प्रविष्टि तिथि:
28 OCT 2026 6:47PM by PIB Delhi
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर, 2026 को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2033-34 के लिए 1,856.67 करोड़ रुपए के परिव्यय से ‘खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना’ को मंजूरी दी। समर्पित खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्रों में निर्माता, आपूर्तिकर्ता, परीक्षण सुविधाएं और डिजाइन केंद्र एक स्थान पर आएंगे। एंकर इंवेस्टमेंट (आधार निवेश)और टर्नओवर लिंक्ड (कुल कारोबार आधारित)उत्पादन के लिए 1,130 करोड़ रुपये के संयुक्त परिव्यय से सहायता नए निवेश को आकर्षित करेगी और उत्पादन बढ़ाएगी। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और उनके नवीकरण में निर्माताओं की मदद के लिए 105 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे। ‘उत्कृष्टता केंद्र', स्टार्टअप सहायता, कौशल विकास और निर्यात प्रोत्साहन, ये सब मिलकर एक ऐसी योजना को पूरा करते हैं, जिसका उद्देश्य भारत को उच्च गुणवत्ता वाले खेल के सामानों का एक वैश्विक केंद्र बनाना है।
परिचय
खेलों में भारत की महत्वाकांक्षाएं ऐसे अवसर पैदा कर रही हैं जिनका विस्तार खेल के मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों से लेकर विनिर्माण और उद्यम तक है। ‘खेलो इंडिया’ और ‘खेलो भारत नीति 2025’ जैसी पहलकदमियां भागीदारी, प्रतिभा विकास और खेलों के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही हैं। एक मजबूत खेल सामग्री उद्योग गुणवत्तापूर्ण उपकरण प्रदान करने के साथ ही कौशल, रोजगार और निर्यात के अवसर पैदा करके इस दृष्टिकोण के लिए मददगार हो सकता है।
भारत का खेल सामग्री विनिर्माण आधार जालंधर (पंजाब) और मेरठ (उत्तर प्रदेश) जैसे स्थापित क्लस्टरों, कुशल श्रमिकों और उद्यमशील एमएसएमई के नेटवर्क पर आधारित है। उत्पादन में सूक्ष्म और लघु उद्यमों की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है। इससे यह क्षेत्र स्थानीय उद्यम और रोजगार के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। वर्ष 2024 में वैश्विक खेल उपकरण बाजार का मूल्य लगभग 140 अरब अमेरिकी डॉलर था। इसके 2036 तक बढ़कर लगभग 283 अरब अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान है। यह भारतीय निर्माताओं को अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के पर्याप्त अवसर प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन मजबूतियों का लाभ उठाने के उद्देश्य से वित्त वर्ष 2026-27 से 2033-34 की अवधि के लिए 1,856.67 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ खेलो इंडिया खेल सामग्री विनिर्माण योजना को मंजूरी दी है। संघीय बजट 2026-27 में घोषित यह योजना भारत को खेल सामग्रियों की डिजाइन, विकास और विनिर्माण के लिए एक विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से निवेश, प्रौद्योगिकी, नवाचार, कौशल और बाजार विकास के सहयोग को एक साथ लाती है। बजट अभिभाषण 2026-27 में उल्लेख किया गया था कि भारत में उच्च गुणवत्ता वाली किफायती खेल सामग्रियों के एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभरने की क्षमता है।
योजना के अंतर्गत प्रमुख हस्तक्षेप
यह योजना अवसंरचना और निवेश से लेकर अनुसंधान, कौशल, प्रमाणन और बाजार विकास तक, समूची खेल सामग्री विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में व्यापक सहायता प्रदान करती है। इसके दो मुख्य घटक हैं- विनिर्माण में प्रोत्साहन और व्यापक इकोसिस्टम के निर्माण के लिए हस्तक्षेप।
