शिक्षा मंत्रालय
हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल ट्रेड लॉ समिट 2026 का समापन, विश्व व्यापार संगठन की भूमिका और भविष्य पर मंथन
वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक समावेशी और संतुलित बनाने के लिए बहुपक्षीय व्यापार ढांचे के पुनर्गठन पर जोर
विशेषज्ञों ने राजनीतिक-आर्थिक विखंडन के दौर में प्रभावी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की जरूरत रेखांकित की
प्रविष्टि तिथि:
05 OCT 2026 4:51PM by PIB Raipur
हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (एचएनएलयू), रायपुर में तीन दिवसीय इंटरनेशनल ट्रेड लॉ समिट (आईटीएलएस) 2026 का रविवार को समापन हुआ। “द वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन एट 30: रीइमैजिनिंग मल्टीलैटरलिज्म इन इंटरनेशनल ट्रेड लॉ” विषय पर आयोजित समिट में वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक विखंडन के बीच बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था की प्रभावशीलता, चुनौतियों और भविष्य की दिशा पर विशेषज्ञों ने व्यापक विचार-विमर्श किया।

समिट के अंतिम दिन आयोजित उच्चस्तरीय पैनल चर्चा में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रिंसिपल एडवाइजर-ट्रेड पॉलिसी सुमंथा चौधरी, आनंद एंड आनंद के हेड, डिजिटल टेक-लॉ डिवीजन डॉ. ए.के. गर्ग, मिसिसिपी के इंटरनेशनल ट्रेड लॉ विशेषज्ञ प्रो. एंथनी (टोनी) कैम्बस तथा लक्ष्मीकुमारन एंड श्रीधरन अटॉर्नीज की एसोसिएट पार्टनर-इंटरनेशनल ट्रेड दिव्याश्री सूरी ने भाग लिया। पैनल में वर्तमान बहुपक्षवाद, वैश्विक व्यापार प्रणाली की प्रभावशीलता को प्रभावित करने वाली चुनौतियों तथा संस्थागत और नीतिगत स्तर पर इसके पुनरुद्धार की संभावित दिशाओं पर चर्चा हुई।
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समापन सत्र की शुरुआत एचएनएलयू के कुलपति प्रो. (डॉ.) वी.सी. विवेकानंदन के संबोधन से हुई। उन्होंने कहा कि व्यापक राजनीतिक विखंडन के बीच वर्तमान दशक में बहुपक्षवाद भी लगातार अधिक विखंडित हुआ है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार में द्विपक्षीय और क्षेत्रीय व्यवस्थाओं की अपनी वैध भूमिका है, लेकिन वे व्यापक बहुपक्षीय ढांचे का विकल्प नहीं हो सकतीं। उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद कुछ चुनिंदा शक्तियों के संरक्षण या निर्देशित व्यवस्था तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें नया संतुलन विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका और उससे जुड़ी जिम्मेदारियों को भी रेखांकित किया।
समारोह के विशिष्ट अतिथि मद्रास उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता पी.वी.एस. गिरिधर ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून के विकास तथा बहुपक्षीय समझौतों के निर्माण में अधिवक्ताओं और विधि छात्रों की भूमिका पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भविष्य में संस्थागत और कानूनी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाते समय संवैधानिक मूल्यों और संविधान को महत्वपूर्ण आधार बनाए रखना आवश्यक है।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि इकोनॉमिक लॉ एसोसिएट्स के सुहैल नैथानी ने बहुपक्षवाद की उपलब्धियों और सीमाओं का आलोचनात्मक मूल्यांकन किया। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय व्यवस्था को अंततः अपने हितधारकों के लिए ठोस और व्यावहारिक मूल्य प्रदर्शित करना चाहिए। यदि यह सार्थक परिणाम देने में विफल रहती है तो इसे अपने आप में अंतिम लक्ष्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। द्विपक्षीय निवेश संधियों (बीआईटी) के अनुभव का उल्लेख करते हुए उन्होंने हाल के समय में भारत के लिए इनके ठोस लाभों की ओर ध्यान दिलाया। साथ ही उन्होंने कहा कि जहां बहुपक्षवाद समानता, प्रभावशीलता और परिणाम सुनिश्चित करने में सक्षम है, वहां इसकी भूमिका अब भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
इससे पहले डीन रिसर्च प्रो. विष्णु कूनारायर ने अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया। आईटीएलएस के संयोजक एवं सेंटर फॉर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन एंड वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूटीओ एवं डब्ल्यूआईपीओ) के प्रमुख डॉ. अंकित अवस्थी ने तीन दिवसीय समिट का अवलोकन प्रस्तुत किया और इसके अकादमिक तथा पेशेवर योगदानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इंटरनेशनल ट्रेड लॉ समिट के अगले संस्करण का आयोजन अक्टूबर 2027 की शुरुआत में प्रस्तावित है। इसकी थीम की घोषणा बाद में की जाएगी। समारोह में प्रस्तावित इंटरनेशनल ट्रेड लॉ एंड डेवलपमेंट जर्नल की भी घोषणा की गई, जिसे 2027 में शुरू करने का प्रस्ताव है।
तीन दिवसीय समिट में 12 तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें प्रतिभागियों ने विभिन्न विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। इसके अलावा मॉक विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) अभ्यास का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य विधि छात्रों को बहुपक्षीय व्यापार वार्ताओं का व्यावहारिक अनुभव प्रदान करना था।
तकनीकी सत्रों में डिजिटल व्यापार एवं डेटा गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जलवायु परिवर्तन एवं सततता, निवेश सुविधा, सेवा क्षेत्र के उदारीकरण, व्यापार एवं राष्ट्रीय सुरक्षा, विवाद निपटान, शक्ति असमानता तथा विश्व व्यापार संगठन के भविष्य जैसे समकालीन मुद्दों पर चर्चा हुई।
समिट के आयोजन में ऑर्गनाइजिंग टीम की भूमिका को भी रेखांकित किया गया। टीम में उर्वी श्रीवास्तव, डॉ. देबमिता मंडल और डॉ. अंकित सिंह शामिल रहे। छात्र टीम की ओर से अमृता नायर, कृतिका सेंथिल कुमार, सृष्टि शुक्ला और प्रथा चौहान ने विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। कृतिका सेंथिल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया और छात्र आयोजन समिति तथा उसकी विभिन्न टीमों के प्रयासों के लिए आभार व्यक्त किया।
समिट ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार कानून को समकालीन आर्थिक, तकनीकी और नीतिगत विकास से जोड़ते हुए एक महत्वपूर्ण अंतरविषयक मंच उपलब्ध कराया। इसके माध्यम से छात्रों और युवा शोधकर्ताओं को विश्व व्यापार संगठन, बहुपक्षवाद तथा बदलती वैश्विक आर्थिक व्यवस्था से जुड़े समकालीन विमर्श के साथ सीधे जुड़ने का अवसर मिला। समिट का समापन इस व्यापक सहमति के साथ हुआ कि वर्तमान राजनीतिक और आर्थिक विखंडन के दौर में बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को अधिक प्रभावी, समावेशी और संतुलित बनाने के लिए इसकी संस्थागत संरचना पर नए सिरे से विचार और आवश्यक पुनर्गठन की जरूरत है।
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आरडीजे/बीकेटी
(रिलीज़ आईडी: 2319211)
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