सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्‍यम उद्यम मंत्रालय
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राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान(एनआई-एमएसएमई) क्षमता निर्माण, उद्यमिता विकास और डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से एमएसएमई को मजबूती प्रदान कर रहा  


150 देशों के 11,032 अधिकारियों को 550 अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षित किया गया; भारत में आयोजित 17,672 कार्यक्रमों से 6,07,497 प्रतिभागी लाभान्वित हुए

प्रविष्टि तिथि: 21 OCT 2026 7:49PM by PIB Delhi

भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाला एक स्वायत्त संस्थान, राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान(एनआई-एमएसएमई), देशभर में उद्यमिता को बढ़ावा देने, प्रबंधकीय क्षमताओं को सुदृढ़ करने तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों(एमएसएमई) के विकास में सहयोग देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रमों, अनुसंधान, परामर्श, क्षमता निर्माण और संस्थागत साझेदारियों के माध्यम से यह संस्थान एक प्रतिस्पर्धी, कुशल और नवाचार-उन्मुख एमएसएमई इकोसिस्टम के निर्माण में योगदान देता है।

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इस संस्थान को क्षमता निर्माण आयोग(सीबीसी) द्वारा "उत्कृष्ट / UTKRISHT" 3-स्टार रेटिंग दिया गया है। 66 वर्ष पुराना यह संस्थान, व्यापार के अनुकूल माहौल बनाकर एमएसएमई के विकास के लिए नवाचार, उद्यमिता और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाता है। पिछले कई दशकों में, इसने उद्यमियों, नीति-निर्माताओं, सरकारी संस्थानों और उद्योग से जुड़े लोगों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए खुद को विकसित किया है। इसका मुख्य फोकस क्षमता निर्माण, टिकाऊ उद्यम विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने पर है।

उद्यम विकास की गौरवशाली विरासत

इस संस्थान की स्थापना वर्ष 1960 में नई दिल्ली में केंद्रीय औद्योगिक विस्तार प्रशिक्षण संस्थान(सीआईईटीआई) के रूप में हुई थी। यह वर्ष 1962 में हैदराबाद स्थानांतरित हो गया और इसे लघु उद्योग विस्तार प्रशिक्षण संस्थान(एसआईईटी) के रूप में पंजीकृत किया गया। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास अधिनियम, 2006 के अधिनियमन के बाद, वर्ष 2007 में इस संस्थान का नाम बदलकर राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम संस्थान(एनआई-एमएसएमई) कर दिया गया।

यह संस्थान उद्यम स्थापना, वित्त, विपणन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, डिजिटल रूपांतरण, प्रौद्योगिकी अपनाने और सतत व्यावसायिक तौर-तरीकों जैसे क्षेत्रों में कार्य करता है। इसके प्रयास से रोजगार सृजन, उत्पादकता में वृद्धि और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलता है।

एनआई-एमएसएमई की प्रमुख उपलब्धियां

  • अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण: 150 देशों के 11,032 अधिकारियों को प्रशिक्षित करने हेतु 550 अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए गए।
  • राष्ट्रीय प्रशिक्षण: 17,672 कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 6,07,497 प्रतिभागी लाभान्वित हुए।
  • कौशल विकास: 6,840 कार्यक्रमों के माध्यम से 2,10,062 युवाओं को प्रशिक्षित किया गया।
  • एमएसएमई क्लस्टर विकास: एमएसएमई क्लस्टर विकास से संबंधित 27 परियोजनाएं कार्यान्वित की गईं।
  • आईपीएफसी सेवाएं: बौद्धिक संपदा सुविधा केंद्रों(आईपीएफसी) के माध्यम से 235 सेवाएं प्रदान की गईं।
  • अनुसंधान एवं अध्ययन: एमएसएमई के विकास और नीतिगत निर्णयों को समर्थन देने हेतु 962 अनुसंधान अध्ययन पूरे किए गए।

नवाचार और उभरते उद्यमों की आवश्यकताओं को समर्थन करना

बिजनेस द्वारा डिजिटल प्रौद्योगिकियों को तेजी से अपनाने, बाजार की बदलती अपेक्षाओं और विकसित होती उत्पादन प्रणालियों के अनुरूप स्वयं को ढालने के साथ, एनआई-एमएसएमई उद्यम विकास के उभरते क्षेत्रों में निरंतर सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसके कार्यक्रमों और संस्थागत गतिविधियों में डिजिटल विपणन, ई-कॉमर्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), प्रौद्योगिकी-सक्षम विनिर्माण, बौद्धिक संपदा अधिकार, हरित ऊर्जा और सतत उद्यम तौर-तरीकों जैसे विषय शामिल हैं। ये क्षेत्र एमएसएमई की परिचालन दक्षता में सुधार करने, नए उत्पाद विकसित करने, बाजार तक अपनी पहुंच बढ़ाने और प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने के लिए लगातार अधिक प्रासंगिक होते जा रहे हैं।