- एकीकृत विनिर्माण क्षेत्रों का विकासः एकीकृत खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्र निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं, परीक्षण सुविधाओं, डिजाइन और प्रोटोटाइपिंग केंद्रों तथा सहायक उद्यमों को एक जगह लाएंगे। ‘भव्य योजना’ और एनआईसीडीसी औद्योगिक पार्कों के साथ तालमेल के माध्यम से विकसित ये क्षेत्र उद्योग संपर्कों को मजबूत करेंगे और विनिर्माण दक्षता में सुधार लाएंगे। ऐसे चार एकीकृत क्षेत्र हो सकते हैं, जिनमें से प्रत्येक 300 एकड़ से अधिक में फैला होगा।
- निवेश को आकर्षित करना और उत्पादन का विस्तारः 1,130 करोड़ रुपए के संयुक्त परिव्यय वाले दो घटक विनिर्माण वृद्धि को गति देंगे। एंकर इंवेस्टमेन्ट सहायता कम-से-कम 100 करोड़ रुपए का निवेश करने वाले एंकर निवेशकों को पूंजीगत व्यय का 20 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करेगी। इससे प्रमुख घरेलू और वैश्विक निर्माताओं, ब्रांडों और खुदरा श्रृंखलाओं को खेल सामग्री विनिर्माण क्षेत्रों के भीतर अपनी इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। टर्नओवर लिंक्ड सहायता के अंतर्गत 10 करोड़ रुपए या उससे अधिक का निवेश करने वाले निर्माताओं को 15 प्रतिशत तक का प्रोत्साहन दिया जाएगा जिससे उच्च उत्पादन और क्षमता विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।
- मौजूदा क्लस्टरों का उन्नयन और एमएसएमई को सहायताः मौजूदा खेल सामग्री विनिर्माण क्लस्टरों को राज्यों के साथ लागत साझाकरण के माध्यम से सामान्य सुविधाओं और साझा अवसंरचना के उन्नयन के लिए सहायता दी जाएगी। इससे छोटे उद्यमों को अपनी विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
- अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन में सहायताः 105 करोड़ रुपए का परिव्यय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों से प्रमाणन प्राप्त करने और उनका नवीनीकरण कराने में मदद करेगा। यह सहायता पहली बार प्रमाणन लागत का 70 प्रतिशत और नवीनीकरण लागत का 50 प्रतिशत होगी। इससे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत गुणवत्ता और प्रदर्शन मानकों को बढ़ावा मिलेगा तथा वैश्विक बाजार तक पहुंच आसान होगी।
- अनुसंधान और स्टार्टअप नवाचार को बढ़ावाः प्रमुख शैक्षिक और अनुसंधान संस्थानों में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र खेल उपकरणों, सामग्री विज्ञान, सुरक्षात्मक परिधानों और उन्नत विनिर्माण प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान को बढ़ावा देंगे। ‘अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ के साथ तालमेल से अनुसंधान सह-वित्तपोषण को प्रोत्साहित किया जाएगा। डीपीआईआईटी पंजीकृत स्पोर्ट्स स्टार्टअप 20 लाख रुपए तक के अनुदान के पात्र होंगे। स्टार्टअप इंडिया के अनुरूप यह सहायता नई प्रौद्योगिकियों, प्रक्रियाओं और उत्पादों के विकास, परीक्षण, सत्यापन और व्यावसायीकरण को सुगम बनाएगी।
- उद्योगों के अनुकूल कौशल विकासः कार्यबल की उभरती जरूरतों को पूरा करने के लिए कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय तथा संबंधित उद्योग हितधारकों के सहयोग से कौशल विकास पहलकदमियां लागू की जाएंगी।
- वैश्विक स्तर पर भारतीय खेल सामग्री प्रोत्साहनः निर्यात संवर्धन मिशन के सहयोग से आयोजित होने वाला ‘इंडिया स्पोर्ट्स एक्सपो’ और ‘ब्रांड इंडिया अभियान’, ब्रांडिंग, पहुंच और बाजार विकास पहलकदमियों के साथ मिल कर भारतीय खेल सामग्रियों की दृश्यता को मजबूत करेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक व्यापक पहुंच बनाने में सहायक होगा।

