सौर ऊर्जा स्वदेशी अभिनव उत्पादों के जरिए करोड़ों वंचित लोगों के काम आएगी: डॉ. हर्षवर्धन
एक सौर क्रांति का सूत्रपात शीघ्र ही होगा, क्योंकि सौर ऊर्जा देश में ऊर्जा विकास की गाथा को अभिनव सामग्री प्रदान कर रही है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के सहयोग से की गई पहलों के बारे में संवाददाताओं को जानकारी देते हुए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन और पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने आज नई दिल्ली में यह भी कहा कि सौर ऊर्जा अंततः स्वदेशी अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) के माध्यम से सौर प्रौद्योगिकी आधारित अभिनव उत्पादों को विकसित करके करोड़ों वंचित लोगों के काम आएगी। विकसित सौर उपकरणों में ‘सूर्यज्योति’ (जो एक सूक्ष्म सौर गुंबद है), एक सौर जल शोधक और एक सोलर जैकेट शामिल हैं। डॉ. हर्षवर्धन ने विशेष जोर देते हुए कहा कि सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य में वर्ष 2022 के लिए भारत की ऊर्जा योजना शामिल है। इसमें 175 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा पैदा करना शामिल है, जिसमें सौर ऊर्जा का योगदान 100 गीगावाट का होगा। उन्होंने कहा, ‘लक्ष्य का 20 प्रतिशत हासिल कर लिया गया है।’
मंत्री महोदय ने विशेष जोर देते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग कुछ ऐसी अभिनव वस्तुओं का निर्माण करने के लिए प्रयासरत है जिनमें सौर ऊर्जा का उपयोग हो और जिनसे लोग अपने दैनिक जीवन में लाभान्वित हों। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की अभिनव वस्तुओं के विकास का उद्देश्य जीवन स्तर बेहतर करने के साथ-साथ लोगों के खर्चों में कमी लाना है। ‘सूर्यज्योति’ का उल्लेख करते हुए डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि वर्ष 2016 में 30 उपयोगकर्ता (यूजर) ही थे, जबकि अब 5000 से भी ज्यादा परिवार अपने-अपने घरों को रोशन करने के लिए ‘सूर्यज्योति’ से लाभान्वित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 तक ‘सूर्यज्योति’ से 1,00,000 घरों को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
डॉ. हर्षवर्धन ने स्वयं सोलर जैकेट को पहन कर इसे प्रदर्शित करते हुए इसकी खूबियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह सोलर जैकेट विशेषकर दूर-दराज के क्षेत्रों में रहकर काम करने वाले रक्षा और वन कर्मियों के लिए उपयोगी है। इससे एक केंद्रित प्रकाश का उत्सर्जन होता है, यह ‘पहचान टैग’ को प्रकाशित करती है और इसमें मोबाइल फोन को चार्ज करने की सुविधा भी है।
डॉ. हर्षवर्धन सोलर जैकेट को प्रदर्शित करते हुए
मंत्री महोदय ने कहा कि देश की स्वच्छ ऊर्जा संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ही इन अभिनव सौर ऊर्जा उपकरणों को विकसित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि पांच सौर जल शोधक तैयार किए गए हैं जिनमें से हर मशीन प्रति दिन लगभग 400 लीटर जल को परिष्कृत करती है।

डॉ. हर्षवर्धन सौर जल शोधक का उपयोग करते हुए
डॉ. हर्षवर्धन ने सौर ऊर्जा उपकरणों के किफायती होने पर भी विशेष बल दिया। उन्होंने कहा, ‘वर्तमान में सोलर जैकेट (जीपीएस के बिना) की कीमत 4000 रुपये और ‘सूर्यज्योति’ बल्ब की कीमत 1100 रुपये है। हालांकि, जब इनका उत्पादन बढ़ जाएगा तो इनकी कीमतें घट जाएंगी।’
सूर्यज्योति – सूक्ष्म सौर गुंबद
सूक्ष्म सौर गुंबद (सूर्यज्योति) डीएसटी द्वारा विकसित किया गया एक अनूठा उपकरण है और यह डॉ. हर्षवर्धन का मौलिक आइडिया है, जिन्होंने देश के करोड़ों झुग्गी निवासियों और आदिवासियों तक रोशनी की पहुंच सुनिश्चित करने हेतु इस उत्पाद को विकसित करने के लिए एक वैज्ञानिक डॉ. एस.पी. गॉन चौधरी को प्रेरित किया।


सूक्ष्म सौर गुंबद एक ग्रामीण घर को रोशन करता हुआ
सौर जल शोधक एक महत्वपूर्ण अभिनव वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी उत्पाद है जो प्रतिदिन 300-400 लीटर पेयजल सुलभ कराने में समर्थ है। यह जल शोधक विशेषकर गांवों में अवस्थित स्कूलों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और पर्यटक लॉज के लिए उपयोगी है जहां पारंपरिक बिजली बहुत ही अनियमित है या उपलब्ध नहीं है।
इस परियोजना के तहत अभिनव तकनीकी विशेषताएं निम्नलिखित हैं:
- सौर ऊर्जा की बचत शोधित जल के रूप में होती है
- इन्वर्टर का उपयोग नहीं किया जाता है
- कुछ भी प्रदूषण नहीं होता है
- अत्यंत कम रख-रखाव की आवश्यकता पड़ती है
- किसी बैटरी की आवश्यकता नहीं है
- विशेष डीसी-डीसी कन्वर्टर का विकास।
सोलर जैकेट
वर्तमान में सोलर जैकेट में निम्नलिखित सुविधाएं हैं:
- बीम सुविधाओं से युक्त टॉर्च
- पहचान कोड (प्रकाशित).
- मोबाइल फोन को चार्ज करने की सुविधाएं
- जीपीएस (स्वैच्छिक)
- पॉकेट सोलर फैन (स्वैच्छिक)।
आगामी अभिनव सौर परियोजनाएं
सौर ऊर्जा पर आधारित आगामी अभिनव परियोजनाओं में सौर ऊर्जा द्वारा संचालित बॉयोमीट्रिक एटीएम भी शामिल है। इस एटीएम को ग्रामीण क्षेत्रों के लिए डिजाइन किया जा रहा है जहां साक्षरता स्तर पर्याप्त नहीं हैं। बॉयोमीट्रिक आधारित ‘बीएस-एटीएम’ का एक प्रोटोटाइप तैयार किया गया है जो उपयोगकर्ताओं (यूजर) के अनुकूल है। इस एटीएम में ऊर्जा की कम खपत होती है और यह पर्यावरण के अनुकूल भी है, क्योंकि इसे संचालित करने के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। भारतीय स्टेट बैंक और बंधन बैंक ने अपने दो ग्रामीण बैंकों में यह मशीन लगाने में रुचि दिखाई है।
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वीके/एएम/आरआरएस – 7039