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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अस्थिर निर्भरता से बचने के लिए भारत को पूंजी-प्रधान फ्रंटियर मॉडल के बजाय विकेंद्रीकृत और एप्लीकेशन-आधारित सिस्टम को प्राथमिकता देनी चाहिए


आर्थिक समीक्षा 2025-26, बड़े पैमाने पर  कम खर्चीले और वास्तविक दुनिया के उपयोग का लक्ष्य रखने की वकालत करती है

भारत का दृष्टिकोण एआई को अपनी स्ट्रक्चरल वास्तविकताओं—पूंजी, ऊर्जा, संस्थागत क्षमता और बाजार की गहराई—के अनुरूप ढालने का इरादा रखता है

नेशनल एआई मिशन लोकल क्रिएटिविटी को कम किए बिना शेयर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और वित्त पोषण प्रदान करके विविध एआई-समाधानों को बड़े पैमाने पर विस्तारित कर सकता है

स्थानीय नवाचारकर्ता, नगर निकाय, स्टार्टअप और सामुदायिक संस्थान, तत्काल और प्रासंगिक समस्याओं को हल करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं

भाषा और वॉइस-फर्स्ट एआई सिस्टम उन आबादी तक डिजिटल सेवाओं की पहुँच बढ़ा रही हैं, जो ऐतिहासिक रूप से वंचित रही हैं

आर्थिक समीक्षा 2025-26 भारत के एआई इकोसिस्टम के लिए आगे का रास्ता दिखाता है

प्रविष्टि तिथि: 29 JAN 2026 2:14PM by PIB Delhi

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में आज प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2025-26, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल एक प्रतिष्ठा की तकनीकी दौड़ के बजाय एक आर्थिक रणनीति के रूप में मान्यता देती है। समीक्षा इस बात का परीक्षण करती है कि एआई किस प्रकार वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया आकार दे रहा है और तेजी से तकनीकी बदलावों एवं निरंतर अनिश्चितता के माहौल में भारत के लिए एक व्यावहारिक रणनीति की रूपरेखा तैयार करती है।

आर्थिक समीक्षा अपने समर्पित चैप्टर में इस बात पर जोर देती है कि भारत में एआई का उपयोग आर्थिक रूप से व्यावहारिक और सामाजिक रूप से उत्तरदायी होना चाहिए। यह एक बॉटम-अप, बहु-क्षेत्रीय और विशिष्ट दृष्टिकोण की वकालत करती है, जो सहयोग और साझा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ओपन और इंटरऑपरेबल प्रणालियों पर आधारित हो। यह दृष्टिकोण भारत की मानव पूंजी, डेटा विविधता और संस्थागत समन्वय की शक्तियों के अनुरूप है।

भारत में एआई की मांग काल्पनिक या फ्रंटियर उपयोगों के बजाय वास्तविक दुनिया की समस्याओं से उभर रही है। स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शहरी प्रबंधन, शिक्षा, आपदा तैयारी और सार्वजनिक प्रशासन के उदाहरण देते हुए, समीक्षा उन एआई प्रणालियों की बढ़ती मांग को रेखांकित करती है जो स्थानीय हार्डवेयर पर काम करती हैं और कम संसाधनों वाले परिवेश में संचालित होती हैं। बीमारियों की शुरुआती जांच और सटीक वॉटर मैनेजमेंट से लेकर, किसानों की बाजार तक पहुंच, क्लासरूम एनालिटिक्स और क्षेत्रीय भाषा इंटरफेस तक—एआई का इस्तेमाल वहां उभर रहा है जहां यह लागत कम करता है और स्ट्रक्चरल कमियों की भरपाई करता है। ये इस्तेमाल भारत के आर्थिक और सामाजिक माहौल के हिसाब से बनाए गए किफ़ायती, एप्लीकेशन-फोकस्ड एआई सॉल्यूशन के लिए एक बड़े और स्केलेबल मार्केट का संकेत देते हैं।

समीक्षा का मुख्य ध्यान एआई को अपनाने की प्रक्रिया को भारत की संरचनात्मक वास्तविकताओं—जैसे पूंजी की उपलब्धता, एनर्जी की कमी, संस्थागत क्षमता और बाजार की गहराई के साथ जोड़ने पर है, ताकि तकनीकी विकल्प अस्थिर निर्भरता पैदा करने के बजाय दीर्घकालिक विकास को मजबूत करें।