भारत के खेल-सामग्री निर्माण आधार को मजबूत करना
आज के समय में भारत का खेल-सामग्री उद्योग
भारत के खेल-सामग्री उद्योग में निर्माण कौशल के साथ-साथ छोटे उद्यमों का एक व्यापक नेटवर्क भी शामिल है। इसकी ताकत केवल अलग-अलग उत्पादों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं और घरेलू इकाइयों के ऐसे समूह भी शामिल हैं जो देश और विदेश के खरीदारों की जरूरतों को पूरा करते हैं।
- एक स्थापित विनिर्माण नेटवर्क: जालंधर और मेरठ में 250 से अधिक निर्यात इकाइयाँ, 1,000 से ज़्यादा घरेलू बाज़ार इकाइयाँ, 4,000 से अधिक सूक्ष्म उद्यम और लगभग 20,000 घर से चलने वाली इकाइयाँ शामिल हैं। अन्य केंद्रों में साइकिल के लिए लुधियाना तथा खेल के सामान और कपड़ों के लिए दिल्ली और मुंबई शामिल हैं।
- एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) की मजबूत भागीदारी: लगभग 90% उत्पादन छोटे और सूक्ष्म उद्यमों द्वारा किया जाता है। इससे खेल-सामग्री निर्माण क्षेत्र में होने वाली वृद्धि का सीधा संबंध उद्यमिता, स्थानीय आजीविका और रोजगार से है।
- अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मौजूद उत्पाद: भारत क्रिकेट बैट, सुरक्षा उपकरण, हवा भरने वाली गेंदें और जिम तथा एथलेटिक प्रशिक्षण के उपकरण बनाता है। यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया मिलकर भारत के खेल उपकरणों के कुल निर्यात का आधे से अधिक हिस्सा लेते हैं, जिससे प्रमुख विदेशी बाजारों के साथ मजबूत संबंध बने हुए हैं।
- मजबूत पक्ष: वैश्विक क्रिकेट बैट बाजार में भारत स्थित ब्रांडों और निर्माताओं की हिस्सेदारी लगभग 75 से 80% है और क्रिकेट हेलमेट बाजार में भारत की हिस्सेदारी लगभग 30 से 35% होने का अनुमान है।
- संबंधित उद्योगों में अवसर: खेल उपकरणों के निर्माण में रबर, पॉलिमर, कंपोजिट, लकड़ी और धातुओं से जुड़ी क्षमताओं का उपयोग होता है। साझा सामग्री, मशीनरी और कौशल, उत्पादों में विविधता लाने और संपूर्ण उद्योग में आपूर्तिकर्ता नेटवर्क को मजबूत करने के अवसर पैदा करते हैं।
- घरेलू और वैश्विक मांग को पूरा करने की गुंजाइश: भारत का घरेलू खेल-सामग्री बाजार लगभग 2.5 अरब अमेरिकी डॉलर का है, जिसमें से लगभग 0.5 अरब अमेरिकी डॉलर का हिस्सा उपकरणों का है। वैश्विक स्तर पर, 2024 में खेल-उपकरणों का निर्यात लगभग 52 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। इससे भारत के मौजूदा 275 मिलियन अमेरिकी डॉलर के उपकरण निर्यात से आगे विस्तार करने के अवसर हैं।
- दीर्घकालिक स्तर पर बड़ी संभावनाएं: 2036 तक भारत का खेल-उपकरण निर्यात लगभग 8.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे लगभग 54 लाख अतिरिक्त प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है।
- प्रमुख आयोजनों से भरा एक दशक: लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028, अहमदाबाद में कॉमनवेल्थ गेम्स 2030, ब्रिस्बेन ओलंपिक 2032 और 2036 ओलंपिक खेलों के लिए भारत की प्रस्तावित दावेदारी - इन सबके चलते अगले एक दशक तक खेल उपकरणों की भारी मांग रहेगी।
ये सभी खूबियां मिलकर उत्पादन बढ़ाने, अधिक मूल्य वाले उपकरण विकसित करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पैठ मजबूत करने का आधार तैयार करती हैं। प्रौद्योगिकी, परीक्षण, प्रमाणन और उद्योग भागीदारी इस क्षमता को विनिर्माण वृद्धि में बदलने में मदद कर सकती हैं।
