जल शक्ति मंत्रालय
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केंद्रीय जल आयोग ने नई दिल्ली में बाढ़ पूर्वानुमान और बाढ़ प्रबंधन DPR पर एक दिवसीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया


प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान, निर्णय-सहायता प्रणाली और बाढ़ प्रबंधन DPR के बेहतर मूल्यांकन पर जोर दिया गया

प्रविष्टि तिथि: 09 FEB 2026 7:20PM by PIB Delhi

केंद्रीय जल आयोग (CWC), जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग, जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार ने आज नई दिल्ली के आर. के. पुरम स्थित पुस्तकालय भवन के CWC ऑडिटोरियम में बाढ़ पूर्वानुमान सेवाओं और बाढ़ प्रबंधन विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की तैयारी, प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन हेतु दिशा-निर्देशों पर एक दिवसीय हितधारक कार्यशाला का आयोजन किया।

कार्यशाला का उद्घाटन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR) के सचिव श्री वी. एल. कांता राव द्वारा केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष श्री अनुपम प्रसाद, CWC के सदस्यों श्री योगेश पैथानकर (WP&P), बिहार के जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव श्री संतोष कुमार मल्ल और कर्नाटक की क्षेत्रीय आयुक्त श्रीमती जानकी के. एम. की उपस्थिति में किया गया। इस अवसर पर राज्यों, केंद्रीय एजेंसियों और CWC के क्षेत्रीय कार्यालयों के साथ-साथ मुख्यालय के प्रतिभागी भी उपस्थित थे। अपने उद्घाटन भाषण में सचिव, DoWR, RD & GR ने बढ़ती जलवायु परिवर्तनशीलता और चरम घटनाओं के संदर्भ में बाढ़ पूर्वानुमान, तैयारियों और बाढ़ प्रबंधन योजना में केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया।

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कार्यशाला में CWC सहित 27 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और 15 केंद्रीय एजेंसियों की भागीदारी देखी गई। इसमें राज्यों (69), केंद्रीय एजेंसियों (34) और CWC (70) के कुल लगभग 173 अधिकारियों ने भाग लिया, जिनमें राज्य जल संसाधन विभागों के साथ-साथ राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के तकनीकी विशेषज्ञ और निर्णय निर्माता, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (CDAC), राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA), गृह मंत्रालय के आपदा प्रबंधन प्रभाग (DM Div-MHA), जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग (DoWR, RD & GR), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), भाखड़ा और ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB), दामोदर घाटी निगम (DVC), राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC), ब्रह्मपुत्र बोर्ड (BB), गंगा बाढ़ नियंत्रण आयोग (GFCC), सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (CDOT), और राष्ट्रीय जल सूचना विज्ञान केंद्र (NWIC) जैसी केंद्रीय एजेंसियां शामिल थीं, जो आपदा प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान और बाढ़ प्रबंधन योजना के मूल्यांकन, निगरानी और धन जारी करने में शामिल हैं।

तकनीकी सत्रों के दौरान, CWC ने 5 प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें भारत में बाढ़ पूर्वानुमान सेवाओं के विकास का अवलोकन प्रस्तुत किया गया, जिसमें अल्पकालिक और सात-दिवसीय परामर्शदात्री बाढ़ पूर्वानुमान, जलप्लावन पूर्वानुमान (inundation forecasting) और एकीकृत जलाशय संचालन सहायता जैसी नई सेवाओं, ग्लेशियर झील विह़स्फोट बाढ़ (GLOF) के अध्ययन और समय-समय पर ग्लेशियर झील निगरानी और इसके विश्लेषण सहित बाढ़ पूर्वानुमान में AI/ML के उपयोग, 4-सप्ताह के बाढ़ मार्गदर्शन और फ्लैश फ्लड (अचानक आने वाली बाढ़) के पूर्वानुमान से संबंधित पहलों को प्रदर्शित किया गया।

असम, बिहार, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना जैसे कुछ राज्यों के प्रतिनिधियों ने बाढ़ पूर्वानुमान और CWC के साथ परिचालन समन्वय में की गई पहलों पर अपने संक्षिप्त अनुभव साझा किए, जिससे क्षेत्र-स्तरीय चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई।

