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एनआईटी रायपुर का 17वां दीक्षांत समारोह संपन्न: केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने दीक्षांत भाषण दिया; संस्थान में 7 उत्कृष्टता केंद्रों का किया लोकार्पण

विकसित भारत के निर्माण में ऊर्जा, आपूर्ति शृंखला और नवाचार के क्षेत्र में युवा बनें समाधानकर्ता: केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी

समारोह में 1,364 विद्यार्थियों को उपाधियाँ और 51 मेधावी छात्रों को पदक प्रदान किए गए

प्रविष्टि तिथि: 03 NOV 2026 6:36PM by PIB Raipur

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर का 17वां दीक्षांत समारोह आज रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार में संपन्न हुआ। समारोह में भारत सरकार के केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने मुख्य अतिथि के रूप में दीक्षांत भाषण दिया। उन्होंने अपने संबोधन में स्नातक उपाधि प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि छह दशकों से अधिक समय से एनआईटी रायपुर देश की तकनीकी प्रगति और औद्योगिक विकास की सुदृढ़ आधारशिला रहा है।


श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख संरक्षक के रूप में कोयला एवं खान मंत्रालय यह भली-भांति समझता है कि देश की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ ऊर्जा की माँग में भी भारी बढ़ोतरी होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि इस तीव्र औद्योगिक छलांग को सतत, पर्यावरण-अनुकूल और किफायती तकनीकों के साथ संतुलित करना आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती और सबसे बड़ा अवसर दोनों है। केंद्रीय मंत्री ने उपाधि प्राप्त करने वाले युवाओं का आह्वान किया कि वे वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के संकल्प को साकार करने में अपनी भूमिका के प्रति सजग रहें। उन्होंने कहा कि युवा उन क्षेत्रों में नवाचार और समाधान तलाशें जहाँ आम तौर पर लोग अवरोध देखते हैं—विशेषकर ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति शृंखला, लोक स्वास्थ्य, रोज़गार सृजन और कृषि विकास के क्षेत्रों में।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह नीति रटने के पारंपरिक तरीकों के बजाय व्यावहारिक और कौशल आधारित शिक्षा पर केंद्रित है, जिसके क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार राज्यों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर सक्रियता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक विनिर्माण (एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोज़गार के परिदृश्य को आकार देंगे। सिलिकॉन वैली के एक-तिहाई तकनीकी विशेषज्ञों के भारतीय होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह तथ्य इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आज भारत वैश्विक तकनीक और शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।


दीक्षांत समारोह से पूर्व प्रातः काल केंद्रीय मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने संस्थान परिसर स्थित हीरा हॉल में 7 नए उत्कृष्टता केंद्रों (सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस) का औपचारिक लोकार्पण किया। इन केंद्रों में MeitY इंडियाएआई छत्तीसगढ़ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन क्रिटिकल मिनरल्स, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन कंप्यूटेशनल मैकेनिक्स, सेंटर ऑफ स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन (COSINE), मैरल सेंटर फॉर इनोवेशन इन रूरल एंड ट्राइबल हेल्थ, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर एयरोस्पेस एंड ऑटोनॉमस टेक्नोलॉजीज तथा सेंटर फॉर नैनोसाइंस एंड सस्टेनेबल एनर्जी टेक्नोलॉजीज शामिल हैं। ये अत्याधुनिक केंद्र उन्नत अनुसंधान, अंतर्विषयक सहयोग तथा तकनीकी व सामाजिक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान की दिशा में कार्य करेंगे।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रायपुर के सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि नवाचार और गंभीर अनुसंधान ही राष्ट्र के समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त करते हैं। उन्होंने देश में ही क्रिटिकल मिनरल्स की खोज और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर बल दिया ताकि विदेशी आयात पर निर्भरता समाप्त की जा सके। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता सीखकर उसका उपयोग राष्ट्र के विकास एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए करने का आग्रह किया।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की महानिदेशक तथा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) की सचिव डॉ. (श्रीमती) नल्लाथम्बी कलाइसेल्वी ने अपने संबोधन में कहा कि एनआईटी रायपुर धातुकर्म और कोयला खनन सहित सभी प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में दक्ष मानव संसाधन तैयार करने वाला एक विशिष्ट संस्थान है। उन्होंने कोयले को वर्तमान युग का वास्तविक हीरा बताते हुए कहा कि देश में उपलब्ध विशाल भंडार का रणनीतिक उपयोग सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने धातुकर्म उत्कृष्टता केंद्र की सराहना करते हुए संक्रमण धातुओं, आत्मनिर्भर भारत तथा नेट-जीरो कार्बन तकनीकों के विकास पर बल दिया और युवाओं से राष्ट्रीय नेतृत्व संभालने का आह्वान किया।


समारोह की अध्यक्षता करते हुए एनआईटी रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने कहा कि दीक्षांत समारोह महज़ डिग्री वितरण का दिन नहीं, बल्कि जीवन की एक नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि सभागार में उपस्थित युवा केवल डिग्रीधारक नहीं, बल्कि देश के भावी इंजीनियर, उद्यमी, वैज्ञानिक और नीति-निर्माता हैं। उन्होंने मुख्य अतिथि श्री जी. किशन रेड्डी के किसान परिवार से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल तक की प्रेरणादायी यात्रा का उल्लेख किया। डॉ. हावरे ने कहा कि यद्यपि हम एआई और स्वचालन के दौर में हैं, किंतु बुनियादी उत्पादन और ऊर्जा के कई कार्य मानवीय इंजीनियरिंग कौशल पर ही निर्भर रहेंगे, इसलिए विद्यार्थियों को अपने मूल सिद्धांतों में सुदृढ़ बने रहना चाहिए।

एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रो. एन. वी. रमना राव ने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि संस्थान को स्पेस एंड इंटरप्लेनेटरी एक्सप्लोरेशन सेंटर (COSINE) की औपचारिक स्वीकृति मिलना एक बड़ी उपलब्धि है। इसके अलावा, टाइम्स हायर एजुकेशन वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में संस्थान को #1201–1400 बैंड में स्थान मिला है तथा NITRRFIE को 'भारत इन्क्यूबेटर अवार्ड 2025' से सम्मानित किया गया है। उन्होंने साझा किया कि वर्ष 2026 बैच के विद्यार्थियों को कुल 821 प्लेसमेंट ऑफर प्राप्त हुए, जिनमें सर्वोच्च पैकेज ₹60 लाख प्रति वर्ष रहा। साथ ही, संस्थान के 18 संकाय सदस्यों और 4 विद्यार्थियों ने स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय द्वारा जारी विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की वैश्विक सूची में स्थान प्राप्त किया है।


समारोह का शुभारंभ पारंपरिक शैक्षणिक शोभायात्रा के आगमन एवं राष्ट्रीय गीत ‘वन्दे मातरम्’ के साथ हुआ था। इस वर्ष संस्थान द्वारा कुल 1,364 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जिनमें 976 स्नातक, 283 स्नातकोत्तर तथा 105 शोधार्थी (पीएच.डी.) शामिल हैं। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए कुल 51 पदक बांटे गए, जिनमें 25 स्वर्ण, 25 रजत तथा 1 ओवरऑल स्वर्ण पदक शामिल है। बी.टेक कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग की आत्मिका गंगेले को संस्थान स्वर्ण पदक एवं ओवरऑल टॉपर (स्नातक) का सम्मान प्रदान किया गया। समारोह का समापन गणमान्य अतिथियों को स्मृति-चिह्न भेंट करने तथा राष्ट्रगान के सामूहिक गायन के साथ हुआ।
 

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आरडीजे/पीजे


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