नई योजना के माध्यम से इन खूबियों को और मजबूत बनाना
खेलो इंडिया खेल सामग्री निर्माण योजना विनिर्माण मूल्य श्रृंखला में हर स्तर पर सहायता प्रदान करती है। इसके हस्तक्षेप निम्नलिखित प्राथमिकताएं तय करते हैं:
- मजबूत घरेलू विनिर्माण: एकीकृत विनिर्माण क्षेत्र और निवेश तथा उत्पादन सहायता से क्षमता विस्तार को बढ़ावा मिलेगा, आपूर्तिकर्ता नेटवर्क मजबूत होंगे, घरेलू मूल्य संवर्धन में वृद्धि होगी और आयात पर निर्भरता कम होगी।
- एमएसएमई का विकास: मौजूदा समूहों (क्लस्टर), सामान्य सुविधाओं और साझा अवसंरचना का उन्नयन छोटे उद्यमों की सहायता करेगा।
- बेहतर गुणवत्ता और नवाचार: अनुसंधान केंद्र, प्रौद्योगिकी विकास, स्टार्ट-अप सहायता और अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन उत्पाद विकास और गुणवत्ता को मजबूत करेंगे।
- कौशल और रोज़गार: उद्योग की ज़रूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण से एक कुशल कार्यबल तैयार करने में मदद मिलेगी और पूरी मूल्य श्रृंखला में रोज़गार को बढ़ावा मिलेगा।
- बेहतर वैश्विक प्रतिस्पर्धिता: ब्रांडिंग, पहुंच बढ़ाने और बाज़ार के विकास से भारतीय खेल-कूद के सामान को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुँचाने में मदद मिलेगी।
- भारत की खेल संबंधी महत्वाकांक्षाओं की सहायता: उच्च गुणवत्ता वाले और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित उपकरण खेल क्षेत्र तथा एथलीट विकास कार्यक्रमों को सहयोग देंगे, जो 'खेलो इंडिया' और 'फिट इंडिया' के प्रयासों को और मजबूत बनाएंगे।

राष्ट्रीय योजनाओं और पहलों के साथ तालमेल
यह योजना मौजूदा राष्ट्रीय पहलों को आधार बनाती है, ताकि विनिर्माण अवसंरचना को अनुसंधान, कौशल और निर्यात के अवसरों से जोड़ा जा सके। साथ ही, यह भारत के खेल इकोसिस्टम को मजबूत करने के व्यापक लक्ष्य में भी योगदान देती है।
- 'भव्य': 'भारत औद्योगिक विकास योजना' (भव्य) के तहत 33,660 करोड़ रुपये के आवंटन से 100 'प्लग-एंड-प्ले' औद्योगिक पार्क बनाए जाएंगे। इसमें पहले से तैयार फैक्ट्री शेड, परीक्षण प्रयोगशालाएं और वेयरहाउसिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं, जो निर्माताओं के लिए आवश्यक अवसंरचना प्रदान करती हैं। इस योजना के अंतर्गत 'खेल सामग्री के विनिर्माण क्षेत्र' को 'भव्य' योजना की अवसंरचना के साथ जोड़कर विकसित किया जाएगा।
- राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम लिमिटेड (एनआईसीडीसी): एनआईसीडीसी निर्माताओं के लिए ज़मीन, सड़क, बिजली, पानी और परिवहन सुविधाओं के साथ औद्योगिक शहरों को विकसित करने में मदद करता है। इसके औद्योगिक गलियारा कार्यक्रम में 13 राज्यों के 20 औद्योगिक स्मार्ट शहर शामिल हैं, जिनमें से सितंबर 2026 तक चार पूरे हो चुके हैं। खेल सामग्री से जुड़ी योजना में, एनआईसीडीसी औद्योगिक पार्कों की अवसंरचना का इस्तेमाल करके ऐसे मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन विकसित किए जाएंगे, जहाँ निर्माता, आपूर्तिकर्ता और अन्य सहायक सुविधाएं एक साथ आ सकें।
- अनुसंधान राष्ट्रीय रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ): एएनआरएफ शैक्षणिक संस्थानों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग के बीच अनुसंधान और सहयोग को बढ़ावा देता है। एएनआरएफ के साथ जुड़ने से खेल सामग्री के क्षेत्र में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही यह योजना उपकरण, सामग्री, सुरक्षात्मक गियर और विनिर्माण प्रौद्योगिकियों पर काम करने वाले 'उत्कृष्टता केंद्रों' को सहायता भी प्रदान करेगी।