वैश्विक एआई विकास कंप्यूट, वित्त, डेटा और मानक-निर्धारण की शक्ति तक पहुंच में स्ट्रक्चरल असमानताओं द्वारा आकार ले रहा है, इसलिए आर्थिक समीक्षा इन असंतुलनों को यथार्थवादी नीति बनाने के लिए आवश्यक मानती है। इस संदर्भ में, पसंदीदा मार्ग बड़े, केंद्रीकृत प्रणालियों के बजाय विकेंद्रीकृत और अनुप्रयोग-संचालित एआई पर जोर देता है। विभिन्न क्षेत्रों में तैनात छोटे, कार्य-विशिष्ट मॉडल नवाचार को अधिक समान रूप से प्रसारित करने, फर्मों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करने और भारत के विविध आर्थिक परिदृश्य में बेहतर फिट बैठने की अनुमति देते हैं। समीक्षा ओपन और इंटरऑपरेबल एआई प्रणालियों को एक फोर्स मल्टीप्लायर मानती है।

एआई-युग में शिक्षा और प्रशिक्षण की प्राथमिकताओं को विस्तार देते हुए, समीक्षा संकीर्ण तकनीकी विशेषज्ञता के बजाय तर्क, पठन, निर्णय क्षमता, संचार और अडैप्टेबिलिटी जैसी आवश्यक बुनियादी क्षमताओं की ओर बढ़ने की आवश्यकता पर बल देती है। यह दृष्टिकोण कार्यस्थलों और सार्वजनिक प्रणालियों में एआई के इंटीग्रेट को सुगम बनाएगा।

एआई के डेटा गवर्नेंस पर विस्तार से चर्चा करते हुए, समीक्षा इस बात पर जोर देती है कि इसे अलगाव के बजाय जवाबदेही और मूल्य सृजन के इर्द-गिर्द तैयार किया जाना चाहिए। वैश्विक इंटरऑपरेबिलिटी बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करने के लिए कि आर्थिक लाभ घरेलू स्तर पर प्राप्त हों, कठोर लोकलाइज़ेशन की तुलना में पारदर्शिता और ऑडिट क्षमता के साथ जुड़े विश्वसनीय डेटा प्रवाह को अधिक प्रभावी माना गया है। रेगुलेटरी डिज़ाइन तय कंट्रोल के बजाय आनुपातिक, जोखिम-आधारित दृष्टिकोण का पक्ष लेता है। संभावित नुकसान और प्रणालीगत महत्व के साथ उत्तरदायित्व बढ़ते जाते हैं, जिससे निजी प्रोत्साहनों को व्यापक आर्थिक और सामाजिक उद्देश्यों के साथ जोड़ते हुए नवाचार को जारी रखने की अनुमति मिलती है।

समीक्षा इस बात को दोहराती है कि भारत की एआई रणनीति को सावधानीपूर्वक क्रमबद्ध किया जाना चाहिए ताकि समय से पहले किसी तकनीकी बंधन या रेगुलेटरी ओवररीच से बचा जा सके। इसका उद्देश्य पहले समन्वय, फिर क्षमता और अंत में बाध्यकारी नीतिगत प्रभाव बनाना है, जिससे संस्थानों और बाजारों को एक साथ विकसित होने का अवसर मिले।

इस चैप्टर में समीक्षा भारत के आर्थिक संदर्भ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एआई के प्रति विकास-उन्मुख दृष्टिकोण, एआई के लिए मानव पूंजी की भूमिका, एआई-सुरक्षा और जोखिमों के साथ-साथ गवर्नेंस, संस्थागत संरचना और डेटा को एक रणनीतिक संसाधन के रूप में विस्तार से बताती है, जिसके बाद भारत के एआई भविष्य के लिए एक चरणबद्ध रोडमैप प्रस्तुत किया गया है।

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इकोसिस्टम

समीक्षा देशों, कंपनियों, क्षमताओं और मूल्य श्रृंखला के चरणों में एआई इकोसिस्टम के भीतर मौजूद असमानताओं और ट्रेड-ऑफ पर विचार करती है। ये असमानताएं किसी स्ट्रक्चरल नुकसान का संकेत नहीं देतीं, बल्कि उन सीमाओं की पहचान करती हैं जिनके भीतर एक व्यावहारिक और सतत एआई रणनीति बनाई जानी चाहिए, ताकि समझौतों के प्रति सचेत रहते हुए एआई से आर्थिक और सामाजिक लाभ को अधिकतम किया जा सके।

