मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र में महिला-नेतृत्व वाली सहकारी समितियों का सशक्तिकरण

प्रविष्टि तिथि: 05 FEB 2026 5:20PM by PIB Delhi

मत्स्य विभाग की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई ) के अंतर्गत भारत सरकार मत्स्य सहकारी समितियों को सहायता प्रदान कर रही है। इसी क्रम में, पुदुचेरी की श्री सेंगझनीरम्मन मत्स्य महिला सहकारी समिति को उसके गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले पोत (डीप-सी फिशिंग वेसल) और सहायक उपकरणों के लिए ₹72 लाख की पीएमएमएसवाई सब्सिडी की स्वीकृति मिली है। परियोजना के कार्यान्वयन हेतु राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) ने ₹88 लाख की सावधिक ऋण सहायता भी मंजूर की है।

इस वित्तीय सहायता से आधुनिक गहरे समुद्र वाले जहाज तक पहुंच सुनिश्चित होगी जिससे मछुआरा महिला सहकारी समिति की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। इसके अलावा समिति की आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और सामूहिक आर्थिक मजबूती भी मिलेगी। यह पहल पीएमएमएसवाई के अंतर्गत मत्स्य सहकारी समितियों के सशक्तीकरण, भारत की गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमताओं के विस्तार तथा तकनीकी उन्नयन में योगदान देगी। साथ ही, यह परियोजना सहकारी समिति को गहरे मछली पकड़ने के क्षेत्रों तक बेहतर पहुंच, अधिक सुरक्षित एवं दक्ष मत्स्य प्रथाओं को अपनाने और सदस्यों की आय बढ़ाने में सहायक होगी।

यह पहल सहकारिता से समृद्धिके विज़न के तहत मत्स्य सहकारी समितियों को सशक्त बनाने पर भारत सरकार के व्यापक दृष्टिकोण की तरफ को भी रेखांकित करती है। इस स्वीकृति के साथ, सहकारी संस्थाओं की भूमिका देश की ब्लू इकोनॉमी (नीली अर्थव्यवस्था) में समावेशी और सतत विकास के प्रमुख चालक के रूप में और सुदृढ़ होती है।

यह विकास पीएमएमएसवाई के अंतर्गत गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की क्षमता बढ़ाने के लिए भारत सरकार के निरंतर प्रयासों के अनुरूप है। उल्लेखनीय है कि 27 अक्टूबर 2025 को माननीय केंद्रीय गृह मंत्री एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मुंबई के मझगांव डॉक में डीप सी फिशिंग वेसल्सका उद्घाटन किया था। इस अवसर पर माननीय गृह मंत्री ने सहकारी क्षेत्र की बदलावकारी क्षमता का उपयोग करते हुए ब्लू इकोनॉमी को सशक्त बनाने और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को आगे बढ़ाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई थी। वर्तमान स्वीकृति पुदुचेरी में सहकारी-नेतृत्व वाले डीप-सी फिशिंग विस्तार को सक्षम बनाकर इस राष्ट्रीय प्रयास में योगदान देती है।

पृष्ठभूमि

देशभर में मत्स्य सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के निरंतर प्रयासों के तहत, मत्स्य विभाग ने स्मार्ट और एकीकृत मत्स्य बंदरगाहों के प्रबंधन में सहकारी भागीदारी बढ़ाने के लिए संरचित तंत्र शुरू किए हैं। विश्व मत्स्य दिवस, 21 नवंबर 2025 को मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के माननीय राज्य मंत्री प्रो. एस. पी. सिंह बघेल और श्री जॉर्ज कुरियन ने स्मार्ट और एकीकृतमत्स्य बंदरगाहों के विकास एवं प्रबंधन पर मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। यह एसओपी स्पष्ट, पारदर्शी लीज़िंग और भागीदारी ढांचे प्रदान करती है, जिससे सहकारी संस्थाएं बंदरगाह सुविधाओं और संबंधित घटकों के संचालन में अधिक भूमिका निभा सकें, तथा निष्पक्ष पहुंच, जवाबदेही और बेहतर शासन सुनिश्चित हो।राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर बंदरगाह प्रबंधन संरचनाओं को अनुकूलित करने और सफल 'मुनंबम फिशिंग हार्बर' उदाहरण जैसे सहकारी-नेतृत्व वाले मॉडल को बढ़ावा देने के लिए भी सशक्त बनाया गया है।

इन कदमों के पूरक रूप में, मत्स्य विभाग और सहकारिता मंत्रालय के बीच एक संयुक्त कार्यबल देशभर में मत्स्य सहकारी समितियों को सुदृढ़ करने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है, जिसका उद्देश्य संस्थागत क्षमता में सुधार, अवसंरचना तक पहुंच बढ़ाना और सहकारी-नेतृत्व वाले मॉडलों के माध्यम से मछुआरा समुदायों के लिए नए अवसर पैदा करना है।

समृद्ध और समावेशी ब्लू इकोनॉमी के विज़न को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारत सरकार ने 04.11.2025 को विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में मत्स्य संसाधनों के सतत उपयोगके नियम अधिसूचित किए हैं। ये नियम गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के संचालन और तकनीकी रूप से उन्नत जहाजों के प्रबंधन के लिए मछुआरा सहकारी समितियों और मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों (FFPOs) को प्राथमिकता देते हैं। ईईजेड नियम न केवल केवल गहरे समुद्र में मछली पकड़ने की सुविधा प्रदान करते हैं बल्कि मूल्यवर्धन,पता लगाने की क्षमता (ट्रेसबिलिटी) और प्रमाणन पर जोर देकर समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने में भी योगदान देते हैं।

मत्स्य पालन क्षेत्र भारत के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में अहम  स्थान रखता है, जो विशेषकर तटीय और वंचित समुदायों सहित लगभग तीन करोड़ आजीविकाओं का समर्थन करता है। सनराइज सेक्टरयानि उदीयमान क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने, निर्यात को प्रोत्साहित करने, अवसंरचना विस्तार और प्रौद्योगिकी अपनाने पर केंद्रित नीतिगत सुधारों के चलते लगातार प्रगति हो रही है।

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पीके/ केसी/ केजे/डीए


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