- स्टार्टअप इंडिया: स्टार्टअप इंडिया शुरुआती वित्तपोषण, निवेश और ऋण गारंटी के माध्यम से नए उद्यमों को सहायता देता है,जिससे विचारों को एक सफल व्यवसाय में बदलने में मदद मिलती है। 31 मार्च 2026 तक, भारत में 2.23 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे, जिन्होंने 23.36 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार पैदा किए थे। खेल सामग्री योजना के तहत स्टार्टअप्स को मिलने वाली विशेष सहायता, इस व्यापक इकोसिस्टम के साथ मिलकर काम करेगी। इसका उद्देश्य उपकरणों, सामग्रियों और निर्माण प्रक्रियाओं में नवाचार को बढ़ावा देना है—जिसमें विकास और परीक्षण से लेकर सत्यापन और व्यावसायीकरण तक के चरण शामिल हैं।
- निर्यात प्रोत्साहन मिशन: 2025-26 से 2030-31 तक 25,060 करोड़ रुपये के बजट वाले इस मिशन में निर्यात, वित्त, गुणवत्ता अनुपालन, लॉजिस्टिक्स और बाजार तक पहुंच के लिए सहायता शामिल है। यह विशेष रूप से एमएसएमई और पहली बार निर्यात करने वालों के लिए है। इसके दो घटक- 'निर्यात प्रोत्साहन' और 'निर्यात दिशा' - निर्यातकों को वित्त प्राप्त करने, अंतरराष्ट्रीय मानकों को पूरा करने और व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता बैठकों तथा वेयरहाउसिंग सुविधाओं के जरिए विदेशी खरीदारों से जुड़ने में मदद करते हैं। खेल सामग्री से जुड़ी योजना, ब्रांडिंग, पहुंच बढ़ाने और बाजार विकास के लिए इसी व्यापक ढांचे का उपयोग करेगी, जिससे भारतीय निर्माताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी।
- खेलो इंडिया और फिट इंडिया: 'खेलो इंडिया' खेल में भागीदारी, प्रतिभा विकास, प्रशिक्षण और खेल अवसंरचना को बढ़ावा देता है, जबकि 'फिट इंडिया' फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली को प्रोत्साहित करता है। विनिर्माण योजना भारत के खेल क्षेत्र और एथलीट विकास कार्यक्रमों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाणित खेल सामग्री का उत्पादन करने की क्षमता को मजबूत करके इन प्रयासों को पूरा करेगी।
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खेलो इंडिया योजना
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- 2017 में शुरू की गई: खेल विकास के लिए 'राजीव गांधी खेल अभियान', 'शहरी खेल अवसंरचना योजना' और 'राष्ट्रीय खेल प्रतिभा खोज योजना' को एक ही ढांचे के अंतर्गत लाया गया।
- पाँच स्तंभ: प्रतिभा की पहचान के लिए प्रशिक्षण केंद्र; कोचों और खेल कर्मचारियों की क्षमता निर्माण; खेल विज्ञान और प्रौद्योगिकी; प्रतियोगिताएं और लीग; तथा खेल अवसंरचना।
- जुलाई 2026 तक की स्थिति: 3,176 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 349 खेल अवसंरचना परियोजनाओं को मंजूरी; 1,067 खेलो इंडिया केंद्र; 267 अकादमियों को सहयोग; और 2,745 खेलो इंडिया एथलीटों को कोचिंग, उपकरण, चिकित्सा देखभाल और मासिक भत्ते के माध्यम से सहायता।
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खेलो भारत नीति 2025: यह नीति खेल को आर्थिक विकास के एक प्रेरक के रूप में मान्यता देती है, जिसमें उद्यमिता, निवेश और खेल-संबंधी स्टार्टअप शामिल हैं। विनिर्माण योजना, खेल विकास को उत्पादन, नवाचार, रोज़गार और निर्यात के अवसरों से जोड़कर इस दृष्टिकोण का समर्थन करती है।
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खेलो भारत नीति 2025
