जल शक्ति मंत्रालय
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जल शक्ति मंत्रालय, जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग – प्रगति के माध्यम से देश में सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ बना रहा है

प्रविष्टि तिथि: 16 JAN 2026 5:00PM by PIB Delhi

देश के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है जल। यह संसाधन आजीविका, खाद्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य और आर्थिक उत्पादकता को प्रभावित करता है। बढ़ते शहरीकरण, जलवायु परिवर्तनशीलता और विभिन्न प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों की मांगों के साथ,  लचीले और न्यायसंगत जल प्रबंधन ढांचे की आवश्यकता तेजी से महत्वपूर्ण हो गई है। इस संदर्भ में, जल शक्ति मंत्रालय के अधीन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनर्जीवन विभाग राष्ट्रीय महत्व की सिंचाई और नदी विकास पहलों को व्यापक रूप से लागू कर रहा है। इन पहलों का उद्देश्य जल संचय बढ़ाना, सिंचित क्षेत्र का विस्तार करना और दक्षता में सुधार करना है।

इन परियोजनाओं के व्यापक पैमाने, जटिलता और अंतर-सरकारी समन्वय को देखते हुए इनमें भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, पर्यावरण सम्‍बंधी मंजूरी, अंतर-राज्यीय समन्वय, वित्तपोषण, जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन और सामुदायिक सहभागिता शामिल हैं। कई पहलों को सक्रिय शासन और समयबद्ध कार्यान्वयन (प्रगति) मंच के अंतर्गत लाया गया। यह तंत्र माननीय प्रधानमंत्री स्तर पर प्रत्यक्ष समीक्षा को सक्षम बनाता है। इससे समयबद्ध निर्णय लेने, जवाबदेही सुनिश्चित करने और लंबे समय से लंबित जमीनी समस्याओं के समाधान को सुनिश्चित किया जा सकेगा।

प्रगति निगरानी ढांचा पुनर्वास और पुनर्स्थापन, भूमि अधिग्रहण, अंतर-राज्यीय समन्वय, निधि जारी करने की समयसीमा, अनुबंध प्रबंधन और जमीनी स्तर पर आने वाली बाधाओं जैसे कार्यान्वयन सम्‍बंधी मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण रहा है। एकीकृत, समयबद्ध दिशा-निर्देश प्रदान करके और उसके बाद अनुपालन की बारीकी से निगरानी करके, प्रगति ने वर्षों पुरानी अड़चनों को व्यावहारिक समाधानों में परिवर्तित कर दिया है। इससे महत्वपूर्ण सिंचाई और जल संसाधन परिसंपत्तियां निरंतर चालू होने और सेवा वितरण की ओर अग्रसर होना सुनिश्चित हुआ है।

मंत्रालय के परियोजना पोर्टफोलियो में, वर्तमान में पीएमजी प्रणाली पर 93 प्रमुख परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है। इनका कुल निवेश मूल्य लगभग 2.86 लाख करोड़ रुपये है। इनमें से 44,122.94 करोड़ रुपये मूल्य की 44 परियोजनाएं पहले ही चालू हो चुकी हैं और एक प्रगति समीक्षा परियोजना भी शामिल है। इसके अलावा, 2.42 लाख करोड़ रुपये मूल्य की 49 परियोजनाएं कार्यान्वयन के अधीन हैं। इनमें से नौ की समीक्षा माननीय प्रधानमंत्री स्तर पर की जा चुकी है। कुल मिलाकर, 43,583 करोड़ रुपये मूल्य की 10 परियोजनाओं की समीक्षा प्रगति के तहत की गई है, जो बड़े पैमाने पर सिंचाई, नदी विकास और बाढ़ प्रबंधन कार्यों के राष्ट्रीय महत्व को दर्शाती है। परियोजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

परियोजना की स्थिति

परियोजनाओं की कुल संख्या

प्रगति परियोजना की संख्या

परियोजना क्षेत्र

मंजूरी दी गई

44

(44,122.94 करोड़ रुपये)

01

(2685.41 करोड़ रुपये)

कृषि

अपशिष्ट और जल

कार्यान्वयन के अधीन

49

(242220.30 करोड़ रुपये)

09

(40,897.92 करोड़ रुपये)

कृषि

अपशिष्ट और जल

कुल

93

10

-

 

समस्या-समाधान स्तर पर, 93 परियोजनाओं में कुल 126 मुद्दों की पहचान की गई। इनमें से 106 का समाधान हो चुका है। प्रगति द्वारा समीक्षित परियोजनाओं के अंतर्गत आने वाले 14 मुद्दों का समाधान समन्वित अनुवर्ती कार्रवाई के माध्यम से किया गया है। इस सुनियोजित शासन प्रणाली ने उच्च मूल्य वाले सार्वजनिक निवेशों को पूर्णता की ओर सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

प्रगति द्वारा समीक्षित 9 परियोजनाएं महत्वपूर्ण सिंचाई और जल प्रबंधन अवसंरचना को कवर करती हैं। उत्तर कोयल जलाशय परियोजना, गोसीखुर्द परियोजना और सीएडीडब्ल्यूएम कार्य, सुबर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना (झारखंड और ओडिशा), एकीकृत आनंदपुर बैराज परियोजना, सुलवाडे-जम्फाल-कनोली लिफ्ट सिंचाई योजना, लोअर पेढ़ी परियोजना, बेम्बला सिंचाई परियोजना और अरुणा मध्यम सिंचाई परियोजना शामिल हैं। ये परियोजनाएं कई राज्यों में सिंचाई क्षमता का विस्तार करती हैं, मौजूदा कमांड क्षेत्रों को स्थिर करती हैं, सूखा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं और किसानों की आय में वृद्धि करती हैं।