अंत में, राज्यों द्वारा स्वयं विकसित या CWC की सेवाओं के उपयोग से जुड़ी बाढ़ पूर्वानुमान पहलों का सारांश और बेहतर समन्वय के लिए उनके अनुरोधों को CWC द्वारा प्रस्तुत किया गया। सत्रों ने प्रभाव-आधारित पूर्वानुमान और निर्णय-सहायता प्रणालियों की ओर बदलाव को रेखांकित किया, जिसके लिए तैयारी और प्रतिक्रिया बढ़ाने हेतु प्राथमिकता के तौर पर वास्तविक समय के डेटा साझाकरण के स्वचालन के माध्यम से राज्य सरकारों के साथ CWC की प्रणालियों के एकीकरण की आवश्यकता है। इसमें मॉडलिंग प्रथाओं/उत्पादों और बाढ़ पूर्वानुमान प्रथाओं में सुधार के लिए ज्ञान हस्तांतरण हेतु तकनीकी कार्यशालाओं/मंथन सत्रों की एक श्रृंखला की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया।

दोपहर का सत्र बाढ़ प्रबंधन और कटाव-रोधी कार्यों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) की तैयारी, प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन के दिशा-निर्देशों पर केंद्रित था। चर्चाओं ने परियोजना की गुणवत्ता में सुधार और समय पर मूल्यांकन एवं कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए बेसिन-स्तरीय योजना, सटीक हाइड्रोलॉजिकल विश्लेषण और CWC के साथ शुरुआती जुड़ाव के महत्व पर प्रकाश डाला।

CWC ने 2 प्रस्तुतियाँ दीं। पहली प्रस्तुति संबंधित राज्य सरकारों द्वारा विशिष्ट दिशा-निर्देशों, मैनुअल और BIS कोड का पालन करते हुए DPR तैयार करने पर थी, जिसमें DPR में पाई जाने वाली उन सामान्य कमियों को रेखांकित किया गया जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। दूसरी प्रस्तुति CWC/GFCC में मूल्यांकन के लिए समर्पित ई-पैम्स (e-PAMS) पोर्टल के माध्यम से DPR के ऑनलाइन प्रस्तुतीकरण पर थी। इसमें मूल्यांकन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों की समयसीमा, सुधार के लिए मूल्यांकन कार्यालय द्वारा की गई टिप्पणियों और परियोजना प्राधिकरण द्वारा उन टिप्पणियों के जवाब देने की प्रक्रिया को भी कवर किया गया। सलाहकार समिति के लिए तकनीकी-आर्थिक मंजूरी प्राप्त करने हेतु तैयार किए जाने वाले नोट की विषय-वस्तु और 'बाढ़ प्रबंधन एवं सीमा क्षेत्र कार्यक्रम' (FMBAP) जैसी केंद्रीय प्रायोजित योजनाओं के तहत केंद्रीय सहायता प्राप्त करने की आगे की प्रक्रियाओं को भी समझाया गया। परियोजनाओं के कार्यान्वयन के दौरान विशिष्ट दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए केंद्रीय सहायता की किस्तों को समय पर जारी करने से जुड़ी प्रक्रियाओं पर भी स्पष्टता साझा की गई। प्रस्तुतियों के बाद अनुत्तरित प्रश्नों के स्पष्टीकरण और राज्यों से सुझाव आमंत्रित करने के लिए एक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया।

कार्यशाला का समापन CWC के सदस्य (D&R) की अध्यक्षता में एक सत्र के साथ हुआ, जिसके दौरान चर्चाओं के मुख्य बिंदुओं को संक्षेपित किया गया। अंत में, यह दोहराया गया कि देश में बाढ़ के प्रति लचीलापन मजबूत करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच घनिष्ठ सहयोग, पूर्वानुमान सेवाओं का प्रभावी उपयोग और बाढ़ प्रबंधन प्रस्तावों की गुणवत्ता में सुधार आवश्यक है।

उम्मीद है कि यह कार्यशाला बाढ़ की तैयारी में सुधार, बेहतर जानकारी आधारित निर्णय लेने और बाढ़ प्रबंधन हस्तक्षेपों की प्रभावशीलता बढ़ाने में योगदान देगी, जो आपदा लचीलेपन और जलवायु-उत्तरदायी जल संसाधन प्रबंधन पर सरकार के जोर के अनुरूप है।

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पीके/केस/वीएस


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