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- राष्ट्रीय खेल नीति: 'विकसित भारत' के दृष्टिकोण के अनुरूप, राष्ट्र-निर्माण, आर्थिक विकास और सामाजिक समावेश के लिए खेलों का उपयोग करती है।
- जमीनी स्तर से लेकर उच्च स्तर तक: प्रतिभाओं की जल्द पहचान और उन्हें निखारना, प्रतिस्पर्धी लीग तथा ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास।
- सभी के लिए खेल: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली पाठ्यक्रम में खेल को शामिल करना और महिलाओं, वंचित समूहों, आदिवासी समुदायों तथा दिव्यांग व्यक्तियों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करना।
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- मेक इन इंडिया, आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत@2047: घरेलू विनिर्माण का विस्तार करके, मूल्य संवर्धन को बढ़ाकर और आयात पर निर्भरता कम करके, यह योजना 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का समर्थन करती है। निवेश, रोजगार और निर्यात पर इसका फोकस 'विकसित भारत@2047' के दृष्टिकोण में भी योगदान देता है।
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाएं: विनिर्माण वृद्धि को बढ़ावा देना
उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं 14 क्षेत्रों में उत्पादन और बिक्री में वृद्धि पर प्रोत्साहन देती हैं, जिससे निवेश और प्रतिस्पर्धी विनिर्माण को बढ़ावा मिलता है।
जून 2026 तक, इन योजनाओं के तहत:
- 2.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया।
- 23.8 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन और बिक्री हुई।
- •15.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निर्यात को बढ़ावा मिला।
- 14.6 लाख नौकरियां पैदा हुईं।
खेल सामग्री के लिए एक वैश्विक केंद्र की ओर
इस योजना से भारत को खेल सामग्री के डिजाइन, विकास और निर्माण के लिए वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में स्थापित होने की उम्मीद है। विनिर्माण को मज़बूत करके, नवाचार को बढ़ावा देकर और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच बढ़ाकर, यह योजना विकास, रोज़गार और निर्यात के लिए नए अवसर पैदा करेगी। साथ ही, यह एक प्रमुख खेल राष्ट्र के रूप में उभरने की भारत की आकांक्षा को भी समर्थन देगी।
संदर्भ
पीआईबी बैकग्राउंडर्स
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=154856&ModuleId=3®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2232079®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?NoteId=159409&ModuleId=3®=48&lang=1
https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?id=160146&NoteId=160146&ModuleId=3®=3&lang=1
नीति आयोग
https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2026-03/Realising-the-Export-Potential-of-India-Sports-Equipment-Manufacturing-Sector.pdf
कैबिनेट
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2241785®=48&lang=2
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वित्त मंत्रालय
https://www.indiabudget.gov.in/doc/budget_speech.pdf
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2253019®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2308465®=48&lang=2
अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन
https://www.anrf.gov.in/about-anrf
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