प्रविष्टि तिथि:
01 NOV 2026 9:46PM by PIB Delhi
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित 'शताब्दी समारोह 2026' को संबोधित किया। अखिल विश्व गायत्री परिवार की परम वंदनीया माताजी एवं अखंड ज्योति के अवतरण के 100 वर्ष पूरे होने पर 'शताब्दी समारोह 2026' का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री दुर्गादास उइके और गायत्री परिवार के दल नायक डॉ. चिन्मय पंड्या सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
समारोह को संबोधित करते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि आज का दिन श्रद्धा, सेवा और संकल्प का दिन है।हम वंदनीय माता भगवती देवी शर्मा जी के प्रति श्रद्धा के साथ, गायत्री परिवार की मूल भावना के अनुसार सेवा करने के लिए और महर्षि अरविंद तथा स्वामी विवेकानंद जी के सपनों के भारत के निर्माण के संकल्प के साथ एकत्रित हुए हैं। श्री शाह ने कहा कि अखण्ड ज्योति के प्रकट होने के 100 वर्ष, परम वंदनीय माता जी के जन्म के 100 वर्ष और पूज्य गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जी की साधना के 100 वर्ष, इन तीनों पुनीत त्रिवेणी का संगम इसी वर्ष में हो रहा है। उन्होंने कहा कि 100 का अंक पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। यह वर्ष भी भारतीय संस्कृति और भारतीय आध्यात्मिक यात्रा के लिए एक प्रकार से पूर्णता का वर्ष है।
श्री अमित शाह ने कहा कि वंदनीय माता जी ने स्वयं तप करके दूसरों को प्रकाश दिया। 100 वर्ष पहले प्रज्वलित हुई यह ज्योति आज 100 से अधिक देशों में, 15 करोड़ से अधिक परिवारों में और असंख्य मानवों के कल्याण का प्रतीक बन चुकी है।
गृह मंत्री ने कहा कि इस वर्ष जनवरी में हरिद्वार में आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में एकजुट होकर पूरा गायत्री परिवार इस ज्योति के संकल्प के साथ अपने आप को एकाकार कर रहा था। आज इसी यात्रा के अगले पड़ाव में दो महत्वपूर्ण आयोजन हो रहे हैं।पहला दीप महायज्ञ है, जो त्याग, सहयोग और समर्पण का प्रतीक है। जलने वाला हर दीप एक संकल्प है कि हम अपनी सामर्थ्य का उपयोग समाज, अध्यात्म और राष्ट्र के लिए करेंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वह अपने अनुभव के आधार पर मानते हैं कि गायत्री मंत्र संपूर्ण परिवर्तन का मार्ग है। यह केवल धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह मंत्र के भीतर समाहित सकारात्मक ऊर्जा को अनुभव करके, मन, शरीर और आत्मा को उसकी अनुभूति कराकर हमारे भीतर के सत्त्व को शत-प्रतिशत बाहर निकालने का बड़ा मार्ग है। श्री शाह ने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षर हमारी 24 शुभ ग्रंथियों के साथ सीधा संबंध रखते हैं। गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों को आधार मानकर, अपने गुरु से इसके शुद्ध उच्चारण का संस्कार लेकर यदि हम 24 शुभ शक्तियों को जागृत करते हैं, तो हमारे भीतर पड़ी अशुभ शक्तियों का दमन होता है और शुभ शक्तियों का उद्भव होता है। उन्होंने कहा कि ये 24 शुभ शक्तियाँ अनेक प्रकार के 24 लक्षणों के साथ जुड़ी हुई हैं, जिनमें दूरदर्शिता, संयम, तप, साहस, विवेक, बुद्धि, रक्षा, उत्पादन, सेवा, ओजस, प्रेम, पराक्रम, धारणा आदि शामिल हैं। उन्होंने कहा कि जिस व्यक्ति में 24 शुभ गुणों का उदय होता है, उसका मोक्ष का मार्ग अपने आप प्रशस्त हो जाता है और ईश्वर उसे उस दिशा में ले जाता है।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारत के अनेक ऋषि-मुनियों और अनेक साधकों एवं युगपुरुषों ने भारतीय संस्कृति, हमारी आध्यात्मिक चेतना और विश्व के सत्त्व पर जो उपकार किया है, उतना ही गहरा उपकार पंडित जी ने गायत्री मंत्र को जन-जन तक पहुँचाकर किया है। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य जीहमारे आध्यात्म के डॉक्टर हैं। उनका कहना है कि गायत्री मंत्र के उच्चारण से 24 प्रकार की सद्ग्रंथियाँ जागृत होती हैं। जब आप नाभि से मुख तक का शुद्ध उच्चारण करते हैं, तब ये 24 ग्रंथियाँ जागृत होती हैं और इनसे निकला अंतरस्राव 24 सद्शक्तियों का विकास करता है।
गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि कई युवाओं को गायत्री मंत्र से लाभ हुआ है। उनकी सकारात्मक सोच, हिम्मत और स्मरण शक्ति बढ़ी है, व्याख्या की क्षमता तीक्ष्ण हुई है और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव ने ये बातें 15 करोड़ परिवारों तक पहुँचाई हैंऔर विश्व भर में 15 करोड़ परिवार कोई कम संख्या नहीं होती। उन्होंने गायत्री मंत्र के प्रति श्रद्धा पैदा करके, उसके शुद्ध उच्चारण की परंपरा स्थापित करके न केवल व्यक्तियों के जीवन का उद्धार किया है, बल्कि भारतीय आध्यात्मिकता और आध्यात्मिक शक्ति को आगामी सौ वर्ष का नया जीवन भी दिया है। उन्होंने कहा कि हमें इस देवसंस्कृति का, उनके द्वारा किए गए दिग्विजय के शंखनाद को लंबे समय तक दोहराना चाहिए, इसका प्रसार करना चाहिए और युवा पीढ़ी तक पहुँचाना चाहिए।
श्री अमित शाह ने कहा कि गायत्री परिवार के माध्यम से एक आंदोलन खड़ा हो रहा है, उसे आगे बढ़ाना हम सबका पवित्र दायित्व है। यह दायित्व पूरे संसार की शुभ शक्तियों को इकट्ठा करके संसार को सन्मार्ग पर पहुँचाने का है। हमें जीवन के अंतिम क्षण तक यह कार्य करते रहना है।
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