावित राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) उन्मूलन हेतु वार्षिक राष्ट्रव्यापी सामूहिक औषधि एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान का शुभारंभ किया। यह अभियान एलएफ को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को दर्शाता है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य रोग के प्रसार को रोकने, रुग्णता को कम करने और देश भर में संवेदनशील आबादी के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल उपायों तक न्‍यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करने के प्रयासों में तेजी लाना है।

लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ), जिसे आमतौर पर हाथीपांव के नाम से जाना जाता है, एक वेक्टर-जनित रोग है, जो मादा क्यूलेक्स मच्छर द्वारा फैलता है। यह मच्छर प्रदूषित और स्थिर जल में पनपता है। संक्रमण लसीका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और दीर्घकालिक रुग्णता, दिव्‍यांगता और सामाजिक कलंक का कारण बन सकता है। भारत सरकार ने वैश्विक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 2030 के लक्ष्य से पहले, 2027 के अंत तक एलएफ को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में समाप्त करने को उच्च प्राथमिकता दी है। वर्तमान में एलएफ से 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 348 जिलों प्रभावित हैं। इनमें से 41 प्रतिशत (143 जिले) ने संचरण आकलन सर्वेक्षण (टीएएस-1) को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद सामूहिक औषधि एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) बंद कर दिया है, जबकि 50 प्रतिशत (14 राज्यों के 174 जिले) में माइक्रोफिलेरिया की दर 1 प्रतिशत से अधिक होने के कारण वार्षिक एमडीए लागू किया जा रहा है। शेष 9 प्रतिशत (31 जिले) संचरण आकलन के विभिन्न चरणों में हैं। 2024 तक प्रभावित जिलों से लिम्फोएडेमा के 6.20 लाख से अधिक मामले और हाइड्रोसील के 1.21 लाख मामले सामने आए हैं, जो निरंतर और गहन प्रयासों की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।

इस अवसर पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए श्री जगत प्रकाश नड्डा ने 2027 तक लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) के उन्मूलन के लिए भारत सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया, जो वैश्विक सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) के 2030 के लक्ष्य से काफी पहले है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एलएफ न केवल रोगियों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि यह उनकी आजीविका, आर्थिक उत्पादकता और सामाजिक कल्याण पर भी गंभीर प्रभाव डालता है, जो अक्सर सामाजिक कलंक और पूरे परिवार के लिए दीर्घकालिक कठिनाई के रूप में सामने आता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एलएफ का उन्मूलन केवल एक स्वास्थ्य संबंधी उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक अनिवार्यता है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सामूहिक औषधि एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान के मिशन-मोड कार्यान्वयन के माध्यम से हासिल की गई महत्वपूर्ण प्रगति को भी रेखांकित किया, विशेष रूप से प्रत्यक्ष निगरानी उपचार के माध्यम से, जिससे जमीनी स्तर पर उत्साहजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने रोग संचरण को प्रभावी ढंग से रोकने के लिए निरंतर एमडीए के साथ-साथ वेक्टर नियंत्रण संबंधी इकोसिस्‍टम को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। अंतिम छोर की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए श्री नड्डा ने बताया कि दवा सेवन की प्रत्यक्ष निगरानी सुनिश्चित करना और दवा के प्रति जनता की झिझक को दूर करना प्रमुख चिंताएं बनी हुई हैं, जिन्हें गहन जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी, शिकायत निवारण और विश्वास निर्माण उपायों के माध्यम से हल किया जाना चाहिए।

श्री नड्डा ने प्रभावित व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए रुग्णता प्रबंधन और दिव्‍यांगता निवारण (एमएमडीपी) के महत्व पर जोर दिया, जिसमें समय पर हाइड्रोसील सर्जरी और दवाओं का एडमिनिस्ट्रेशन शामिल है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) प्रारंभिक जांच, पहचान और शीघ्र उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं, जिससे रोग को बढ़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि हाइड्रोसील सर्जरी को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) में शामिल किया गया है, जो रोगियों के लिए वित्तीय सुरक्षा और बेहतर चिकित्सा सुविधा तक पहुंच सुनिश्चित करती है।

श्री नड्डा ने 12 राज्यों के 124 जिलों के 719 ब्लॉकों में चल रहे मौजूदा अभियान का जिक्र करते हुए सभी प्रभावित क्षेत्रों में माइक्रोफिलेरिया के प्रसार की दर को लगातार एक प्रतिशत से नीचे लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सुचारू कार्यान्वयन, मजबूत सामुदायिक भागीदारी और 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में त्वरित प्रगति सुनिश्चित करने के लिए सरकार और समाज के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें पंचायत प्रतिनिधियों, विशेष रूप से सभी 719 ब्लॉकों के प्रधानों, साथ ही संबद्ध मंत्रालयों और विभागों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