कुल मिलाकर, प्रगति द्वारा समीक्षित परियोजनाओं ने औसतन 73 प्रतिशत की भौतिक प्रगति हासिल की है। इनमें से एक - महाराष्ट्र में बेम्बला सिंचाई परियोजना - अब चालू हो चुकी है।

महाराष्ट्र के बेम्बला सिंचाई परियोजना पर एक केस स्टडी प्रगति के उत्कृष्ट प्रभाव को दर्शाती है, जो इस प्रकार है:

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के अंतर्गत कार्यान्वित और जल शक्ति मंत्रालय के जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा पुनर्जीवन विभाग द्वारा प्रायोजित बेम्बला सिंचाई परियोजना को विदर्भ क्षेत्र में सिंचाई अवसंरचना को सुदृढ़ करने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए 2 अप्रैल 2007 को स्वीकृत किया गया था। महाराष्ट्र के यवतमाल जिले में स्थित और बेम्बला नदी के आसपास केंद्रित इस परियोजना में बाबुलगांव, कलम, रालेगांव और मारेगांव सहित कई तहसीलों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराने की परिकल्पना की गई है और इसे इस क्षेत्र के लिए एक प्रमुख सिंचाई पहल के रूप में परिकल्पित किया गया था।

परियोजना के कार्यान्वयन के दौरान, तीन प्रमुख समस्याओं का सामना करना पड़ा, जो मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, नहरों की लाइनिंग के कार्यों को पूरा करने और वितरण नेटवर्क के अंतर्गत लक्षित सिंचाई क्षमता प्राप्त करने में देरी से सम्‍बंधित थीं। यवतमाल जिले में 47.21 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण लंबित रहा, जबकि खरीफ और रबी सिंचाई चक्रों के दौरान सीमित कार्य समय, प्राकृतिक रेत की कमी और कोविड-19 महामारी के कारण हुई बाधाओं के चलते मुख्य और शाखा नहरों पर लगभग 32 प्रतिशत लाइनिंग का काम अधूरा रह गया। इसके अतिरिक्त, देहानी लिफ्ट सिंचाई योजना के अंतर्गत कुल 6,968 हेक्टेयर में से 1,200 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता प्राप्त करने में भी कार्यान्वयन एजेंसी के साथ लंबे समय से चल रहे संविदात्मक और वित्तीय मुद्दों के कारण देरी हुई।

इस परियोजना की सर्वप्रथम समीक्षा माननीय प्रधानमंत्री द्वारा प्रगति तंत्र के अंतर्गत 25 अक्टूबर 2023 को की गई थी। इस दौरान संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों और महाराष्ट्र सरकार के बीच घनिष्ठ समन्वय के माध्यम से लंबित मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए निर्देश जारी किए गए थे। इसके साथ ही भूमि अधिग्रहण, नहर की लाइनिंग के कार्यों को पूरा करने और ठेकेदार से सम्‍बंधित बाधाओं के समाधान पर विशेष बल दिया गया था।

निरंतर निगरानी और प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई। कुल 112.40 किमी में से 87.70 किमी लाइनिंग का काम पूरा हो चुका है। कई बैचिंग प्लांट की स्थापना और नियमित बहुस्तरीय समीक्षाओं का सहयोग मिला है। देहानी लिफ्ट सिंचाई योजना के संबंध में, उचित प्रक्रिया के बाद खराब प्रदर्शन करने वाले ठेकेदार के साथ अनुबंध समाप्त कर दिया गया, अंतिम संयुक्त माप पूरे कर लिए गए, और शेष सिविल, विद्युत, यांत्रिक और स्वचालन कार्यों के अनुमान तैयार कर जांच के लिए भेज दिए गए, जिससे लंबे समय से चली आ रही कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं को दूर किया जा सका।

प्रगति के नेतृत्व में किए गए केंद्रित पर्यवेक्षण और राज्य अधिकारियों के समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप, परियोजना त्वरित पूर्णता चरण में पहुंच गई और 30 जून 2025 को इसका उद्घाटन किया गया। बेम्बला सिंचाई परियोजना से यवतमाल जिले के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में सिंचाई कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि, कृषि क्षमता में सुधार और सतत ग्रामीण विकास में योगदान की उम्मीद है। इससे किसानों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को ठोस और दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होंगे।

जल शक्ति मंत्रालय की प्रगति के अंतर्गत परियोजनाओं का समग्र रूप से अवलोकन करने पर जल सुरक्षा, ग्रामीण सेवाओं, स्वच्छता सुधार और सुदृढ़ कृषि के प्रति सरकार की समग्र प्रतिबद्धता झलकती है। अवसंरचना विकास को संस्थागत सुदृढ़ीकरण, स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण और प्रौद्योगिकी-आधारित निगरानी के साथ एकीकृत करके, यह दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि निवेश किया गया प्रत्येक रुपया नागरिकों के लिए ठोस परिणाम दे। जल क्षेत्र की परियोजनाओं का उदाहरण दर्शाता है कि प्रगति किस प्रकार शासन को गति प्रदान करने वाले एक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती है-जटिल मुद्दों का समाधान करती है, हितधारकों को एकजुट करती है और कार्यान्वयन की गति को बनाए रखती है। इससे आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं की व्यापक स्तर पर उपलब्धता में सुधार होता है।

बेम्बला जलाशय

बेम्बला राइट बैंक नहर

देहानी एलआईएस पंप हाउस

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पीके/केसी/वीके/जीआरएस


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