मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय
प्रधानमंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना
Posted On:
02 APR 2025 3:14PM by PIB Delhi
मत्स्यपालन विभाग, मत्स्यपालन पशुपालन और डेयरी मंत्रालय वर्तमान में चल रही प्रधान मंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत प्रधान मंत्री मत्स्य किसान समृद्धि सह योजना (पीएम-एमकेएसएसवाई) नामक एक नई केंद्रीय क्षेत्र उप-योजना को वित्त वर्ष 2023-24 से वित्त वर्ष 2026-27 तक चार वर्षों की अवधि के लिए 6000 करोड़ रुपए के अनुमानित परिव्यय पर कार्यान्वित कर रहा है । अब तक पीएम-एमकेएसएसवाई के अंतर्गत 11.84 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।
पीएम-एमकेएसएसवाई का घटक 1-ख, जल कृषि किसानों को 4 हेक्टेयर जल विस्तार क्षेत्र तक के फार्म साइज़ के लिए बीमा की खरीद के लिए एकमुश्त प्रोत्साहन (वन टाईम इनसेनटिव) प्रदान करता है। 'एकमुश्त प्रोत्साहन' जल कृषि फार्म के जल विस्तार क्षेत्र के प्रति हेक्टेयर 25000 रुपए की सीमा के अधीन प्रीमियम लागत के 40% की दर से प्रदान किया जाता है। 4 हेक्टेयर जल विस्तार क्षेत्र के फार्म साइज़ तक प्रत्येक किसान को अधिकतम देय प्रोत्साहन 100,000 रुपए है। फार्म्स के अलावा अन्य गहन जल कृषि जैसे कि केज कल्चर, री-
सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस), बायो-फ्लोक, रेसवे आदि के लिए देय प्रोत्साहन प्रीमियम का 40% है। अधिकतम देय प्रोत्साहन 1 लाख रुपए है और अधिकतम पात्र इकाई आकार 1800 मी3 है। 'एकमुश्त प्रोत्साहन' का उपरोक्त लाभ केवल एक क्रॉप यानी एक क्रॉप साइकल के लिए खरीदे गए जलकृषि बीमा के लिए प्रदान किया जाता है। अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिला लाभार्थियों को सामान्य श्रेणियों के लिए देय प्रोत्साहन का 10% अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान किया जाएगा।
पीएम-एमकेएसएसवाई का घटक 3, माप योग्य मापदंडों के एक सेट के लिए मत्स्य और मात्स्यिकी उत्पादों में सुरक्षा और गुणवत्ता आश्वासन प्रणालियों को अपनाने के लिए मात्स्यिकी सूक्ष्म और लघु उद्यमों को निष्पादन अनुदान के रूप में वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करता है। निष्पादन अनुदान की मात्रा निम्नानुसार दी जाती है:
(i) सामान्य श्रेणी को सूक्ष्म उद्यम के लिए कुल निवेश का 25% या, 35 लाख रुपए, जो भी कम हो, और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म उद्यमों के लिए कुल निवेश का 35% या, 45 लाख रुपए, जो भी कम हो। (ii) सामान्य श्रेणी को लघु उद्यम के लिए कुल निवेश का 25% या 75 लाख रुपए, जो भी कम हो, और अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और महिला स्वामित्व वाले लघु उद्यमों के लिए कुल निवेश का 35% या 100 लाख रुपए, जो भी कम हो। (iii) ग्राम स्तरीय संगठनों और स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), मत्स्य किसान उत्पादक संगठनों/फिश फार्मर प्रोड्यूसर ओरगेनाईज़ेशन (एफएफपीओ) और सहकारी समितियों के संघों के लिए, कुल निवेश का 35% या 200 लाख रुपए, जो भी कम हो।
यह जानकारी मत्स्यपालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री, श्री जॉर्ज कुरियन ने आज राज्य सभा में एक लिखित उत्तर में दी।
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