फ्रंटियर मॉडल के विकास और एप्लीकेशन-लेड डेवलपमेंट के बीच क्षमता में असमानता भारत से यह मांग करती हैं कि वह घरेलू आर्थिक प्राथमिकताओं के अनुरूप डोमेन-विशिष्ट एआई प्रणालियों की ओर संसाधनों को अधिक प्रभावी ढंग से तैनात करे। कैपिटल-लेबर ट्रेडऑफ पैमाने बनाम समावेशिता के बीच की बहस को विस्तार देता है, जो इस चुनौती को स्वीकार करता है कि—एआई के प्रसार की गति को इस तरह कैसे नियंत्रित किया जाए जिससे श्रम संवर्धन को बढ़ावा मिले और केवल बड़े पैमाने के बजाय एक समावेशी दृष्टिकोण।

ओपन या प्रोप्रायटरी मॉडलों की लागत, नियंत्रण और निर्भरता एआई मॉडलों के स्वामित्व और गवर्नेंस पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है। समीक्षा खुलेपन और उत्तरदायित्वपूर्ण प्रबंधन के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता पर जोर देती है, ताकि साझा नवाचार का लाभ उठाते हुए यह सुनिश्चित किया जा सके कि घरेलू डेटा और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से उत्पन्न आर्थिक मूल्य भारत के भीतर ही रहे, न कि विदेशों में चली जाए। केंद्रीकृत विस्तार और वितरित दक्षता के बीच का समझौता छोटे, कार्य-विशिष्ट मॉडलों के पक्ष को मजबूत करता है जो सीमित हार्डवेयर और विकेंद्रीकृत कंप्यूट नेटवर्क पर चल सकते हैं। यह स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी और वैश्विक नवाचार नेटवर्क के साथ निरंतर एकीकरण पर जोर देता है ताकि उस खुलेपन को बनाए रखा जा सके जो क्षमता बढ़ाता है, साथ ही महत्वपूर्ण कार्यों को बाहरी मुश्किलों झटकों से सुरक्षित रखा जा सके।

 

भारत में स्थानीय प्रतिभा और किफायती एआई

भारत की एआई की कहानी पहले से ही ज़मीनी स्तर से आगे बढ़ रही है। स्थानीय नवाचारकर्ता, नगर निकाय, स्टार्टअप और सामुदायिक संस्थान ऐसी समस्याओं को हल करने के लिए एआई का उपयोग कर रहे हैं जो उनके समुदायों के लिए तात्कालिक और प्रासंगिक हैं। स्वास्थ्य, कृषि, शिक्षा, शहरी प्रबंधन और आपदा तैयारी जैसे क्षेत्रों में एआई के बहु-क्षेत्रीय एप्लीकेशन मौजूद हैं।

    • दक्षिण भारत में नॉन-इनवेसिव एआई-इनेबल्ड थर्मल इमेजिंग टूल्स कम संसाधनों वाली जगहों पर ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग को संभव बना रहे हैं।
    • पोर्टेबल और कम लागत वाले एआई-असिस्टेड ओरल कैंसर स्क्रीनिंग डिवाइस पूर्वी भारत के प्राइमरी हेल्थकेयर सेंटर्स में शुरुआती पहचान को संभव बना रहे हैं।
    • एआई-इनेबल्ड एग्रीकल्चरल नेटवर्क 12 राज्यों में 1.8 मिलियन किसानों के लिए मार्केट एक्सेस, कीमत की जानकारी और लॉजिस्टिकल एफिशिएंसी में सुधार कर रहे हैं।
    • एआई अपनाने के लिए भारत के अप्रोच में MEiTY के तहत भाषिनी और आईआईटी मद्रास द्वारा विकसित AI4Bharat जैसी पहल भी शामिल हैं। भाषा और वॉइस-फर्स्ट एआई सिस्टम डिजिटल सेवाओं की पहुंच बढ़ा रहे हैं।

नेटिव भाषाओं में बातचीत को बढ़ावा देने और कम लागत वाले डिवाइस पर प्रभावी ढंग से काम करने से, ये किफ़ायती एआई तरीके डिसेंट्रलाइज़्ड, प्रॉब्लम-ड्रिवन होने और लोकल जरूरतों में शामिल होने के साथ-साथ स्केल को इन्क्लूजन के साथ जोड़ते हैं।

भारत का राष्ट्रीय एआई मिशन साझा इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टैंडर्ड, गवर्नेंस फ्रेमवर्क और फंडिंग देकर लोकल क्रिएटिविटी को कम किए बिना अलग-अलग एआई-सॉल्यूशंस को बड़े पैमाने पर अपनाने में मदद कर सकता है।

 

