प्रविष्टि तिथि:
28 OCT 2026 6:38PM by PIB Delhi
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प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना केंद्र प्रायोजित योजना है। इस योजना को 2026-27 से 2030-31 तक के लिए स्वीकृति दी गई है। इसका कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ है। यह योजना सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए है। इसके साथ ही पात्र पारंपरिक ग्रामीण स्थानीय सरकारी संस्थाएं भी इसके दायरे में आती हैं। योजना का उद्देश्य एकीकृत और भागीदारीपूर्ण विकास योजना के केंद्रों के रूप में ग्राम पंचायतों को मजबूत करना है। इसके वार्षिक लक्ष्यों में 2.55 लाख से अधिक ग्राम विकास योजनाएं और 2.55 लाख से अधिक ऑनलाइन ऑडिट योजनाएं शामिल हैं। जागरूकता बढ़ाने के हर समन्वित प्रयास का लक्ष्य कम से कम एक करोड़ नागरिकों तक पहुंचना है। जमीनी स्तर पर शासन को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल एकीकरण, क्षमता विकास और वित्तीय जवाबदेही को मुख्य माध्यम बनाया गया है।
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विकसित ग्राम स्वराज की रूपरेखा
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर, 2026 को 'प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना' को स्वीकृति दी। यह ग्रामीण स्थानीय शासन के कायाकल्प के लिए केंद्र प्रायोजित योजना है। यह पहल जमीनी स्तर के विकास को 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ जोड़ती है। इसका उद्देश्य पंचायतों को सशक्त, आत्मनिर्भर, जवाबदेह और बेहतर प्रदर्शन करने वाली स्थानीय स्वशासन संस्थाओं में बदलना है।
एक नजर में: प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना
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कार्यान्वयन की अवधि
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2026-27 से 2030-31
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कुल वित्तीय परिव्यय (बजट)
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₹7,395.55 करोड़
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केंद्र सरकार का हिस्सा
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₹4,869.48 करोड़
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राज्य सरकार का हिस्सा
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₹2,526.07 करोड़
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प्रत्यक्ष लाभार्थी
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लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और अन्य हितधारक।
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संस्थागत दायरा
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2.55 लाख से अधिक पंचायतें और पारंपरिक स्थानीय निकाय।
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भौगोलिक दायरा
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सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश; इसमें वे पारंपरिक ग्रामीण स्थानीय सरकारी संस्थाएं भी शामिल हैं जो 'भाग IX' (Part IX) के अंतर्गत नहीं आतीं और जहां पंचायतें मौजूद नहीं हैं।
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बदलाव के लिए वित्तीय सहायता
'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' का कुल बजट ₹7,395.55 करोड़ है। इसमें केंद्र सरकार ₹4,869.48 करोड़ और राज्य सरकारें ₹2,526.07 करोड़ का योगदान देंगी। इस योजना की अवधि 16वें वित्त आयोग की अवधि के साथ मेल खाती है। आयोग ने 2026-27 से 2030-31 के दौरान ग्रामीण स्थानीय निकायों के लिए लगभग ₹4.35 लाख करोड़ के अनुदान की अनुशंसा की है। यह योजना पंचायतों को इन संसाधनों का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग करने में मदद करेगी। यह राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, सरकारी योजनाओं, उपलब्ध फंड और स्थानीय आकांक्षाओं को आपस में जोड़ेगी।