एमडीए अभियान के बारे में

भारत ने उन्नत पंचसूत्री रणनीति अपनाकर लिम्फैटिक फाइलेरिया (एलएफ) उन्मूलन के प्रयासों को तेज कर दिया है, जिसमें भारत एमडीए अभियान इसका मुख्य आधार है। फरवरी 2026 से राष्ट्रीय एलएफ कार्यक्रम एक एकीकृत वार्षिक एमडीए अभियान में बदल गया गया है, जो राष्ट्रीय कृमिनाशक दिवस (एनडीडी) के साथ पहले 10 फरवरी और 10 अगस्त को आयोजित किया जाता था। यह रणनीतिक परिवर्तन मानसून की बाधाओं, रसद संबंधी समस्याओं, निगरानी के लिए सीमित समय और पहले के द्विवार्षिक आयोजनों के परिचालन भार से संबंधित चुनौतियों को संबोधित करता है, साथ ही यह सुव्यवस्थित संचालन, मजबूत पर्यवेक्षण, व्यापक कवरेज और रात्रि रक्त सर्वेक्षण, प्री-टीएएस, टीएएस, प्रभाव सर्वेक्षण और रुग्णता प्रबंधन एवं दिव्‍यांगता निवारण (एमएमडीपी) हस्तक्षेप जैसी महत्वपूर्ण निगरानी गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय सुनिश्चित करता है। इस परिवर्तन का उद्देश्य कार्यक्रम की दक्षता में सुधार करना और 2027 तक एलएफ उन्मूलन को हासिल करने के दिशा में प्रगति को और आगे बढ़ाना है।

निरंतर कार्यक्रम प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रत्यक्ष अवलोकन उपभोग पर जोर देने के कारण कुल जनसंख्या में एमडीए कवरेज 2014 में 75 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 85 प्रतिशत हो गया। संचरण आकलन सर्वेक्षण-1 (टीएएस-1) को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद एमडीए को बंद करने वाले एलएफ-प्रभावित जिलों का अनुपात 2014 में 15 प्रतिशत (39 जिले) से बढ़कर 2025 में 41 प्रतिशत (143 जिले) हो गया, जो 348 प्रभावित जिलों में से है। कवरेज मूल्यांकन सर्वेक्षणों में मेडिकल कॉलेजों की भागीदारी 2019 में 1 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 96 प्रतिशत हो गई, जिसमें 199 कॉलेज सक्रिय रूप से शामिल थे, वहीं प्रभावित राज्यों ने एकीकृत स्वास्थ्य सूचना पोर्टल (आईएचआईपी) के माध्यम से एमडीए डेटा ऑनलाइन रिपोर्ट किया और माइक्रोफिलेरिया/एंटीजन-पॉजिटिव, लिम्फोएडेमा और हाइड्रोसील मामलों की अद्यतन सूची प्रस्तुत की। 2023 और 2025 के बीच एमडीए अभियान चलाने वाले ब्लॉकों में 32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसमें 2025 के अभियान में 14 राज्य, 161 जिले और 1,090 ब्लॉक शामिल थे, जिसका लक्ष्य 21.71 करोड़ आबादी थी, पात्र आबादी के मुकाबले 96 प्रतिशत कवरेज हासिल किया गया और यह सुनिश्चित किया गया कि 18.48 करोड़ व्यक्तियों ने फाइलेरिया-रोधी दवाओं का सेवन किया।

90 प्रतिशत से अधिक दवा अनुपालन हासिल करने के लिए व्यापक सामुदायिक संपर्क और निरंतर घरेलू स्तर पर जागरूकता प्रयासों की आवश्यकता है। इस संबंध में पंचायती राज, ग्रामीण विकास (एनआरएलएम), महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, युवा कार्यक्रम, जनजातीय कार्य और कृषि सहित संबद्ध मंत्रालय और विभाग सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं, जो मजबूत बहु-क्षेत्रीय सहयोग सुनिश्चित हो रहा है। 10 फरवरी 2026 को शुरू होने वाले एमडीए अभियान के लिए 12 राज्यों के 124 जिलों (55 डीए और 69 आईडीए) को अस्थायी रूप से चिन्हित किया गया है। इस अभियान का उद्देश्य उच्च स्तरीय प्रतिबद्धता हासिल करना, अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को मजबूत करना, दृश्यता बढ़ाना और समुदायों को संगठित करना है, ताकि 2027 तक फाइलेरिया मुक्त भारत की दिशा में प्रगति को और तेज किया जा सके।

इस अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री की सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव, सुश्री आराधना पटनायक, एएस एवं एमडी, एनएचएम, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव (वीबीडी) श्री निखिल गजराज उपस्थित थे।

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पीके/केसी/आईएम /एम


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