एआई के प्रति एक विकास-उन्मुख दृष्टिकोण

समीक्षा भारत के स्वयं के स्वदेशी एआई विकास की आवश्यकता पर बल देती है। एआई इकोसिस्टम का अभी भी पर्याप्त रूप से नया होना भारत के लिए एक अवसर पैदा करता है, जिससे वह अपने कार्यबल के लिए अधिक मूल्य-सृजन करने वाले और गरिमापूर्ण रोजगार के अवसर तैयार कर सके।

इसके अलावा, समीक्षा इस बात पर प्रकाश डालती है कि वैश्विक जीपीयू आपूर्ति श्रृंखला में होने वाले घटनाक्रम एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की दीर्घकालिक गति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्नत कंप्यूट तक पहुंच में आपूर्ति-पक्ष के लचीलेपन को बढ़ाने वाले उपायों को, वित्त तक पहुंच बढ़ाने और एआई के घरेलू विकास को प्रोत्साहित करने वाले पारंपरिक नीतिगत साधनों का पूरक होना चाहिए। भारत को वैश्विक कंप्यूट तक विविध और लचीली पहुंच पर निर्भर रहने की आवश्यकता है।

इंडिया एआई मिशन के तहत सरकार द्वारा संचालित और समुदाय द्वारा प्रबंधित एक मंच डेवलपर्स, शोधकर्ताओं और उद्यमों को सहयोग के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी स्थान प्रदान करेगा। निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी प्रोत्साहित किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्र-विशिष्ट स्वदेशी एआई के विकास को बढ़ावा मिले और भारत दुनिया के आईटी सेक्टर के बैक ऑफिस से बदलकर एआई के फ्रंट ऑफिस में से एक बन सके। इस बॉटम-अप का नेतृत्व 'AI-OS' पहल के तहत किया जा सकता है। भारत एआई अनुसंधान आउटपुट में शीर्ष वैश्विक योगदानकर्ताओं में शामिल है और एआई के क्षेत्र में तकनीकी टैलेंट का एक बड़ा पूल है, साथ ही देश के पास उच्च स्तर का एआई-लिटरेट लेबर फोर्स भी है।

देश की विविधता और विशालता स्वास्थ्य, कृषि, वित्त, शिक्षा और सार्वजनिक प्रशासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में विविध घरेलू डेटासेट तैयार करने की संभावना का सुझाव देती है।

गवर्नेंस, संस्थागत संरचना और डेटा

इनोवेशन और एप्लीकेशन नियामक विकास की तुलना में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए समीक्षा नीति निर्माताओं से एक नपे-तुले और त्वरित प्रतिक्रिया का आह्वान करती है। भारत में एआई अपनाने के लिए नियामक डिजाइन को भारत के व्यापक सामाजिक-आर्थिक संदर्भ के साथ एकीकृत करने का प्रयास करना चाहिए, जिसमें हमारे श्रम बाजार की वास्तविकताओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि एआई मानवता को प्रतिस्थापित करने के बजाय उसकी सेवा करे।

 

भारत के लिए एआई इकोनॉमिक काउंसिल

गवर्नेंस काउंसिल से अलग, एआई इकोनॉमिक काउंसिल का उद्देश्य न केवल तकनीकी अनिवार्यता के साथ, बल्कि नैतिक अनिवार्यताओं और भारत की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं के प्रति संवेदनशील अनिवार्यताओं के साथ काम करना है। यह एक कोऑर्डिनेटिंग अथॉरिटी के रूप में कार्य करेगी, जो संसाधन की बाधाओं और विकास की प्राथमिकताओं के बीच सामंजस्य बिठाते हुए, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल को भारत के शिक्षा और स्किलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के साथ जोड़ने के लिए जिम्मेदार होगी। ऐसी संस्था के लिए मुख्य गवर्नेंस सिद्धांत निम्नलिखित होंगे:

  1. मानव प्रधानता और आर्थिक उद्देश्य
  2. डिज़ाइन द्वारा लेबर-मार्केट संवेदनशीलता
  3. गति से ज़्यादा सीक्वेंसिंग
  4. टेक्नोलॉजी और मानव पूंजी का सह-विकास
  5. सार्वजनिक हित की सुरक्षा और नैतिक अनिवार्य तत्व जिन पर समझौता करना

एआई नीति में श्रम की वास्तविकताओं और सामाजिक स्थिरता की प्राथमिकताओं को शामिल करके, यह संस्था सुनिश्चित करेगी कि एआई रोजगार और काम की गरिमा को कम किए बिना उत्पादकता को बढ़ावा दे।

