इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय
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भारत सरकार द्वारा डीपफेक से निपटने के लिए उठाए गए कदम

Posted On: 04 APR 2025 8:09PM by PIB Delhi

भारत सरकार की नीतियों का उद्देश्य देश के उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह साइबरस्पेस सुनिश्चित करना है। गलत सूचना और डीपफेक की समस्याओं का समाधान करने हेतु केन्द्र सरकार द्वारा की गई प्रमुख नियामक संबंधी पहल इस प्रकार हैं:

  • सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (“आईटी अधिनियम”) और इसके तहत बनाए गए नियमों ने इंटरनेट को गैरकानूनी गतिविधियों से बचाने हेतु एक कानूनी ढांचा तैयार किया है ताकि उपयोगकर्ताओं के बीच सुरक्षा एवं विश्वास सुनिश्चित किया जा सके।
  • आईटी अधिनियम में पहचान की चोरी, छद्मवेश धारण करके धोखाधड़ी, गोपनीयता का उल्लंघन, अश्लील/यौन रूप से स्पष्ट कृत्य वाली सामग्री का प्रकाशन/प्रसारण, बच्चों को यौन रूप से स्पष्ट कृत्य में चित्रित करना/बाल यौन शोषण से संबंधित सामग्री का प्रसारण/ब्राउज़ करना आदि जैसे साइबर अपराध माने जाने वाले विभिन्न अपराधों के लिए सजा का प्रावधान है
  • आईटी अधिनियम और बनाए गए नियम ऐसी किसी भी जानकारी पर लागू होते हैं जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (“एआई”) टूल या किसी अन्य तकनीक का उपयोग करके सृजित की जाती है और जो उपयोगकर्ताओं द्वारा अपराधों को परिभाषित करने के उद्देश्य से स्वयं सृजित की जाती है।
  • भारत के उपयोगकर्ताओं और बड़े पैमाने पर भारतीय इंटरनेट को एआई सहित विभिन्न प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोग से उत्पन्न होने वाले नुकसान से बचाने और देश के कानून के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने हेतु, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ("एमईआईटीवाई") नियमित रूप से प्रौद्योगिकियों के नैतिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उद्योग जगत से संवाद करता है और इनपुट प्राप्त करता है।
  • तदनुसार, केन्द्र सरकार ने संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श के बाद साइबरस्पेस में उभरती विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ संबंधी दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 (“आईटी नियम, 2021”) और आईटी अधिनियम के तहत इसके बाद के संशोधनों को अधिसूचित किया।
  • आईटी नियम, 2021 सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित विविध मध्यस्थों पर विशिष्ट दायित्व डालता है कि वे किसी भी कानून का उल्लंघन करने वाली किसी भी जानकारी को होस्ट, स्टोर या प्रकाशित न करें।
  • वे अपनी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी बाध्य हैं, जिसमें उपयुक्त सरकार द्वारा अधिसूचित या किसी भी गैरकानूनी जानकारी के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों के आधार पर आईटी नियम, 2021 के तहत वर्गीकृत गैरकानूनी जानकारी को हटाने की दिशा में उनकी त्वरित कार्रवाई शामिल है।
  • ऐसी गैरकानूनी जानकारी में ऐसी कोई भी जानकारी शामिल होती है जो अन्य बातों के अलावा, बच्चों के लिए हानिकारक होती है या जो हिंसा भड़काने के इरादे से धर्म या जाति के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देती है, या जो संदेश की उत्पत्ति के बारे में प्राप्तकर्ता को धोखा देती है या गुमराह करती है या जानबूझकर व इरादतन कोई गलत सूचना या जानकारी संचारित करती है जो स्पष्ट रूप से गलत और असत्य या प्रकृति में भ्रामक है, या जो भारत की एकता, अखंडता, रक्षा, सुरक्षा या संप्रभुता, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा है, या जो कुछ समय के लिए लागू किसी भी कानून का उल्लंघन करती है।
  • जहां कोई सूचना आईटी नियम, 2021 के तहत गैरकानूनी के रूप में वर्गीकृत की जाती है, कोई भी उपयोगकर्ता संबंधित मध्यस्थ, जिसके प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसी गैरकानूनी जानकारी जनता को उपलब्ध कराई जाती है, के शिकायत अधिकारी से अनुरोध कर सकता है। ऐसे अनुरोध प्राप्त होने पर, मध्यस्थ को आईटी नियम, 2021 के तहत निर्धारित समयसीमा के भीतर तेजी से कार्रवाई करने की आवश्यकता होती है।
  • इसके अलावा आईटी नियम, 2021 के तहत, सरकार ने शिकायत अपीलीय समितियों की स्थापना की है ताकि उपयोगकर्ताओं और पीड़ितों को शिकायत अधिकारी के निर्णय से असंतुष्ट होने की स्थिति में मध्यस्थों के शिकायत अधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ www.gac.gov.in पर ऑनलाइन अपील करने की सुविधा मिल सके।
  • इस बात को संज्ञान में लेते हुए कि एआई द्वारा संचालित गलत सूचना और डीपफेक के व्यापक प्रसार के जरिए होने वाले नुकसान और आपराधिकता को दूर करने की तत्काल आवश्यकता है, एमईआईटीवाई ने डीपफेक से निपटने के क्रम में पहचानी गई चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए संबंधित उद्योग के हितधारकों/सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के साथ कई परामर्श किए और समय-समय पर सलाह जारी की है, जिसके माध्यम से मध्यस्थों को आईटी नियम, 2021 के तहत उल्लिखित उनके उचित दायित्वों के अनुपालन के बारे में याद दिलाया गया और डीपफेक पर अंकुश लगाने तथा ऑनलाइन हानिकारक कंटेंट को तुरंत हटाने के लिए दुर्भावनापूर्ण “सिंथेटिक मीडिया” और “डीपफेक” सहित गैरकानूनी कंटेंट से निपटने की सलाह दी गई।
  • भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल (सीईआरटी-आईएन) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके दुर्भावनापूर्ण हमलों सहित नवीनतम साइबर खतरों/कमजोरियों के बारे में सतर्क तथा सलाह जारी करता है और कंप्यूटर, नेटवर्क एवं डेटा की सुरक्षा के लिए निरंतर जवाबी उपाय करता है। इस संदर्भ में, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित अनुप्रयोगों से उत्पन्न होने वाले प्रतिकूल खतरों को कम करने के लिए किए जाने वाले सुरक्षा उपायों से जुड़ी एक सलाह मई 2023 में प्रकाशित की गई थी। सीईआरटी-आईएन ने डीपफेक के खतरों और डीपफेक से सुरक्षित रहने के लिए अपनाए जाने वाले उपायों पर नवंबर 2024 में एक सलाह प्रकाशित की है।
  • सीईआरटी-आईएन ने डिजिटल प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित उपयोग और डिजिटल जोखिमों से निपटने के लिए उपयोगकर्ताओं और संगठनों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए निम्नलिखित उपाय किए हैं:
  • सीईआरटी-आईएन नवीनतम साइबर खतरों/कमजोरियों के बारे में सतर्क करता है और सलाह जारी करता है, जिसमें सोशल इंजीनियरिंग, फिशिंग एवं विशिंग अभियान तथा कंप्यूटर, मोबाइल फोन, नेटवर्क एवं डेटा की सुरक्षा के लिए निरंतर उपाय भी शामिल हैं।
  • सीईआरटी-आईएन ने नवंबर 2023 में विभिन्न मंत्रालयों को एक परामर्श जारी किया है, जिसमें संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा या सूचना सहित डिजिटल व्यक्तिगत डेटा या सूचना का विश्लेषण करने वाली सभी संस्थाओं द्वारा साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए किए जाने वाले उपायों की रूपरेखा दी गई है।
  • सीईआरटी-आईएन दुर्भावनापूर्ण प्रोग्रामों का पता लगाने के लिए साइबर स्वच्छता केन्द्र (बॉटनेट क्लीनिंग और मैलवेयर विश्लेषण केन्द्र) का संचालन करता है और उन्हें हटाने के लिए निःशुल्क उपकरण प्रदान करता है, साथ ही नागरिकों एवं संगठनों के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी युक्तियां तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणाली भी प्रदान करता है।
  • सीईआरटी-आईएन वित्तीय क्षेत्र से रिपोर्ट की गई साइबर सुरक्षा की घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने, उन्हें रोकने और कम करने के लिए अपने अधीन कंप्यूटर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल-वित्त क्षेत्र (सीएसआईआरटी-फिन) के संचालन के लिए नेतृत्व प्रदान करता है।
  • उपयोगकर्ताओं के लिए अपने डेस्कटॉप और मोबाइल फोन को सुरक्षित रखने तथा फ़िशिंग हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा संबंधी युक्तियां प्रकाशित की गई हैं।
  • सीईआरटी-आईएन नियमित रूप से साइबर हमलों और साइबर धोखाधड़ी के संबंध में जागरूकता और नागरिकों की संवेदनशीलता के लिए विभिन्न गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। सीईआरटी-आईएन हर साल अक्टूबर के दौरान साइबर सुरक्षा जागरूकता माह (एनसीएसएएम), हर साल फरवरी महीने के पहले मंगलवार को सुरक्षित इंटरनेट दिवस, हर साल 1 से 15 फरवरी तक स्वच्छता पखवाड़ा और हर महीने के पहले बुधवार को साइबर जागरूकता दिवस (सीजेडी) मनाता है, जिसमें भारत के नागरिकों के साथ-साथ तकनीकी साइबर समुदाय के लिए विभिन्न कार्यक्रम और गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। सीईआरटी-आईएन ने एनसीएसएएम 2024 के दौरान सरकार और उद्योग जगत के भागीदारों के साथ मिलकर क्विज़, वेबिनार, कैप्चर द फ्लैग इवेंट जैसी कई जागरूकता गतिविधियां आयोजित कीं, जिनकी थीम थी “सतर्क नागरिक, सुरक्षित हमारा विश्व”।
  • इसके अलावा, गृह मंत्रालय ("एमएचए") ने साइबर अपराधों से व्यापक एवं समन्वित तरीके से निपटने हेतु एलईए के लिए एक ढांचा तथा इकोसिस्टम प्रदान करने हेतु भारतीय साइबर अपराध समन्वय केन्द्र ("आई4सी") की स्थापना की है। एमएचए ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी सहित सभी प्रकार के साइबर अपराधों की रिपोर्ट करने में जनता को सक्षम करने हेतु राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (https://cybercrime.gov.in) की शुरुआत भी की है।
  • इस पोर्टल पर रिपोर्ट की गई साइबर अपराध की घटनाओं को कानून के प्रावधानों के अनुसार आगे की कार्यवाही के लिए संबंधित राज्य/केन्द्र-शासित प्रदेश की कानून प्रवर्तन एजेंसी को भेजा जाता है। इस पोर्टल में वित्तीय धोखाधड़ी से संबंधित शिकायतें दर्ज करने के लिए अलग-अलग तंत्र हैं। ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने में सहायता प्राप्त करने के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर ‘1930’ चालू किया गया है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी राज्यमंत्री श्री जितिन प्रसाद ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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