Print
XClose
पत्र सूचना कार्यालय
भारत सरकार
इस्पात मंत्रालय
11-जनवरी-2020 17:08 IST

श्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्पात क्षेत्र में पूर्वोदय लॉन्च किया; कहा कि मिशन पूर्वोदय इस्पात क्षेत्र के त्वरित विकास के द्वारा पूर्वोत्तर भारत की वृद्धि की कहानी लिखेगा

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस और इस्पात मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज पश्चिम बंगाल के कोलकाता में पूर्वोदयः एकीकृत स्टील हब के माध्यम से पूर्वी भारत का त्वरित विकास लॉन्च किया।

श्री प्रधान ने इस अवसर पर कहा कि "चाहे वह हमारा स्वतंत्रता आंदोलन हो या सामाजिक सुधार, पूर्वी भारत ने राष्ट्र को नेतृत्व प्रदान किया है। पूर्वी भारत अनंत अवसरों का देश है। प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न होने के बावजूद, यह क्षेत्र देश के कुछ अन्य हिस्सों की तुलना में सामाजिक-आर्थिक विकास में पिछड़ गया है। आज हम इस्पात क्षेत्र में पूर्वोदय आरम्भ कर रहे हैं, जो एकीकृत स्टील हब के माध्यम से इस्पात क्षेत्र के त्वरित विकास द्वारा पूर्वी भारत के उत्थान की कहानी में एक नया अध्याय लिखेगा।”

 

पूर्वी भारत के विकास के लिए सरकार के प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने पूर्वी भारत के विकास पर अभूतपूर्व ध्यान दिया है। लगभग आधे आकांक्षी जिले इस क्षेत्र में हैं, जो सामाजिक-आर्थिक विकास का नया केंद्र बन रहे हैं। हमारी सरकार 102 लाख करोड़ रुपये की राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन लेकर आई है। चाहे वह पाइपलाइन हो, अंतर्देशीय जलमार्ग, जहाजरानी, वायु या सड़क क्षेत्र हो, हमारी सरकार अभूतपूर्व गति से बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रही है। पूर्वी भारत हमारे बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों में विशेष स्थान रखता है। ”

श्री प्रधान ने प्रौद्योगिकी के बारे में कहा, “21 वीं सदी ज्ञान और प्रौद्योगिकी का युग बनने जा रही है। नई प्रौद्योगिकियां अर्थव्यवस्था और समाज को नया आकार दे रही हैं। डिजिटाइजेशन द्वारा संचालित उद्योग 4.0 में बहुत अधिक संभावनाएं हैं। इस्पात क्षेत्र में विनिर्माण द्वारा उद्योग 4.0 का अंगीकरण औद्योगिक क्रांति 4.0 के तेज प्रभाव से पूर्वी भारत को लाभ सुनिश्चित करेगा।”

व्यवसाय के माहौल में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “व्यवसाय करने की सुगमता हमारी सरकार के लिए केवल नारा भर नहीं है। कंपनियों को स्थापित करने से लेकर नियामक मंजूरी, कराधान आदि तक, हमारी सरकार ने व्यवसाय करने की सुगमता में सुधार के हर पहलू पर काम किया है। हाल ही में, हमारी सरकार कोयला क्षेत्र में शायद अबतक का सबसे बड़ा सुधार लाई। कोयला क्षेत्र में अधिक राजस्व, अधिक उत्पादन और संभार तंत्र विकास पूर्वी भारत के विकास को और आगे बढ़ाएगा। ”

इस्पात क्षेत्र में पूर्वोदय का उद्देश्य एकीकृत इस्पात हब की स्थापना के माध्यम से पूर्वी भारत के त्वरित विकास को गति देना है। भारत के पूर्वी राज्यों (ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल) और आंध्र प्रदेश के उत्तरी हिस्से में देश का 80% लौह अयस्क, 100% कोयला और क्रोमाइट, बॉक्साइट और डोलोमाइट के भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा स्थित है। यहां भारत की 30 प्रतिशत प्रमुख बंदरगाह क्षमता के साथ पारादीप, हल्दिया, विजाग, कोलकाता आदि जैसे प्रमुख बंदरगाहों की उपस्थिति है। 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने के भारत के प्रयासों में 5 पूर्वी राज्य एक प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं जहां इस्पात क्षेत्र उत्प्रेरक बन सकता है। इस पूर्वी क्षेत्र में राष्ट्रीय इस्पात नीति द्वारा परिकल्पित देश की 75% से अधिक वृद्धिशील स्टील क्षमता को जोड़ने की क्षमता है। ऐसी उम्मीद की जाती है कि 2030-31 तक 300 मीट्रिक टन क्षमता में से, 200 मीट्रिक टन से अधिक अकेले इस क्षेत्र से आ सकते हैं, जो उद्योग 4.0 द्वारा प्रेरित है।

ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और उत्तरी आंध्र प्रदेश सन्निहित यह प्रस्तावित एकीकृत स्टील हब पूर्वी भारत के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए एक मशाल की तरह काम करेगा। इस हब का उद्देश्य त्वरित क्षमता संवर्धन में सक्षम बनाना और लागत तथा गुणवत्ता दोनों मामले में स्टील उत्पादकों की समग्र प्रतिस्पर्धा में सुधार लाना है। एकीकृत स्टील हब 3 प्रमुख तत्वों पर केंद्रित होगा:

 

1. ग्रीनफील्ड स्टील प्लांटों की स्थापना को सुगम बनाने के माध्यम से क्षमता में वृद्धि

2. एकीकृत इस्पात संयंत्रों एवं मांग केंद्रों के पास इस्पात समूहों का विकास।

3. संभार तंत्र एवं उपयोगिता बुनियादी ढांचे में रूपान्तरण जो पूर्वी क्षेत्र में सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को बदल देगा।

इस तरह के हब के माध्यम से इस्पात उद्योग की वृद्धि पूरे मूल्य श्रृंखला में रोजगार के उल्लेखनीय अवसरों के सृजन को बढ़ावा देगी और पूर्वी भारत के समग्र सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और इस प्रकार पूर्व और देश के अन्य क्षेत्रों के बीच व्याप्त विषमता को कम करेगी।

इस्पात मंत्रालय की अपर सचिव श्रीमती रसिका चौबे, पश्चिम बंगाल सरकार की उद्योग सचिव  सुश्री वंदना यादव, ओडिशा सरकार के उद्योग सचिव, श्री हेमंत शर्मा, इंडियन ऑयल के अध्यक्ष श्री संजीव सिंह, सेल के अध्यक्ष श्री अनिल चौधरी, कोल इंडिया के अध्यक्ष श्री अनिल कुमार झा, सीआईआई के महानिदेशक श्री चंद्रजीत बनर्जी, आरएसबी लिमिटेड के एमडी श्री एस.के. बेहरा ने भी श्रोताओं को संबोधित किया।

***

आरकेमीणा/आरएनएम/एएम/एसकेजे/सीएल-5235