सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय
“सुगम्यता को बाद का विचार नहीं बनाया जा सकता है”: डीईपीडब्लूडी ने सुगम्य भारत के सरकार के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया
प्रविष्टि तिथि:
09 OCT 2026 7:13PM by PIB Delhi
“सुगम्यता को बाद का विचार नहीं बनाया जा सकता, और न ही इसे किसी एक विभाग या एजेंसी पर छोड़ा जा सकता है। इसके लिए सिविल सोसाइटी की साझेदारी के साथ सभी मंत्रालयों, विभागों और सरकार के सभी स्तरों पर एक ठोस प्रयास की आवश्यकता है।” यह संदेश दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) की अपर सचिव, आईएएस सुश्री मनमीत कौर नंदा का था, जब उन्होंने नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित “सुगमता का संकल्प” परामर्श बैठक में भारत भर में सुगम्यता को आगे बढ़ाने के लिए एक समन्वित, सरकार के समग्र दृष्टिकोण का आह्वान किया।

इस बात पर जोर देते हुए कि सुगम्यता शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार, परिवहन, वित्तीय सेवाओं और सार्वजनिक बुनियादी ढांचे तक फैली हुई है, सुश्री नंदा ने रेखांकित किया कि एक क्षेत्र में प्रगति अन्य क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई पर निर्भर करती है। उन्होंने राज्यों द्वारा सुगम्यता को वह प्राथमिकता दिए जाने की आवश्यकता पर बल दिया जिसके वह योग्य है, तथा एक समावेशी और सुगम भारत के विजन को वास्तविकता में बदलने के लिए सभी हितधारकों को मिलकर काम करने के लिए कहा। उनके संदेश ने इस बात को पुष्ट किया कि सुगम्यता को बाद में जोड़े जाने या सुधारने के बजाय डिजाइन के चरण में ही शामिल किया जाना चाहिए।
डीईपीडब्लूडी, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 'द एसोसिएशन ऑफ पीपल विद डिसेबिलिटी (एपीडी), इंडिया' की साझेदारी में और इप्सोस के सहयोग से आयोजित इस परामर्श बैठक में 'सुगम्य भारत अभियान' की प्रगति का आकलन करने, निरंतर बनी हुई सुगम्यता संबंधी कमियों की पहचान करने और इसके अगले चरण की प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए सरकार, दिव्यांगता क्षेत्र, अकादमिक जगत, अनुसंधान और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि एक साथ आए।

डीईपीडब्लूडी के संयुक्त सचिव श्री गिरीश सी. होसुर ने सुगम्य भारत अभियान की यात्रा और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया, जिसमें सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, परिवहन और डिजिटल सेवाओं में सुगम्यता को आगे बढ़ाने तथा पहल का नेतृत्व करने में विभाग की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। उनके प्रस्तुतीकरण ने आने वाले वर्षों में प्रगति को सुदृढ़ करने और कार्यान्वयन को मजबूत करने पर चर्चा के लिए पृष्ठभूमि तैयार की।
दिव्यांगजन मुख्य आयुक्त कार्यालय के आयुक्त श्री एस. गोविंदराज ने इस बात पर जोर दिया कि सुगम्यता समय की मांग है। उन्होंने देश भर में सुगम्यता को आगे बढ़ाने में सुगम्य भारत अभियान के महत्व को रेखांकित किया और दिव्यांगजनों को प्रभावित करने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए अब तक हासिल की गई प्रगति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए, एपीडी के अध्यक्ष श्री सुबीर हरि सिंह ने सुगम्यता को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्थक प्रगति सरकार, चिकित्सकों, विशेषज्ञों और दिव्यांगजनों के बीच निरंतर साझेदारी पर निर्भर करती है। उन्होंने एपीडी के मिशन और दिव्यांगता क्षेत्र में इसके कार्यों का भी खाका प्रस्तुत किया।
इस परामर्श बैठक में इप्सोस की निदेशक सुश्री तृप्ति शर्मा के नेतृत्व में दो संचालित गोलमेज चर्चाएं हुईं। पहली चर्चा में सुगम्यता डेटा के कार्यान्वयन और उपयोग में आने वाली क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों का परीक्षण किया गया, जबकि दूसरी चर्चा में विभिन्न क्षेत्रों में सुगम्यता को मापने के तरीकों तथा एक विश्वसनीय एवं व्यावहारिक माप ढांचे की आवश्यक विशेषताओं का पता लगाया गया। चर्चाओं में योजना बनाने, कार्यान्वयन की निगरानी करने और प्रगति का आकलन करने के लिए विश्वसनीय डेटा और साक्ष्य के महत्व को रेखांकित किया गया।
प्रतिभागियों में शिक्षा मंत्रालय, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, प्रसार भारती और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के प्रतिनिधि शामिल थे। दिव्यांगजन राज्य आयुक्तों, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा की राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों तथा पूरे भारत से आए दिव्यांगता क्षेत्र के नेताओं ने प्रत्यक्ष रूप से और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से भाग लिया।
वर्ष 2015 में शुरू किया गया 'सुगम्य भारत अभियान' निर्मित पर्यावरण, परिवहन प्रणालियों और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों में सुगम्यता को आगे बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल का प्रतीक था। दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 की पृष्ठभूमि में आयोजित इस परामर्श बैठक ने उपलब्धियों पर विचार करने, निरंतर बनी हुई बाधाओं की पहचान करने और सुगम्यता मानकों, कार्यान्वयन तथा माप को मजबूत करने के तरीकों का पता लगाने का अवसर प्रदान किया।
अपने समापन भाषण में, एपीडी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुकांत आइच ने यह अवलोकन किया कि यह सभा स्वयं—एक-दूसरे से सीखने और सहयोग के लिए प्रतिबद्ध होने हेतु हितधारकों को एक साथ लाना—सुगम्य भारत अभियान के विजन को वास्तविकता में बदलने के लिए आशा की एक किरण थी।
इस परामर्श बैठक ने एक सुगम और समावेशी भारत के निर्माण में सरकारों, संस्थानों, सिविल सोसाइटी और दिव्यांगता क्षेत्र की साझा जिम्मेदारी को पुष्ट किया। इसका मुख्य संदेश स्पष्ट था: सुगम्यता को छिटपुट पहलों से आगे बढ़कर प्रत्येक क्षेत्र में एक अभिन्न, मापने योग्य और समन्वित प्राथमिकता बनना चाहिए।
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पीके/केसी/एसके
(रिलीज़ आईडी: 2321590)
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