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आईआईटी रुड़की और त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन के बीच हथकरघा क्षेत्र के पुनरुद्धार हेतु समझौता

- तीन वर्षीय साझेदारी के तहत उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी और धलाई जिलों की 500 महिला स्वयं सहायता समूह बुनकरों को सशक्त बनाया जाएगा।
- डिज़ाइन नवाचार, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, ब्रांडिंग, उद्यमिता और डिजिटल बाजार तक पहुंच पर रहेगा विशेष जोर।
- पारंपरिक हथकरघा कौशल को आधुनिक डिज़ाइन एवं व्यावसायिक प्रक्रियाओं से जोड़कर ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा दिया जाएगा।
- साझेदारी का उद्देश्य महिला उद्यमिता, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बाजार संपर्क को मजबूत करना है।
- ‘प्रयोगशाला से क्षेत्र तक’ की अवधारणा के अनुरूप अनुसंधान एवं नवाचार को जमीनी स्तर पर पहुंचाने पर जोर।

प्रविष्टि तिथि: 12 OCT 2026 4:19PM by PIB Dehradun

त्रिपुरा में महिलाओं के नेतृत्व वाले हथकरघा उद्यमों को सशक्त बनाने और पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन (TRLM) और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह साझेदारी पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को टिकाऊ एवं बाजारोन्मुख आजीविका तंत्र में परिवर्तित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर त्रिपुरा सरकार के ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री अभिषेक सिंह तथा आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग के प्रमुख प्रो. ए. के. शर्मा उपस्थित रहे। समझौते पर TRLM के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री तरित कांति चकमा और आईआईटी रुड़की के डिज़ाइन विभाग के प्रो. बिभूति रंजन भट्टाचार्य ने हस्ताक्षर किए। तीन वर्ष की इस साझेदारी का उद्देश्य उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी और धलाई जिलों की 500 महिला स्वयं सहायता समूह (SHG) बुनकरों को सशक्त बनाना है। इसके तहत प्रौद्योगिकी, डिज़ाइन नवाचार, कौशल विकास, ब्रांडिंग, उद्यमिता और डिजिटल बाजार तक पहुंच को एकीकृत किया जाएगा।

 

इस अवसर पर श्री अभिषेक सिंह ने अनुसंधान और नवाचार को प्रयोगशालाओं से आगे ले जाने तथा समुदायों के लिए उनके प्रभावी रूपांतरण को सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने और सामाजिक विकास में सार्थक योगदान देने के लिए ‘प्रयोगशाला से क्षेत्र तक’ (Lab-to-Field) अनुप्रयुक्त अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. ए. के. शर्मा ने विकासात्मक पहलों और समुदायों के साथ जुड़कर सार्थक एवं टिकाऊ प्रभाव उत्पन्न करने के आईआईटी रुड़की के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने टिकाऊ ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन में डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी तथा बहुविषयक ज्ञान की भूमिका पर जोर दिया।

श्री तरित कांति चकमा ने ग्रामीण समुदायों तक ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पहुंचाने के लिए प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित करने की TRLM की पहलों का उल्लेख किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर नए अवसर सृजित करने और आजीविका में सुधार लाने के लिए संस्थागत साझेदारियों को मजबूत करने के महत्व पर बल दिया।

यह सहयोग डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञता को TRLM के ग्रामीण समुदायों तथा महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के व्यापक नेटवर्क के साथ जोड़ेगा। पारंपरिक शिल्प कौशल को समकालीन डिज़ाइन और व्यावसायिक प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत करके इस पहल का उद्देश्य उत्पादकता, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच को बढ़ाना है। साथ ही, डिज़ाइन-आधारित एवं प्रौद्योगिकी-सक्षम हस्तक्षेपों के माध्यम से महिला उद्यमिता, टिकाऊ आजीविका और आय के बेहतर अवसरों को प्रोत्साहित करते हुए एक सुदृढ़ हथकरघा मूल्य शृंखला विकसित की जाएगी।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में प्रो. सौरव अरोड़ा, प्रो. कल्पक के. कुलकर्णी तथा त्रिपुरा के विभिन्न जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले TRLM के अधिकारियों ने भाग लिया। यह साझेदारी समावेशी नवाचार, महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता और टिकाऊ ग्रामीण विकास के प्रति आईआईटी रुड़की तथा TRLM की साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। इसके माध्यम से डिज़ाइन-आधारित नवाचार और उद्यम विकास के जरिए त्रिपुरा की समृद्ध हथकरघा विरासत को समकालीन बाजारों तक पहुंचाने के नए अवसर विकसित किए जाएंगे।


(रिलीज़ आईडी: 2322282) आगंतुक पटल : 10
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