आयुष
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परंपरा से प्रौद्योगिकी तक : आयुष गणतंत्र दिवस झांकी भारत के समग्र स्वास्थ्य दृष्टिकोण को प्रदर्शित करने के लिए तैयार है

प्रविष्टि तिथि: 22 JAN 2026 9:22PM by PIB Delhi

गणतंत्र दिवस परेड 2026 में आयुष की झांकी 'आयुष का तंत्र, स्वास्थ्य का मंत्र' विषय के तहत भारत के शाश्वत स्वास्थ्य ज्ञान को समकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा के साथ सहजता से एकीकृत करते हुए एक सम्मोहक कहानी प्रस्तुत करने के लिए तैयार है। आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना पर आधारित यह झांकी, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को सुदृढ़ करने और उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य ढांचे में समाहित करने में राष्ट्रीय आयुष मिशन (एनएएम) की भूमिका को उजागर करती है।

प्रस्तुति के केंद्र में पारंपरिक ज्ञान और प्रकृति का एक प्रतीकात्मक संगम होगा, जिसे औषधीय पौधों के हरे-भरे टीले के चारों ओर बैठे आचार्य चरक, आचार्य पतंजलि और आचार्य अगस्त्य के त्रि-मूर्तिकला प्रतिनिधित्व के माध्यम से दर्शाया जाएगा। इस शक्तिशाली चित्रण का उद्देश्य मानव जीवन और प्राकृतिक दुनिया के बीच सद्भाव से उभरते आयुष के मूलभूत दर्शन को प्रतिबिंबित करना है।

आयुष मंत्रालय द्वारा परिकल्पित यह झांकी स्वास्थ्य, आत्मनिर्भरता और सभ्यतागत ज्ञान के माध्यम से भारत की राष्ट्र निर्माण यात्रा का प्रतीक है। भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को समकालीन सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा में एकीकृत करने को प्रदर्शित करके यह झांकी दर्शाती है कि कैसे समग्र कल्याण वंदे भारत के विचार का अभिन्न अंग रहा है - प्राचीन भारत से लेकर एक आत्मविश्वासी, भविष्य के लिए तैयार राष्ट्र तक। यह स्वास्थ्य को राष्ट्रीय शक्ति के एक मूलभूत स्तंभ के रूप में रेखांकित करता है और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताओं को पूरा करते हुए अपनी विरासत में निहित एक अनुकूल, समावेशी और आत्मनिर्भर समाज के पोषण के लिए भारत की अटूट प्रतिबद्धता का उत्सव मनाता है।

राष्ट्र निर्माण और वैश्विक स्वास्थ्य में आयुष की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव ने इस बात को रेखांकित किया कि आयुष स्वास्थ्य के प्रति भारत के समग्र दृष्टिकोण का प्रतिनिधित्व करता है, एक ऐसा दृष्टिकोण जो संतुलन, रोकथाम और कल्याण को बढ़ावा देता है। गणतंत्र दिवस की झांकी यह दर्शाती है कि आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से प्रेरित हमारी पारंपरिक पद्धतियां किस प्रकार समाज को सशक्त बना रही हैं, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत कर रही हैं और आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों का विश्वसनीय समाधान पेश कर रही हैं। आज आयुष भारत की अपनी विरासत में विश्वास और दुनिया के लिए एक स्वस्थ भविष्य को आकार देने में उसके नेतृत्व का प्रतीक है। यह झांकी साक्ष्य-आधारित, जन-केंद्रित और निवारक स्वास्थ्य सेवा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जो आयुष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में स्थापित करती है।

झांकी की नीतिगत और संस्थागत नींव पर विचार करते हुए आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि गणतंत्र दिवस की झांकी यह दर्शाती है कि आयुष किस प्रकार परिकल्पना से कार्यान्वयन की ओर बढ़ा है, जिसमें पारंपरिक पद्धतियों को भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में व्यवस्थित रूप से एकीकृत किया गया है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन, शिक्षा, अनुसंधान और डिजिटल प्लैटफॉर्म पहुंच और विश्वसनीयता को सुदृढ़ किया जा रहा है।