जमीनी स्तर पर बदलाव के छह स्तंभ
'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' छह व्यापक स्तंभों पर केंद्रित है। ये स्तंभ स्थानीय बाधाओं की पहचान को मजबूत करेंगे, स्थानीय योजना और शासन क्षमताओं में सुधार करेंगे, डिजिटल एकीकरण को बढ़ावा देंगे, और जमीनी स्तर पर संसाधनों के पारदर्शी उपयोग को सुनिश्चित करेंगे।
1. स्थानीय शासन के केंद्र के रूप में ग्राम पंचायतें: 'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' में ग्राम पंचायतों को स्थानीय विकास योजना के केंद्र में रखा गया है। पंचायतें गांव की प्राथमिकताओं, सरकारी हस्तक्षेपों और उपलब्ध संसाधनों के बीच समन्वय करेंगी। यह दृष्टिकोण राष्ट्रीय विकास लक्ष्यों को ग्रामीण समुदायों की जरूरतों और आकांक्षाओं से जोड़ेगा।
2. ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक योजना: यह योजना केंद्र और राज्य के विभागीय नियोजन कार्यों को साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाएगी। इससे 'ग्राम पंचायत विकास योजनाओं' (जीपीडीपी) को व्यापक रूप से तैयार करने में मदद मिलेगी। यह एकीकृत दृष्टिकोण विभागों को कमियों की पहचान करने, कार्यों में तालमेल बिठाने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाएगी। अलग-अलग योजनाओं को लागू करने के लिए मौजूदा विभागीय व्यवस्थाएं पहले की तरह काम करती रहेंगी।
3. डिजिटल शासन: 'ई-ग्राम स्वराज' (eGramSwaraj) और पहले से मौजूद 'ई-पंचायत' प्रणालियों को आगे बढ़ाते हुए, 'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' सभी जानकारियों को साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एकत्रित करेगी। इस प्लेटफॉर्म पर सरकारी योजनाओं, लाभार्थियों, मिलने वाले लाभों, सामुदायिक संपत्तियों और उपलब्ध संसाधनों की जानकारी होगी। इससे पंचायतों को विकास कार्यों में कमियों को पहचानने और योजना बनाने, समन्वय करने तथा निगरानी में सुधार करने में मदद मिलेगी। यह प्लेटफॉर्म विभिन्न राज्यों की ग्राम पंचायतों के बीच जानकारी साझा करने में भी सहायक होगा।
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ई-ग्राम स्वराज (eGramSwaraj)
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2020 में शुरू किया गया 'ई-ग्राम स्वराज', पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के लिए काम पर आधारित व्यापक एप्लिकेशन है। इसमें पंचायत के कामकाज के सभी पहलू शामिल हैं - जैसे योजना बनाना, बजट तैयार करना, हिसाब-किताब रखना, निगरानी करना, संपत्ति प्रबंधन और ऑनलाइन भुगतान आदि - जो एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। 'ई-ग्राम स्वराज' को कई अन्य सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्मों के साथ जोड़ा गया है। इनमें ऑनलाइन भुगतान और वित्तीय प्रबंधन के लिए 'पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम' (पीएफएमएस), खरीद-फरोख्त के लिए 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' (GeM), बहुभाषी एआई -आधारित सेवाओं के लिए 'भाषिणी' (भाषिणी), 'भारतनेट' (BharatNet) कनेक्टिविटी की निगरानी के लिए बीएसएनएल, और मौसम संबंधी जानकारी के लिए 'भारतीय मौसम विज्ञान विभाग' (आईएमडी) शामिल हैं।
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4. राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय जरूरतों से जोड़ना: यह योजना मौजूदा प्रशिक्षण, डिजिटल और आउटरीच प्लेटफॉर्म का उपयोग करेगी, ताकि सरकारी योजनाओं को सरल भाषा में समझाया जा सके। ग्राम सभाएं और पंचायत मंच समुदाय के बीच जानकारीपूर्ण चर्चाओं को बढ़ावा देंगे, जिससे 'जन भागीदारी' को प्रोत्साहन मिलेगा। 'पंचम' (PANCHAM) इस प्रयास में मदद करेगा; यह एआई-सक्षम है, कई भाषाओं में काम करता है और 17 भारतीय भाषाओं में दोतरफा संवाद की सुविधा देता है। ये प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्थानीय जरूरतों और गांवों के विकास लक्ष्यों से जोड़ने में सहायक होंगे।
