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केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के छठे बैच का एक वर्षीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू

नया रायपुर में 34 नव नियुक्त अधिकारियों को मिलेगा भूजल अन्वेषण, आकलन और वैज्ञानिक प्रबंधन का प्रशिक्षण

छह क्षेत्रीय भाषाओं में तकनीकी पुस्तिका का विमोचन, चार विश्वविद्यालयों के साथ अनुसंधान एवं प्रशिक्षण सहयोग के लिए समझौते

प्रविष्टि तिथि: 29 OCT 2026 5:19PM by PIB Raipur

केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के नव नियुक्त अधिकारियों के छठे बैच का एक वर्षीय प्रारंभिक स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम गुरुवार को राजीव गांधी राष्ट्रीय भूमि जल प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, नया रायपुर में शुरू हुआ। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में 34 नव नियुक्त अधिकारियों को भूजल अन्वेषण, भूजल संसाधनों के आकलन तथा उनके सतत एवं वैज्ञानिक प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय भूमि जल बोर्ड मुख्यालय के सदस्य (भूजल विनियमन) श्री प्रतुल सक्सेना तथा सदस्य (नवाचार एवं पुनरुद्धार) श्री टी. बी. एन. सिंह ने किया। इस अवसर पर उत्तर-मध्य छत्तीसगढ़ क्षेत्र, रायपुर के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. बी. आर. लामसोने उपस्थित रहे। संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. रंजन कुमार राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए नव नियुक्त अधिकारियों को बधाई दी और केंद्रीय भूमि जल बोर्ड में उनका अभिनंदन किया।

डॉ. राय ने बताया कि प्रशिक्षणार्थियों की शैक्षणिक पृष्ठभूमि विविध है। इनमें भूविज्ञान, भूभौतिकी और रसायन विज्ञान के अभ्यर्थी शामिल हैं। अधिकारियों ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय, कोलकाता, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर तथा पांडिचेरी विश्वविद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की है।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर अधिकारियों ने रंगोली, नृत्य प्रस्तुतियों और लघु नाटिकाओं के माध्यम से अपनी रचनात्मक एवं सांस्कृतिक प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रशिक्षुओं ने समारोह का संचालन भी स्वयं किया, जो उनकी नेतृत्व क्षमता और सामूहिक सहभागिता का परिचायक रहा।

इस अवसर पर केंद्रीय भूमि जल बोर्ड के प्रकाशन ‘भूजल संवर्धन हेतु कृत्रिम पुनर्भरण की सरल एवं व्यावहारिक विधियां’ के असमिया, बांग्ला, ओड़िया, उर्दू, तेलुगु और मलयालम भाषाओं में अनूदित संस्करणों का विमोचन किया गया। इनका अनुवाद प्रशिक्षु अधिकारियों ने किया है। इस पहल का उद्देश्य भूजल संवर्धन से संबंधित वैज्ञानिक एवं तकनीकी जानकारी को विभिन्न भाषाई समुदायों तक उनकी अपनी भाषाओं में पहुंचाना है।

समारोह में प्रशिक्षु अधिकारियों की टीम द्वारा संस्थान के संकाय सदस्यों के मार्गदर्शन में तैयार पत्रिका ‘प्रवाह’ (PRAVAH) के प्रथम अंक का भी विमोचन हुआ। पत्रिका प्रशिक्षुओं के रचनात्मक विचारों, तकनीकी जानकारियों और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए मंच उपलब्ध कराएगी।

भूजल अनुसंधान, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए संस्थान ने आंध्र प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय, राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय, कर्नाटक केंद्रीय विश्वविद्यालय तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इन समझौतों से अनुसंधान, तकनीकी अनुभवों के आदान-प्रदान और प्रशिक्षण के क्षेत्र में संस्थागत सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

एक वर्ष तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारी कक्षा आधारित अध्ययन के साथ व्यावहारिक एवं क्षेत्रीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इससे उन्हें भूजल संसाधनों के वैज्ञानिक आकलन, अन्वेषण और सतत प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए तैयार किया जाएगा।


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आरडीजे / बीकेटी


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