झांकी के पीछे की व्यापक दृष्टि और भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकताओं के साथ इसके तालमेल पर प्रकाश डालते हुए आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव डॉ. कविता जैन ने इस बात पर जोर दिया कि गणतंत्र दिवस परेड 2026 में आयुष मंत्रालय की झांकी भारत की समग्र स्वास्थ्य यात्रा को दर्शाती है-जहां पारंपरिक ज्ञान, प्रकृति और आधुनिक प्रौद्योगिकी जनता की भलाई के लिए काम करती है। राष्ट्रीय आयुष मिशन और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना से प्रेरित होकर आयुष विश्वसनीय संस्थानों और डिजिटल नवाचार के माध्यम से निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक और समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर रहा है। यह झांकी भारत की जीवंत स्वास्थ्य परंपराओं और एक स्वस्थ, आत्मनिर्भर और कल्याण-उन्मुख राष्ट्र के निर्माण में उनकी बढ़ती भूमिका को समर्पित है।

यह वृत्तांत भारत के एक डिजिटल रूप से सशक्त कल्याणकारी लीडर के रूप में उभरने की ओर बढ़ता है, जिसमें ऐसे तत्व शामिल हैं जो एनएएम के प्रौद्योगिकी-संचालित प्लैटफार्मों को उजागर करते हैं जो पहुंच, पारदर्शिता और प्रसार का विस्तार करते हैं। नवजात शिशु की देखभाल के लिए सुप्राजा, बुजुर्गों के स्वास्थ्य के लिए वायोमित्र और विद्यालय स्तर पर आयुष अवधारणाओं को पेश करने वाली आयुर्विद्या जैसी प्रमुख पहलें स्वास्थ्य देखभाल के लिए जीवन-चक्र दृष्टिकोण को रेखांकित करती हैं।

भावपूर्ण कठपुतली कला के माध्यम से अरिषद्वर्ग - छह आंतरिक शत्रुओं - का कलात्मक चित्रण यह दर्शाता है कि आयुष पद्धतियां आंतरिक संतुलन, मानसिक स्पष्टता और समग्र कल्याण को कैसे बढ़ावा देती हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर (आयुष) के माध्यम से समुदाय-आधारित स्वास्थ्य सेवा वितरण को प्रदर्शित किया गया है, जिसमें योग के दृश्य, आमतौर पर इस्तेमाल होने वाली आयुष दवाएं और शरीर-मन-आत्मा के सामंजस्य का प्रतीक ध्यान मुद्रा शामिल है।

इस झांकी में भारत की विविध चिकित्सीय परंपराओं का भी उत्सव मनाया गया है, जिसमें मर्मा, शिरोधारा और कपिंग के त्रि-आयामी भित्तिचित्रों के साथ-साथ दुनिया भर की प्रमुख आयुष पद्धतियों के अग्रदूतों को धन्यवाद दिया गया है। नागरिकों की सहभागिता को बढ़ाने के उद्देश्य से संवादमूलक शुभंकर तत्व आयुष के प्रमुख डिजिटल एप्लीकेशन - वाई-ब्रेक प्रो, डब्ल्यूएचओ एमयोगा, नमस्ते योगा और प्रकृति परीक्षण - का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो निवारक, सहभागी और सुलभ स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा देने में प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका को उजागर करते हैं।

प्रस्तुति का समापन एक सरकारी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज के चित्रण के साथ होता है, जो संस्थागत निरंतरता, शिक्षा और उत्कृष्टता का प्रतीक है - यह भारत के सार्वजनिक स्वास्थ्य और वैश्विक कल्याण नेतृत्व के एक जीवंत, विकसित स्तंभ के रूप में आयुष को सुदृढ़ करता है।

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पीके/केसी/आरकेजे

 


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