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पंचम (PANCHAM) - पंचायत सहायता और मैसेजिंग चैटबॉट
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जनवरी 2026 में लॉन्च किया गया 'पंचम' (PANCHAM) व्हाट्सएप-आधारित टूल है। यह पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों के बीच सीधे, समय पर और दोतरफा डिजिटल संवाद की सुविधा देता है। 'पंचम' के जरिए योजनाओं के अपडेट, प्रशिक्षण सामग्री, सर्वेक्षण और पंचायत सेवाओं की जानकारी आसानी से मिल सकती है। इससे जमीनी स्तर पर सेवाओं का वितरण अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनता है।
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5. इस दृष्टिकोण को लागू करने के लिए क्षमता विकास: 'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' निर्वाचित प्रतिनिधियों और पंचायत कर्मियों की क्षमताओं को मजबूत करेगी। यह काम 'इंटीग्रेटेड गवर्नमेंट ऑनलाइन ट्रेनिंग' और 'नेशनल एकेडमी फॉर कैपेसिटी बिल्डिंग ऑफ सिविल सर्विसेज' के माध्यम से किया जाएगा। स्थानीय प्रतिनिधियों को विशेष (जैसे इंजीनियरिंग एस्टीमेट तैयार करना) और सामान्य - दोनों तरह का प्रशिक्षण दिया जाएगा। क्षमता विकास से डिजिटल प्लेटफॉर्म का प्रभावी उपयोग, योजनाओं और संसाधनों की जानकारी को समझना, समग्र योजना बनाना और नागरिकों के साथ संवाद करना आसान होगा। इन क्षमताओं की मदद से पंचायतें स्थानीय चर्चाओं को विकास योजनाओं और आगे की ठोस कार्रवाई में बदल सकेंगी।
6. उपलब्ध संसाधनों का पारदर्शी और कुशल उपयोग: यह योजना पंचायतों को 'वित्त आयोग' से मिलने वाले अनुदान और अन्य फंडों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने में सक्षम बनाएगी। यह पंचायतों को अपने स्वयं के राजस्व (Own Source Revenue - OSR) जुटाने में भी मदद करेगी। ऑनलाइन अकाउंटिंग, ऑडिटिंग और सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा करने से वित्तीय जवाबदेही बढ़ेगी। इन कदमों से संसाधनों का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित होगा और पंचायतें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी।
दृष्टिकोण को मापने योग्य परिणामों में बदलना
'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' में योजना बनाने, नागरिकों को जागरूक करने, क्षमता विकास और वित्तीय जवाबदेही के लिए वार्षिक लक्ष्य तय किए गए हैं:
- यह योजना 'ई-ग्राम स्वराज' (eGramSwaraj) पोर्टल पर हर साल 2.55 लाख से अधिक 'ग्राम पंचायत विकास योजनाओं' (जीपीडीपी) को तैयार करने में मदद करेगी। इन योजनाओं में गांव की प्राथमिकताओं, केंद्र और राज्य विभागों के कार्यों, और उपलब्ध संसाधनों को एक साथ शामिल किया जाएगा। समन्वित जागरूकता अभियानों के जरिए सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय योजनाओं के बारे में लोगों की समझ बेहतर होगी।
- जागरूकता बढ़ाने वाले प्रत्येक चरण (एपिसोड) में कम से कम 1 करोड़ नागरिकों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, जनसंपर्क गतिविधियों, ग्राम सभाओं और पंचायत मंचों का उपयोग किया जाएगा। इन जागरूकता अभियानों का उद्देश्य सरकारी योजनाओं और राष्ट्रीय योजनाओं के बारे में लोगों की समझ को बेहतर बनाना है, ताकि वे अपने स्थानीय स्तर पर इनके प्रभावों के बारे में जानकारीपूर्ण चर्चा कर सकें।
- हर साल लगभग 32 लाख गवर्नेंस स्टेकहोल्डर्स (शासन से जुड़े हितधारकों) को सहायता दी जाएगी। इनमें चुने हुए प्रतिनिधि, पंचायत पदाधिकारी और अन्य हितधारक शामिल हैं, जिन्हें क्षमता विकास और डिजिटल कार्यों में मार्गदर्शन (डिजिटल हैंडहोल्डिंग) प्रदान किया जाएगा। इन प्रयासों से योजना बनाने, नागरिकों के साथ संवाद करने, संसाधनों के प्रबंधन और स्थानीय स्तर पर 'सतत विकास लक्ष्यों' (एसडीजी) की दिशा में प्रगति को मजबूती मिलेगी।
