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एनआईटी रायपुर में राष्ट्रीय इंजीनियरिंग सम्मेलन MEET 2026 का शुभारंभ, नवाचार और आत्मनिर्भरता पर जोर

वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने युवाओं से उभरते अवसरों की पहचान कर तकनीक आधारित समाधान विकसित करने का किया आह्वान

180 टीमों के 270 प्रतिभागी बहुविषयक अनुसंधान, परियोजना विकास और तकनीकी नवाचार पर करेंगे मंथन

प्रविष्टि तिथि: 26 OCT 2026 6:12PM by PIB Raipur

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी (आईएनएई) के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को दो दिवसीय आईएनएई यूथ कॉन्क्लेव 2026-सह-बहुविषयक इंजीनियरिंग एवं उभरती प्रौद्योगिकी पर राष्ट्रीय सम्मेलन (एमईईटी 2026) का शुभारंभ हुआ। “भारत की सतत आत्मनिर्भरता के लिए युवा इंजीनियरिंग” (वाईईआईएसएस 2026) विषय पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को नवाचार के लिए प्रेरित करना, बहुविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका को मजबूत करना है।

उद्घाटन समारोह में छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रोफेसर एन. वी. रमण राव मुख्य संरक्षक तथा आईएनएई के उपाध्यक्ष प्रोफेसर शिवाजी चक्रवर्ती संरक्षक के रूप में उपस्थित रहे। नेताजी सुभाष प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, दिल्ली के अनुसंधान एवं विकास से जुड़े प्रधानमंत्री प्रोफेसर तथा राष्ट्रीय अनुसंधान प्रतिष्ठान के प्रोफेसर भिम सिंह और कर्नाटक स्थित कैगा परमाणु विद्युत केंद्र की स्टेशन निदेशक सुश्री आर. एम. नचम्मई विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। एनआईटी रायपुर की प्रोफेसर अर्चना शर्मा तथा यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एन. वी. स्वामी नायडू सह-संरक्षक रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. संजीव कुमार ने की। इस अवसर पर संस्थान के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

मुख्य अतिथि वित्त मंत्री श्री ओ. पी. चौधरी ने अपने प्रशासनिक और वित्तीय अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज आम जनजीवन से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था तक हर क्षेत्र की निर्भरता प्रौद्योगिकी पर लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि तकनीकी व्यवस्था में छोटी-सी बाधा भी व्यापक प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में तकनीकी मजबूती, नवाचार और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप समाधान विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों के विकास का उल्लेख करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से जरूरतों की पहचान करने, उभरते अवसरों को समझने और पहल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी वर्तमान क्षमताओं तक सीमित रहने के बजाय नई चीजें सीखने और नए क्षेत्रों में काम करने के लिए तत्पर रहना चाहिए।

श्री चौधरी ने सिविल सेवा से वित्तीय प्रशासन तक की अपनी व्यावसायिक यात्रा का उल्लेख करते हुए युवाओं को मेहनत करने, चुनौतियों को स्वीकार करने और उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य हासिल करने की प्रक्रिया में प्राप्त अनुभव और सीख भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितना कि अंतिम परिणाम। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास, निरंतर प्रयास और दूरदर्शी सोच के साथ अपने विचारों को व्यावहारिक उपलब्धियों में बदलने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. संजीव कुमार ने अपने प्रारंभिक संबोधन में इंजीनियरिंग के सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिक उपयोग और सामाजिक आवश्यकताओं से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सम्मेलन के चार प्रमुख घटकों—हैकाथॉन, परियोजना विचार एवं विकास, शोध-प्रबंध प्रस्तुति तथा बहुविषयक शोध-पत्र प्रस्तुति—की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में लगभग 270 प्रतिभागी 180 टीमों के माध्यम से हिस्सा ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग की वास्तविक सार्थकता ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करने में है, जो समाज की समस्याओं का समाधान कर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाएं।

