प्रविष्टि तिथि:
22 OCT 2026 6:22PM by PIB Delhi
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय का 'नशा मुक्त भारत अभियान' नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) के अंतर्गत अब तक 35 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है। इनमें 13.94 करोड़ से ज़्यादा युवा और 10.86 करोड़ महिलाएं शामिल हैं। साथ ही, इस अभियान से 32 लाख से अधिक शिक्षण संस्थान भी जुड़े हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सितंबर में नई दिल्ली में आयोजित नशीले पदार्थों के विरुद्ध कार्य बल (एएनटीएफ) के प्रमुखों के तीसरे राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा था कि 31 दिसंबर 2029 तक, देश सामूहिक रूप से भारत से नशीले पदार्थों के कारोबार को जड़ से खत्म करने में सफल हो जाएगा। उन्होंने आपसी समन्वय, स्पष्ट लक्ष्यों, जवाबदेही एवं नशीले पदार्थों के नेटवर्क को समाप्त करने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने 2047 तक 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अंतर्गत युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से बचाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
'नशा मुक्त भारत अभियान' की शुरुआत 15 अगस्त 2020 को हुई और इसने प्रारंभ में 272 संवेदनशील जिलों पर ध्यान केंद्रित किया और अब इसका विस्तार पूरे देश में हो चुका है। यह अभियान युवाओं, महिलाओं एवं समुदायों पर विशेष ध्यान देता है क्योंकि नशीले पदार्थों के सेवन को रोकने एवं स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हैं।

मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये प्रयास नशा-मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में जागरूकता बढ़ाने एवं सामूहिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करने के लिए निरंतर जन-भागीदारी के महत्व को दर्शाते हैं।
उन्होंने कहा कि जागरूकता कार्यक्रमों, शपथ अभियानों, शैक्षिक गतिविधियों और सरकारी विभागों तथा नागरिक समाज के हितधारकों के साथ मिलकर, एनएमबीए का उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम का संदेश लोगों तक उनके रोजमर्रा के जीवन में पहुंचाना है।
उन्होंने आगे कहा कि शैक्षणिक संस्थान, युवा क्लब, महिला समूह एवं स्थानीय समुदाय नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े खतरों के बारे में जानकारी देने और समय पर कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच का काम करते हैं।
अधिकारी ने आगे कहा कि मंत्रालय 'नशा मुक्त भारत अभियान' के माध्यम से नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या से निपटने के लिए समुदाय-आधारित प्रयासों को मज़बूत कर रहा है। यह अभियान नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने की दिशा में मंत्रालय की एक प्रमुख पहल है। युवाओं, महिलाओं, शिक्षण संस्थानों, परिवारों और समुदाय के अन्य हितधारकों को एकजुट करके, यह अभियान एक ऐसा समाज का निर्माण करने की कोशिश कर रहा है जो नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़े खतरों के बारे में जागरूक हो और नशा रोकने, इलाज करने तथा सुधार लाने में सहयोग दे सके।
यह पहल नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए केंद्र सरकार के व्यापक प्रयासों को आगे बढ़ाती है। इन प्रयासों में जागरूकता, रोकथाम, प्रवर्तन एवं पुनर्वास को शामिल करते हुए एक समन्वित दृष्टिकोण अपनाया गया है।
जहां एक ओर प्रवर्तन एजेंसियां नशीले पदार्थों की तस्करी एवं आपूर्ति नेटवर्क को समाप्त करने का काम करती हैं, वहीं एनएमबीए जागरूकता, सामुदायिक भागीदारी और सहायता सेवाओं तक पहुंच के माध्यम से नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने पर ध्यान केंद्रित करता है। यह पूरक दृष्टिकोण मानता है कि नशीले पदार्थों के सेवन की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए न केवल अवैध नशीले पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जरूरी है बल्कि इसके लिए जागरूक समुदायों, समय रहते रोकथाम, सुलभ उपचार एवं समाज में पुनः एकीकरण की भी आवश्यकता है।
एनएमबीए की रणनीति में युवाओं को केंद्र में रखा गया है। यह अभियान उन्हें जागरूकता गतिविधियों एवं सामुदायिक पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है जिससे वे स्वस्थ एवं नशा-मुक्त जीवनशैली के समर्थक बन सकें।
व्यापक राष्ट्रीय नशा-विरोधी रोडमैप में 'नशामुक्त मित्रों' के माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने के महत्व पर भी बल दिया गया है। इस तरह के प्रयास एनएमबीए के उस लक्ष्य को और मजबूत करते हैं, जिसके तहत लोगों को सशक्त बनाया जाता है कि वे सही जानकारी साझा करें, गलत धारणाओं को चुनौती दें और अपने साथियों को जरूरत पड़ने पर मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
सोच-विचार कर निर्णय लेने और समुदाय की सकारात्मक भागीदारी को बढ़ावा देकर, इस अभियान का उद्देश्य युवाओं के लिए सुरक्षात्मक माहौल को मजबूत करना और नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्याओं के प्रति समाज में मौजूद कलंक को कम करना है।
एनएमबीए नशीले पदार्थों की मांग को कम करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाता है जिसमें रोकथाम, मूल्यांकन, उपचार, पुनर्वास, देखभाल के बाद की सहायता, जन-सूचना का प्रसार एवं सामुदायिक जागरूकता शामिल हैं। यह दृष्टिकोण मानता है कि नशीले पदार्थों पर निर्भरता कम करने के लिए उचित सहयोग की आवश्यकता होती है और जब व्यक्ति उपचार प्राप्त कर लेते हैं तथा सम्मान के साथ अपने परिवारों एवं समुदायों में पुनः शामिल होते हैं, तो उनकी रिकवरी और मजबूत होती है।
इस अभियान का उद्देश्य नशीले पदार्थों के सेवन से प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार को बढ़ावा देना भी है। कलंक को कम करने और समझ को बढ़ाने से लोगों और उनके परिवारों की जल्द सहायता लेने में मदद मिल सकती है जबकि सामुदायिक भागीदारी से लंबे समय तक रिकवरी और समाज में उनके समावेश को समर्थन मिल सकता है।
राष्ट्रीय नशा मुक्ति हेल्पलाइन 14446 उन व्यक्तियों एवं परिवारों के लिए एक माध्यम है जो नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी समस्याओं के बारे में जानकारी एवं सहायता चाहते हैं।
'संपूर्ण सरकार' और 'संपूर्ण समाज' के दृष्टिकोण के अंतर्गत, नशीले पदार्थों के सेवन के खिलाफ लड़ाई में सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों, स्वास्थ्य सेवा एवं पुनर्वास सेवा प्रदाताओं, नागरिक समाज संगठनों, परिवारों और नागरिकों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता है। एनएमबीए का समुदाय-आधारित दृष्टिकोण, नशीले पदार्थों के सेवन से जुड़ी जागरूकता, रोकथाम और इसके सामाजिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रीत कर प्रवर्तन एजेंसियों की समन्वित कार्रवाई को और मजबूत करता है।
अधिक जानकारी, जागरूकता संसाधनों एवं अभियान के अपडेट की जानकारी इच्छुक लोग यहां से प्राप्त कर सकते हैं: https://nmba.dosje.gov.in/
इस अभियान में सामूहिक जिम्मेदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है जो देश के युवाओं की सुरक्षा एवं भारत के विकास में उनके योगदान को मजबूत करने के राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप है। जन-जागरूकता को रोकथाम, उपचार, पुनर्वास एवंसामुदायिक सहयोग के साथ जोड़कर, 'नशा मुक्त भारत अभियान' एक स्वस्थ, जागरूक और नशा-मुक्त भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है।
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