- इस योजना के तहत हर साल कम से कम 2.55 लाख ऑनलाइन ऑडिट योजनाओं को समर्थन दिया जाएगा। 'ऑडिटऑनलाइन' (AuditOnline) के माध्यम से इन ऑडिट कार्यों को समय पर पूरा करने की उम्मीद है। बेहतर अकाउंटिंग और सार्वजनिक रूप से जानकारी साझा करने (पब्लिक डिस्क्लोज़र) से उपलब्ध फंड के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी।
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ऑडिटऑनलाइन (AuditOnline)
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पंचायतों के वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता को और मजबूत करने के लिए, पंचायती राज खातों का ऑनलाइन ऑडिट करने हेतु 2020 में 'ऑडिटऑनलाइन' एप्लिकेशन लॉन्च किया गया था। इस एप्लिकेशन को हर राज्य के ऑडिट अधिनियम/नियमों के अनुसार कॉन्फ़िगर (सेट) किया जा सकता है।
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योजना को कैसे लागू किया जाएगा
'पीएम विकसित ग्राम स्वराज योजना' मौजूदा सरकारी संस्थानों और प्रणालियों के माध्यम से काम करेगी। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन अपनी 'वार्षिक कार्य योजनाएं' जमा करेंगे। इनमें योजना के तहत की जाने वाली गतिविधियों, प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं का विवरण होगा। निर्धारित 'केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति' इन योजनाओं का मूल्यांकन करेगी और उन्हें स्वीकृति देगी। यह पूरी प्रक्रिया तय नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार होगी। केंद्र सरकार और राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के दायरे में रहकर काम करेंगे। विभिन्न प्रशासनिक स्तरों पर बेहतर समन्वय से योजना को लागू करने में सहायता मिलेगी। तकनीकी सहायता, निगरानी और समीक्षा के जरिए भी इसे लागू करने में सहयोग मिलेगा। मौजूदा संस्थागत, डिजिटल, क्षमता-निर्माण और संचार प्रणालियां जमीनी स्तर तक लाभ पहुँचाने में सहायक होंगी।
इस योजना में स्थायी पदों के सृजन का कोई प्रावधान नहीं है। हालाँकि, राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर जरूरत के अनुसार संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर कर्मचारियों को रखने का प्रावधान है। ये कर्मचारी तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे और योजना के उद्देश्यों को हासिल करने में सहायता करेंगे।
मजबूत स्थानीय शासन के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाना
'प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना' का उद्देश्य ग्रामीण शासन को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाना है। यह योजना नियोजन, डिजिटल प्रणालियों, सामुदायिक भागीदारी और वित्तीय प्रबंधन को एक साथ लाती है। जैसे-जैसे ग्रामीण विकास के संसाधन और राष्ट्रीय योजनाओं का विस्तार हो रहा है, वैसे-वैसे जमीनी स्तर की मजबूत संस्थाओं की आवश्यकता भी बढ़ रही है; यह योजना इसी जरूरत को पूरा करती है। इसका लक्ष्य स्थानीय शासन को अधिक समन्वित, पारदर्शी और सामुदायिक प्राथमिकताओं के प्रति संवेदनशील बनाना है। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य जमीनी स्तर की संस्थाओं को समावेशी ग्रामीण विकास के मुख्य वाहक के रूप में मजबूत करना है, जो 'विकसित भारत' के व्यापक विजन में योगदान दे सकें।
संदर्भ
पंचायती राज मंत्रालय
https://x.com/mopr_goi/status/2014634258313445622
https://www.pib.gov.in/PressReleaseDetail.aspx?PRID=2329491®=3&lang=1
https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1845366®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2297553®=48&lang=2
https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1907878®=48&lang=2
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