मार्च 2026 में, संस्थान ने डिजिटल विपणन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) स्वचालन और ई-कॉमर्स पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। इसके बाद, उद्योग 5.0 के साथ डिजिटल-सक्षम कारखानों पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई), औद्योगिक इंटरनेट ऑफ थिंग्स(आईआईओटी) और क्लाउड प्रौद्योगिकियों पर विशेष ध्यान दिया गया। इन सम्मेलनों ने उद्यम विकास और विनिर्माण के क्षेत्र में उभरती प्रौद्योगिकियों के अनुप्रयोग पर चर्चा करने के लिए मंच प्रदान किए। ज्ञान-साझाकरण की ऐसी पहलों के माध्यम से, एनआई-एमएसएमई नए बिजनेस अवसरों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और एमएसएमई को विकास के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित विजन अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने में योगदान देता है।

सफलता की कहानियां एनआई-एमएसएमई के परिवर्तनकारी प्रभाव को दर्शाती हैं:

(ए) नए बाजारों का निर्माण: एक पारंपरिक रेशम उद्यम ने डिजिटल मार्ग अपनाया

तेलंगाना के वनपर्थी स्थित श्री महंकाली चंद्रशेखर की अमरचिंता हैंडलूम वीवर्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड डिजिटल रूपांतरण के माध्यम से सफलता की एक नई कहानी लिख रहा है।

वर्ष 2024–25 में, नाबार्ड के सहयोग से, कंपनी के विपणन कार्यकारी ने एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत एनआई-एमएसएमई में 5-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद, डिजिटल ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच को मजबूत करने के लिए उन्हें एक वर्ष तक निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया गया।

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इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप बिजनेस और गूगल बिजनेस प्रोफाइल का लाभ उठाते हुए, कंपनी ने गूगल के माध्यम से ₹16 लाख का एक महत्वपूर्ण ऑर्डर प्राप्त किया, जबकि उसका वार्षिक कारोबार बढ़कर ₹2.8 करोड़ हो गया। अमरचिंता की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल तकनीकों को अपनाकर बाज़ार तक पहुंच का विस्तार किया जा सकता है, पारंपरिक कारीगरों को सशक्त बनाया जा सकता है और एमएसएमई के विकास को गति प्रदान की जा सकती है।

(बी) मिलेट्स(मोटे अनाज) से बाजार तक: एक महिला उद्यमी के विकास की कहानी

तेलंगाना के श्यामपेट की महिला उद्यमी श्रीमती सुनकिशाला स्वरूपा ने डिजिटल विपणन के माध्यम से अपने मिलेट्स(मोटे अनाज) से बने खाद्य उत्पादों के व्यवसाय को नई दिशा दी। एमएसएमई मंत्रालय के अंतर्गत एनआई-एमएसएमई द्वारा कार्यान्वित नाबार्ड समर्थित परियोजना के तहत, उन्होंने डिजिटल ब्रांडिंग और विपणन पर 5-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इसके बाद, उन्हें एक वर्ष तक निरंतर मार्गदर्शन एवं सहयोग प्रदान किया गया।

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इंस्टाग्राम, गूगल माय बिजनेस और कैनवा का प्रभावी उपयोग करके, उन्होंने अपनी ऑनलाइन मौजूदगी बढ़ाई, अपने ग्राहकों का दायरा बढ़ाया और अपने मिलेट्य(मोटे अनाज) से बने उत्पादों के प्रचार-प्रसार को सुदृढ़ किया।

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प्रभाव:

  • मासिक कारोबार में 10 गुना वृद्धि, ₹20,000 से बढ़कर ₹2 लाख तक पहुंचा।
  • स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित हुए।

उनकी यह यात्रा दर्शाती है कि डिजिटल सशक्तीकरण किस प्रकार महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों में बदलाव ला सकता है और एमएसएमई क्षेत्र के समावेशी विकास को गति प्रदान कर सकता है।

एनआई-एमएसएमई: एमएसएमई को सशक्त बनाना, विकास को गति देना

उद्यमिता विकास, क्षमता निर्माण, अनुसंधान और डिजिटल सशक्तीकरण के क्षेत्र में निरंतर प्रयासों के माध्यम से, एनआई-एमएसएमई भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम(एमएसएमई) पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने और समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में निरंतर योगदान दे रहा है। लाखों प्रतिभागियों को प्रशिक्षित करने,

उद्यम विकास में सहयोग देने और सफलता की कहानियों को साकार करने की इसकी उपलब्धियां, उद्यमियों को सशक्त बनाने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और आजीविका के स्थायी अवसर सृजित करने के प्रति इसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं। बदलते व्यावसायिक परिवेश के अनुरूप स्वयं को ढालने के लिए उद्यमों को आवश्यक कौशल, ज्ञान और साधनों से सुसज्जित करके, एनआई-एमएसएमई भारत में एक आत्मनिर्भर, नवाचारी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एमएसएमई क्षेत्र के निर्माण में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बना हुआ है।

और अधिक जानकारी के लिए इस वेबसाइट पर जाएं: http://www.nimsme.gov.in/

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पीके/केसी/आरटी/पीकेपी/डीए


(रिलीज़ आईडी: 2326307) आगंतुक पटल : 36
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