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एआई के लिए मानव पूंजी

समीक्षा अनुभवात्मक शिक्षण, अनुभव निर्माण के शुरुआती अवसर, लचीले शिक्षा मार्ग और मानव-केंद्रित कौशल को मजबूत करने पर जोर देती है। समीक्षा का आह्वान है कि औपचारिक शिक्षा और कार्य अनुभव को एक-दूसरे से अलग व्यवस्था के रूप में देखने की आवश्यकता नहीं है। भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड को एक सक्षम कार्यबल में बदलने के लिए 'अर्न एंड लर्न इनिशिएटिव' जैसे सिस्टम को संस्थागत बनाने की आवश्यकता है। इस मार्ग को निजी क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा मिलकर तैयार किया जा सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 इसी दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इसके अतिरिक्त, व्हाइट-कॉलर वर्कस्पेस से बाहर की नौकरियों का एक व्यापक सेक्टोरल मैपिंग करने की आवश्यकता है। उदाहरण के तौर पर, नर्सिंग और वृद्धावस्था देखभाल में कर्मचारियों की कमी, इन क्षेत्रों में कुशल श्रम की अतिरिक्त मांग की संभावना को उजागर करती है।

एआई सुरक्षा और जोखिम

समीक्षा, MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) के गवर्नेंस गाइडलाइंस के तहत प्रस्तावित एक 'एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट' पर जोर देती है, जो उभरते जोखिमों, संभावित नियामक कमियों का विश्लेषण करेगा, एआई सुरक्षा मुद्दों पर समन्वय करेगा और जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करेगा। एआई मॉडलों का समय-समय पर परिदृश्य-आधारित परीक्षण और रेड-टीमिंग संस्थागत बनाया जाना चाहिए।

समीक्षा यह सुझाव देती है कि यूनाइटेड किंगडम के एआई सिक्योरिटी इंस्टीट्यूट और अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्टैंडर्ड्स एंड टेक्नोलॉजी जैसे संस्थानों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग, उच्च-जोखिम वाले मॉडलों के संयुक्त मूल्यांकन और कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे तक साझा पहुंच को सक्षम बनाएगा। इससे एआई सुरक्षा मानकों की ग्लोबल इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ेगी। समीक्षा आगे यह स्वीकार करती है कि व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा को मूल में रखे बिना, सुरक्षित या मानव-केंद्रित एआई की कोई भी अवधारणा विश्वसनीय नहीं है।

भारत के ‘एआईभविष्य के लिए रोडमैप

समीक्षा भारत के लिए एक केंद्रीय चुनौती का वर्णन करती है - वह देश में क्या बनाता है, दुनिया भर से क्या लेता है, किस चीज़ को जल्दी रेगुलेट करता है, और किस चीज़ को जानबूझकर विकसित होने देता है। पिछली बातों से सीखने का लाभ भारत को ऐसे एआई सिस्टम डिजाइन करने में मदद देता है जो शुरू से ही संसाधन-कुशल हों और सार्वजनिक उद्देश्यों के साथ संरेखित हों, जिसमें विनियमन को तकनीक की तैनाती के साथ क्रमिक रूप से लागू किया जाए। यह देश को अधिक मज़बूत और समावेशी एआई पथ पर आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है।

भारत की ताकत एप्लीकेशन-आधारित इनोवेशन, घरेलू डेटा का उत्पादक उपयोग, मानव पूंजी की गहराई और सार्वजनिक संस्थानों की वितरित प्रयासों को समन्वित करने की क्षमता में निहित है। केवल पैमाने की संकीर्ण खोज के बजाय ओपन और इंटरऑपरेबल सिस्टम, क्षेत्र-विशिष्ट मॉडल और साझा फिजिकल एवं डिजिटल बुनियादी ढांचे पर आधारित बॉटम-अप रणनीति मूल्य सृजन का अधिक विश्वसनीय मार्ग प्रदान करती है।

रेगुलेशन, डेटा गवर्नेंस और सुरक्षा को डिप्लॉयमेंट के बाद नहीं, बल्कि उसके साथ-साथ विकसित होना होगा। किए गए विकल्पों के आधार पर, एआई व्यापक-आधारित उत्पादकता और गरिमापूर्ण कार्य के लिए एक उपकरण हो सकता है। भारत का कार्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई का विकास उसकी विकास प्राथमिकताओं और आर्थिक मजबूती हासिल करने की उसकी दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा के अनुरूप रहे।

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एनबी/एमजी/केसी/हिन्दी इकाई


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