एनआईटी रायपुर के निदेशक प्रोफेसर एन. वी. रमण राव ने सम्मेलन में विभिन्न शैक्षणिक पृष्ठभूमियों से आए विद्यार्थियों की सहभागिता की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस—एआई) बहुविषयक इंजीनियरिंग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसके अनुप्रयोग यांत्रिक, एयरोस्पेस और सिविल इंजीनियरिंग के साथ-साथ डिजिटल ट्विन, स्वास्थ्य सेवा, जैव प्रौद्योगिकी तथा औषधि अनुसंधान में क्वांटम सिमुलेशन जैसे क्षेत्रों में तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को तात्कालिक परिणामों तक सीमित न रहने, रचनात्मक आलोचना को स्वीकार करने तथा धैर्य और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ नवाचार की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।

आईएनएई के उपाध्यक्ष प्रोफेसर शिवाजी चक्रवर्ती ने अकादमी के इतिहास, उद्देश्यों, प्रमुख गतिविधियों, पुरस्कारों और सदस्यता संबंधी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अकादमी देशभर के युवा विद्यार्थियों को मार्गदर्शन और परामर्श उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि उनकी व्यावसायिक क्षमताओं को मजबूत किया जा सके और वे इंजीनियरिंग तथा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे सकें।

प्रोफेसर अर्चना शर्मा ने खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य सेवा और ऊर्जा दक्षता जैसी महत्वपूर्ण चुनौतियों के समाधान के लिए नवाचार तथा बहुविषयक अनुसंधान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से विशेषज्ञों के अनुभवों से सीखने और सामाजिक समस्याओं के समाधान के लिए व्यावहारिक एवं अनुसंधान आधारित दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहित करने तथा देश में नवाचार का मजबूत परिवेश तैयार करने में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एएनआरएफ) की भूमिका और उपलब्ध अवसरों पर भी प्रकाश डाला।

कैगा परमाणु विद्युत केंद्र की स्टेशन निदेशक सुश्री आर. एम. नचम्मई ने कहा कि यह सम्मेलन केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं है, बल्कि सार्थक सहयोग और व्यावसायिक संबंध विकसित करने का अवसर भी प्रदान करता है। उन्होंने आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए चरित्र, जिज्ञासा और नवाचार को प्रगति का आधार बताया। उन्होंने विद्यार्थियों को असफलताओं से सीखने और उन्हें आगे बढ़ने की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा मानने की सलाह देते हुए कहा, “बड़े सपने देखें, साहस के साथ नवाचार करें और आत्मविश्वास से सृजन करें।”

प्रोफेसर भिम सिंह ने ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उभरती प्रौद्योगिकियों की परिवर्तनकारी भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने युवा इंजीनियरों से तकनीकी प्रगति के साथ कदम मिलाकर चलने तथा अपने ज्ञान और क्षमताओं का उपयोग राष्ट्रीय प्राथमिकताओं से जुड़ी समस्याओं के समाधान और समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने वाले नवाचारों के विकास में करने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में यांत्रिक अभियांत्रिकी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एन. वी. स्वामी नायडू ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने विशिष्ट अतिथियों, आईएनएई के प्रतिनिधियों, प्राध्यापकों, आयोजकों, प्रतिभागियों और सहयोगी टीमों के प्रति आभार व्यक्त किया।

दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, तकनीकी सत्र, हैकाथॉन, परियोजना प्रदर्शन, शोध-प्रबंध प्रस्तुतियां और बहुविषयक शोध-पत्र प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। स्कूली विद्यार्थियों, स्नातक एवं स्नातकोत्तर विद्यार्थियों, शोधार्थियों और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर यह सम्मेलन ज्ञान के आदान-प्रदान, विभिन्न विषयों के बीच सहयोग तथा व्यावहारिक समस्याओं के समाधान के लिए अवसर उपलब्ध करा रहा है।

एनआईटी रायपुर और भारतीय राष्ट्रीय इंजीनियरिंग अकादमी की यह पहल युवा इंजीनियरिंग प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, देश के अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक भारत को तकनीकी रूप से सक्षम, टिकाऊ तथा आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सम्मेलन की आयोजन समिति में डॉ. जितेंद्र कुमार राउत, डॉ. आशीष कुमार दाश, डॉ. मधुकृष्णा प्रियदर्शिनी, डॉ. शशि कांत वर्मा और डॉ. सौरव राज आयोजन सचिव के रूप में शामिल हैं। पूरी आयोजन टीम का नेतृत्व सम्मेलन अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार कर रहे हैं।


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आरडीजे/बीकेटी


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